देश के मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाने के लिए कॉन्ग्रेस और TMC समेत कई विपक्षी दलों के 73 सांसदों ने राज्यसभा में राष्ट्रपति के नाम एक नया नोटिस सौंपा है। इसमें ज्ञानेश कुमार पर ‘सिद्ध कदाचार’ (Proven Misbehaviour) के 9 आरोप लगाए गए हैं।
क्यों हो रही है हटाने की माँग?
विपक्ष का आरोप है कि मुख्य चुनाव आयुक्त निष्पक्ष होकर काम नहीं कर रहे हैं और प्रधानमंत्री व गृह मंत्री के इशारों पर चल रहे हैं। कॉन्ग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि ज्ञानेश कुमार का पद पर बने रहना संविधान पर हमला है। नोटिस में मुख्य रूप से 15 मार्च 2026 के बाद की घटनाओं का जिक्र है। विपक्ष का कहना है कि उन्होंने जो गलतियाँ की हैं, उन्हें अब छिपाया नहीं जा सकता।
विपक्ष ने लगाए ये 9 बड़े आरोप
विपक्ष ने अपने नए नोटिस में मुख्य चुनाव आयुक्त पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। इनमें प्रमुख रूप से आचार संहिता लागू करने में भेदभाव का मुद्दा उठाया गया है, जिसमें प्रधानमंत्री के भाषण पर कार्रवाई न होना और सोशल मीडिया पर TMC को निशाना बनाना शामिल है।
इसके अलावा, केरल में आधिकारिक पत्रों पर भाजपा की सील मिलने को मिलीभगत बताया गया है और बंगाल में 91 लाख मतदाताओं के नाम काटने पर भी सवाल उठाए गए हैं। साथ ही, विपक्षी प्रतिनिधिमंडल के साथ अशिष्ट व्यवहार को आधार बनाकर उन्हें पद से हटाने की माँग की गई है।
क्या है महाभियोग की प्रक्रिया?
संविधान के अनुच्छेद 324(5) के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाना आसान नहीं है। इसके लिए वही प्रक्रिया अपनानी पड़ती है जो सुप्रीम कोर्ट के जज के लिए होती है। अगर राष्ट्रपति इस नोटिस को स्वीकार करते हैं, तो संसद के दोनों सदनों में इसे दो-तिहाई बहुमत से पास होना होगा। विपक्ष का कहना है कि यह लड़ाई चुनाव प्रक्रिया की आजादी और लोकतंत्र को बचाने के लिए है। अब सबकी नजरें राष्ट्रपति की कार्रवाई पर टिकी हैं।

