दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों और Anti-CAA प्रदर्शनों के मास्टरमाइंड और UAPA केस में जेल में बंद उमर खालिद की अंतरिम जमानत याचिका एक बार फिर से खारिज हो गई है। दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने उमर खालिद के सभी बहानों को खारिज करते हुए 15 दिनों की बेल देने देने से मना कर दिया।
उमर खालिद ने कोर्ट में कहा था कि उसे अपने अंकल के चेहल्लुम (चालीसवें) में शामिल होने के लिए बेल चाहिए। इसके अलावा उसने अपनी अम्मी के छोटे से ऑपरेशन की भी दुहाई दी थी और कोर्ट से कहा था कि वो उसे 15 दिनों की अंतरिम जमानत दी जाए।

हालाँकि कड़कड़डूमा कोर्ट ने पाया कि अंकल की मौत के 40वें दिन के कार्यक्रम (चेहल्लुम) में शामिल होना कोई ऐसी जरूरी बात नहीं है कि उसके लिए जमानत दी जाए।
अम्मी के ऑपरेशन को लेकर अदालत ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा, “खुद उमर खालिद ने स्वीकार किया है कि उसकी पाँच बहनें हैं, जो अम्मी के इस छोटे से ऑपरेशन के समय उनके साथ मौजूद रह सकती हैं। ऐसे में आरोपित को जमानत देने की कोई ठोस या बड़ी वजह नजर नहीं आती है।”

बचाव पक्ष ने दलील दी थी कि उमर खालिद को पहले भी दो बार अंतरिम जमानत मिल चुकी है और वह हर बार समय पर जेल लौट आया था, इसलिए उसे राहत मिलनी चाहिए। दूसरी तरफ अभियोजन पक्ष और दिल्ली पुलिस ने कड़ा विरोध करते हुए कहा कि उमर खालिद सीएए-विरोधी प्रदर्शनों और दिल्ली हिंसा भड़काने का मुख्य सूत्रधार है, जिसने भड़काऊ भाषण देकर सुनियोजित साजिश रची। साक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने कहा कि इस गंभीर मोड़ पर जमानत नहीं दी जा सकती।
गौरतलब है कि उमर खालिद की जमानत लगातार अलग-अलग अदालतों में खारिज हुई है। उमर पर मुख्य आरोप 2020 के दिल्ली दंगों की ‘बड़ी साजिश‘ रचने का और हिंसा भड़काने में उनकी भूमिका है। पुलिस और अभियोजन ने कहा कि उमर ने भड़काऊ भाषण और सुनियोजित रूप से हिंसा को अंजाम देने में सहयोग किया। अदालत ने भी इन्हीं आरोपों और साक्ष्यों के आधार पर फैसला सुनाते हुए कहा कि जमानत इस समय नहीं दी जा सकती है।

