सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (01 दिसंबर 2025) को वक्फ संपत्तियों के डिजिटल पंजीकरण को लेकर साफ लकीर खींच दी। UMEED पोर्टल पर ‘वक्फ बाय यूजर’ समेत सभी वक्फ संपत्तियों का अनिवार्य रजिस्ट्रेशन तय समय में ही पूरा करना होगा। समयसीमा बढ़ाने की माँग वाली याचिकाओं को खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि कोई शिकायत या दिक्कत हो तो वक्फ ट्रिब्यूनल के पास जाओ।
जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने फैसला सुनाते हुए जोर दिया कि धारा 3बी के तहत ट्रिब्यूनल का रास्ता खुला है, इसलिए छह महीने की तय अवधि में ही सब कुछ निपटाना पड़ेगा।
यह फैसला ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB), AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी और कई अन्य संस्थाओं की याचिकाओं पर आया। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि पंजीकरण की डेडलाइन नजदीक आ रही है, लेकिन कई संपत्तियों का सत्यापन और दस्तावेज जुटाने की प्रक्रिया अभी अधर में लटकी है।
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट बेंच ने कहा, “हम समय बढ़ाने की इजाजत नहीं दे सकते। सभी याचिकाकर्ता छह महीने की निर्धारित अवधि में ट्रिब्यूनल के पास अपील करने के लिए आजाद हैं।”
गौरतलब है कि UMEED पोर्टल वक्फ एक्ट के तहत लॉन्च किया गया डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जो पारदर्शिता लाने के मकसद से सभी वक्फ संपत्तियों का केंद्रीकृत डेटा जुटाता है। सरकार का दावा है कि इससे घोटालों पर अंकुश लगेगा।

