ईरान और अमेरिका में युद्ध के बीच सोशल मीडिया पर पिछले कुछ दिनों से एक झूठी खबर फैल रही है कि केंद्र सरकार मंदिरों के सोने को अपने कब्जे में लेकर उसके बदले कागजी बॉन्ड (एक तरह की रसीद) देने वाली है।
पीआईबी (PIB) और वित्त मंत्रालय ने मंगलवार (19 मई 2026) को इस दावे का Fact Check करते हुए इसे पूरी तरह फर्जी, भ्रामक और निराधार बताया है। सरकार ने साफ किया है कि ऐसी कोई भी योजना लागू नहीं होने जा रही है।
क्या था दावा?
पिछले कुछ दिनों से इंटरनेट पर अफवाहें उड़ रही थीं। दावों में कहा गया कि सरकार देश के मंदिर ट्रस्टों के सोने के मुद्रीकरण यानि ‘पैसा कमाने’ का प्रस्ताव मंजूर कर चुकी है। इसके अलावा, मंदिरों के शिखरों और दरवाजों पर लगी सोने की परतों को भारत का ‘रणनीतिक स्वर्ण भंडार’ घोषित करने की बात भी कही जा रही थी।
सरकार का Fact Check
वित्त मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान जारी कर उन सभी अफवाहों को सिरे से खारिज कर दिया है, जिनमें दावा किया जा रहा था कि सरकार मंदिरों या धार्मिक संस्थानों के सोने की परतों को ‘स्ट्रैटेजिक गोल्ड रिजर्व’ बनाने की योजना बना रही है। सरकार ने इस दावे को पूरी तरह से झूठ बताते हुए स्पष्ट किया है कि ऐसी कोई भी योजना विचाराधीन नहीं है।
👉 Clarification on false claims on monetisation of temple gold holdings
— Ministry of Finance (@FinMinIndia) May 19, 2026
👉 Speculation and rumours suggesting that the Government is planning to introduce monetisation scheme for Gold held by temple trusts, or any religious institution, across the country are completely false,… pic.twitter.com/BcuGaogGM7
इसके साथ ही, सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों पर चल रही ऐसी किसी भी बिना पुष्टि वाली खबर पर न तो विश्वास करें और न ही उसे आगे शेयर करें। उन्होंने जनता से आग्रह किया है कि नीतिगत फैसलों की सत्यता जाँचने के लिए केवल आधिकारिक सरकारी वेबसाइटों और प्राधिकृत माध्यमों पर ही भरोसा करें।

