सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (7 नवंबर 2025) को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी, जिसमें उज्जैन की तकिया मस्जिद के ध्वस्तीकरण (तोड़े जाने) को सही ठहराया गया था।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह याचिका मस्जिद में नमाज पढ़ने वाले तेरह निवासियों ने दायर की थी। उनका दावा था कि यह मस्जिद करीब 200 साल पुरानी थी और 1985 में इसे वक्फ संपत्ति के रूप में भी दर्ज किया गया था।
याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि मध्य प्रदेश सरकार ने महाकाल मंदिर के लिए पार्किंग की जगह बनाने के लिए मस्जिद को ‘गैरकानूनी और मनमाने तरीके’ से गिरा दिया। उन्होंने यह भी दलील दी कि ऐसा करके Places of Worship Act, 1991 समेत कई कानूनों का उल्लंघन किया गया है।
याचिकाकर्ताओं की दलील
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि यह मस्जिद करीब 200 साल पुरानी है और इसे 1985 में वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज किया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने पार्किंग क्षेत्र के विस्तार के लिए ‘मनमाने तरीके’ से इसे गिरा दिया और यह कार्रवाई कई महत्वपूर्ण कानूनों का उल्लंघन है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि मस्जिद वाली जमीन का अधिग्रहण कानून के हिसाब से किया गया था और इसके लिए मुआवजा भी दिया गया था। कोर्ट ने यह भी याद दिलाया कि याचिकाकर्ताओं ने पहले इसी मामले में हाई कोर्ट में दी गई अपनी याचिका को खुद ही वापस ले लिया था।
याचिकाकर्ताओं के वकील एमआर शमशाद ने जब यह आरोप लगाया कि मुआवजा ‘अनधिकृत लोगों’ को दिया गया है, तो कोर्ट ने साफ कहा कि इसके लिए आपके पास कानून में अन्य रास्ते मौजूद हैं। कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले को तर्कसंगत मानते हुए इस मामले में दखल देने से मना कर दिया, जिससे मस्जिद को गिराने के खिलाफ कानूनी लड़ाई अब समाप्त हो गई है।

