दैनिक भास्कर की टीम उस बच्ची के घर तक पहुँची, तो पता चला कि बच्ची के माता-पिता उसे छोड़ कर बचपन में ही चले गए। वह अपनी बूढ़ी दादी के साथ वहाँ रहती है। दादी अपनी जिम्मेदारी का निर्वाह दूसरों के घरों में बरतन धोकर कर रही हैं।
जब टीम बच्ची के घर पहुँची तो उसे बच्ची के अंदर के दर्द का एहसास हुआ। बिलकुल गुमसुम, आँखे वीरान, किसी से मिलने की इच्छा नहीं, किसी के स्पर्श मात्र से सहम जाने वाली मासूम का दर्द उसकी आँखे बयाँ कर रही थी। मासूम पर क्या बीता होगा, ये सोच कर ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं।
बच्ची के घर से थोड़ी दूर पर वह दुकान है, जहाँ अब्दुल ने उसके साथ रेप किया। अब्दुल उसे चॉकलेट देने के बहाने अपने पास बुलाता था। वह अब्दुल को दूसरे बच्चों की तरह ‘दादा’ बोलती थी। उसे पहचानती थी, इसलिए चॉकलेट लेने चली जाती थी। घटना वाले दिन भी वह अब्दुल के बुलाने पर चॉकलेट लेने ही गई थी। लेकिन 65 साल की उम्र में अब्दुल ने बच्ची की मासूमियत को कुचल डाला।
घटना के बाद बच्ची का व्यवहार बदल गया। वह स्कूल नहीं जाना चाहती थी। चार-पाँच दिन बीतने के बाद उसकी दादी ने उसे थप्पड़ भी मारा। दादी कहती है कि जब वह स्कूल जाने के लिए कहती, तो बच्ची बोलती कि उसका पेट दर्द हो रहा है। दादी को लगता था कि वह रोज पेट दर्द का बहाना बनाती है और स्कूल नहीं जाती है।
बच्ची ने दादी को कुछ नहीं बताया बल्कि चाची को घटना के बारे में जानकारी दी। उसने बताया कि अब्दुल दादा ने चॉकलेट देने के लिए उसे बुलाया था। जब वह दुकान के अंदर गई तो दुकान बंद कर दिया। इसके बाद जो कुछ भी उसके साथ हुआ, वह सबकुछ चाची को बता कर रोने लगी। चाची ने पूरी घटना दादी को बताई।
दादी ने स्थानीय पार्षद को घटना की जानकारी दी। इसके बाद अब्दुल को गिरफ्तार किया गया। उसकी अवैध दुकान भी ढाह दी गई। दादी ने दरिंदे को फाँसी देने की माँग की।
बच्ची न तो अब पहले की तरह मुस्कुराती है और न ही हँसती है। हमेशा बोलते रहने वाली बच्ची अब एकदम चुप रहती है। स्कूल जाने के नाम पर वह डरती है। वह हमेशा सहमी हुई रहती है।
आरोपित अब्दुल का अवैध दुकान तोड़े जाने पर कॉन्ग्रेस ने सवाल उठाए हैं। कॉन्ग्रेस का कहना है कि नाकामियों को छिपाने के लिए सरकार बुलडोजर चला रही है। कॉन्ग्रेस का कहना है कि बीजेपी सरकार कानून व्यवस्था संभालने में विफल रही है।

