बैंकॉक के ब्रह्मा मंदिर में धमाका करने वाले 2 उईगरों को मौत की सजा, यूसुफु मियराली और बिलाल मोहम्मद दोषी करार: 11 साल पहले गई थी 20 लोगों की जान

करीब 11 साल पुराने बैंकॉक के चर्चित एरावन मंदिर बम धमाके मामले में थाईलैंड की कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने चीन के उइगर मुस्लिम समुदाय से जुड़े यूसुफु मियराली और बिलाल मोहम्मद (अदेम करादाग) को मौत की सजा सुनाई है। दोनों को 17 अगस्त 2015 को हुए उस धमाके का दोषी माना गया, जिसमें 20 लोगों की मौत हुई थी।

इस धमाके में 120 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। यह हमला बैंकॉक के बेहद व्यस्त और पर्यटकों के बीच लोकप्रिय एरावन श्राइन पर हुआ था। एरावन मंदिर बैंकॉक का एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है। यह हिंदू देवता ब्रह्मा को समर्पित है। बैंकॉक साउथ क्रिमिनल कोर्ट की पीठ ने कहा कि आरोपितों के खिलाफ पर्याप्त और मजबूत सबूत मौजूद हैं।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, एक आरोपित ने विस्फोटक सामग्री तैयार की और दूसरे ने उसे मंदिर परिसर तक पहुँचाकर धमाका किया। कोर्ट ने दोनों को पूर्व नियोजित हत्या, हत्या के प्रयास और विस्फोटक रखने जैसे गंभीर अपराधों में दोषी माना। हालाँकि दोनों आरोपियों ने खुद को बेगुनाह बताया है और फैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती देने की बात कही है।

धमाके की जिम्मेदारी किसी संगठन ने नहीं ली थी, लेकिन सुरक्षा विशेषज्ञ लंबे समय से इसे उइगर मुद्दे से जोड़ते रहे हैं। माना जाता है कि यह हमला उस समय थाईलैंड द्वारा बड़ी संख्या में उइगर शरणार्थियों को चीन वापस भेजे जाने के विरोध में किया गया था।

उइगर समुदाय के कुछ लोग चीन के शिनजियांग क्षेत्र में धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतिबंधों का आरोप लगाते रहे हैं, जबकि चीन इन आरोपों को खारिज करता है।