बिना वेरिफिकेशन अल-फलाह में आतंकी डॉक्टरों की हुई एंट्री, जवाद सिद्दीकी की मंजूरी से यूनिवर्सिटी में खेल: ED की चार्जशीट में खुले राज

हरियाणा के फरीदाबाद स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी और उससे जुड़े मेडिकल कॉलेज को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की चार्जशीट में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। ED के अनुसार, लालकिला आतंकी हमले का आत्मघाती हमलावर डॉ उमर नबी और उसके दो सहयोगी डॉक्टर, डॉ मुजम्मिल गनी और डॉ शाहीन सईद को विश्वविद्यालय में बिना किसी पुलिस सत्यापन या पृष्ठभूमि जाँच के नियुक्त किया गया था।

ये नियुक्तियाँ सीधे विश्वविद्यालय के चांसलर जवाद अहमद सिद्दीकी की मंजूरी से की गई थीं। ED ने शुक्रवार (16 जनवरी 2026) को दिल्ली की कोर्ट में करीब 260 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की, जिसमें सिद्दीकी और अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट को धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत आरोपित बनाया गया है।

जाँच एजेंसी का आरोप है कि छात्रों से वसूली गई फीस के जरिए अवैध धन अर्जित किया गया और संस्थानों की मान्यता से जुड़ी जानकारियों में गलत बयानी की गई। चार्जशीट में यह भी सामने आया है कि मेडिकल कॉलेज में ‘डॉक्टर ऑन पेपर’ और ’22 दिन पंच’ जैसी अवैध प्रथाएँ चल रही थीं।

एनएमसी निरीक्षण से पहले अस्थायी रूप से स्टाफ और मरीज जुटाए जाते थे ताकि मानकों का भ्रम पैदा किया जा सके। ED ने विश्वविद्यालय की 54 एकड़ जमीन और इमारतों को अस्थायी रूप से जब्त करते हुए इसे करीब 140 करोड़ रुपए की संपत्ति बताया है। फिलहाल, कोर्ट ने चार्जशीट पर संज्ञान नहीं लिया है और वहीं सिद्दीकी पहले से ही न्यायिक हिरासत में हैं।