अमेरिकी एयर फोर्स बेस में घुसे एडवांस्ड ड्रोन, छिपाने पड़े B-52H स्ट्रेटजिक न्यूक्लियर बॉम्बर: ऑपरेशन इपिक फ्यूरी के बीच US को बंद करना पड़ा स्टेशन

मिडिल ईस्ट में ऑपरेशन इपिक फ्यूरी  के तहत अमेरिकी सेना ईरान के खिलाफ सक्रिय है, वहीं अमेरिका में एक बड़ी सुरक्षा चूक सामने आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक 9 से 15 मार्च 2026 के बीच लुइसियाना स्थित बार्क्सडेल एयर फोर्स बेस (Barksdale Air Force Base) के प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र में कई बार ‘एडवांस्ड और अनधिकृत ड्रोन’ घुसपैठ करते देखे गए।

यह एयरबेस B-52H स्ट्रैटोफोर्ट्रेस परमाणु बमवर्षकों का प्रमुख ठिकाना है और अमेरिकी वायुसेना के ग्लोबल स्ट्राइक कमांड का अहम केंद्र माना जाता है।

ड्रोन घुसपैठ से हड़कंप, बमवर्षकों को शेल्टर में भेजा गया

ABC News और New York Post की रिपोर्ट के अनुसार, इस दौरान एयरबेस पर 12–15 ड्रोन के झुंड को संवेदनशील इलाकों, खासकर बमवर्षकों की फ्लाइट लाइन के ऊपर उड़ते देखा गया। इन ड्रोन की खास बात यह थी कि इनमें सामान्य कमर्शियल सिग्नल नहीं थे, बल्कि लंबी दूरी से नियंत्रित होने की क्षमता और इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग के प्रति प्रतिरोध भी देखा गया।

सुरक्षा के तहत B-52H बमवर्षकों को तुरंत शेल्टर में रखा गया और फ्लाइट ऑपरेशन अस्थायी रूप से बंद कर दिए गए ताकि किसी बड़े हादसे को रोका जा सके। पूर्व रक्षा अधिकारी स्टीफन ब्रायन ने कहा कि ये ड्रोन काफी एडवांस सेंसर से लैस और संभवतः ऑटोनॉमस थे, जिससे लगता है कि इन्हें प्रशिक्षित ऑपरेटर चला रहे थे।

उन्होंने यह भी आशंका जताई कि ड्रोन के हिस्सों को पहले तस्करी के जरिए लाकर बाद में असेंबल किया गया हो सकता है।

ऑपरेशन पर असर और सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस ड्रोन घुसपैठ की वजह से ऑपरेशन इपिक फ्यूरी में भी कुछ देरी हुई हो सकती है। एक गोपनीय ब्रीफिंग के हवाले से बताया गया कि ड्रोन पर लगी लाइट्स यह संकेत देती हैं कि ऑपरेटर सुरक्षा प्रतिक्रिया को टेस्ट कर रहे थे।

ड्रोन कई जगहों पर घूमने के बाद अचानक अलग-अलग दिशाओं में फैल गए, जिससे यह अंदेशा जताया गया कि वे अपनी लोकेशन छिपाने की कोशिश कर रहे थे। इस घटना के बाद अमेरिकी वायुसेना और फेडरल एजेंसियों में अलर्ट बढ़ गया है। बार्क्सडेल एयर फोर्स बेस ने भी इस मामले में जाँच जारी होने की पुष्टि की है।

यह घटना अमेरिका की आंतरिक सुरक्षा में संभावित कमजोरियों को उजागर करती है, खासकर उन देशों के संदर्भ में जिनसे उसका टकराव चल रहा है। गौरतलब है कि मई 2025 में ऑपरेशन स्पाइडर वेब के तहत यूक्रेन ने रूस के अंदर गहराई तक ड्रोन हमले किए थे, जिसमें महीनों पहले गुपचुप तरीके से ड्रोन पहुँचाए गए थे।

इस ऑपरेशन ने दिखाया था कि आधुनिक युद्ध में ड्रोन कितने खतरनाक और प्रभावी हो चुके हैं। फिलहाल  कई B-52 बमवर्षक इस ऑपरेशन में तैनात हैं और ईरान पर हमले के लिए ब्रिटेन के RAF फेयरफोर्ड  बेस का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।