सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (03 नवंबर 2025) को देशभर में पोर्नोग्राफी पर बैन लगाने वाली याचिका पर तुरंत सुनवाई से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि फिलहाल इस मामले में दखल देने की जरूरत नहीं है। मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई की अध्यक्षता वाली बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा, “देखिए नेपाल में बैन के बाद क्या हुआ।”
कोर्ट ने यह संदर्भ सितंबर 2025 में नेपाल में हुए हिंसक आंदोलन को लेकर दिया, जिसमें 76 लोग मारे गए थे और Gen Z ने सरकार को गिरा दिया था। ये प्रदर्शन सोशल मीडिया बैन के खिलाफ ही शुरू हुए थे। फिलहाल कोर्ट ने मामले में सुनवाई की अगली तारीख 4 हफ्ते बाद की तय की है।
बता दे कि याचिका में माँग की गई थी कि कोविड-19 महामारी के बाद बच्चों को मोबाइल फोन और सोशल मीडिया की लत लग गई है, जिससे उनकी मानसिक स्थिति और पढ़ाई पर बुरा असर पढ़ रहा है। याचिकाकर्ता ने यह भी तर्क दिया कि यूरोप, ऑस्ट्रेलिया, चीन और अरब देशों में नाबालिगों के लिए सोशल मीडिया उपयोग पर प्रतिबंध है लेकिन भारत में ऐसा कोई नियम नहीं बनाया गया है।
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकार के पास पहले से ही IT एक्ट की धारा 69A के तहत अश्लील वेबसाइटें ब्लॉक करने का अधिकार है और लोग पेरेंटल कंट्रोल और ट्रेकिंग सॉफ्वेयर का इस्तेमाल कर बच्चों पर नजर रख सकते हैं।

