चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने कहा कि डॉक्यूमेंट के वेरिफिकेशन के लिए 2 करोड़ लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं। इससे भी ज्यादा लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी कैटेगरी वालों की है। सुप्रीम कोर्ट ने आयोग से कहा कि जिन लोगों के नाम लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी में रखी गई है, उनकी जाँच पारदर्शी तरीके से की जाए।
ऐसे लोगों के माता-पिता के नामों में फर्क, उम्र या बच्चों की संख्या को लेकर सवाल किए गए हैं। चुनाव आयोग को ऐसे सभी लोगों की सूची सार्वजनिक करनी होगी। इनलोगों की सूची पश्चिम बंगाल के ग्राम पंचायत भवनों, तालुका प्रखंड के ऑफिस और वार्ड ऑफिस में नाम बताए जाएँ।
पश्चिम बंगाल में एसआईआर के दौरान कई तरह की गड़बड़ियाँ पाई गई है। इसमें 2002 की मतदाता सूची से अलग बच्चों के संबंध में जानकारी, माता-पिता के नाम में गड़बड़ी जैसी दिक्कतें सामने आई हैं।

