कोर्ट के आदेश के बाद मस्जिद तोड़ने का नोटिस पहले ही प्रशासन ने दे दिया था। लहरपुर के तहसीलदार ने उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 67 के तहत संबंधित पक्ष को नोटिस जारी किया था। नोटिस में साफ तौर पर निर्देश दिया गया था कि सरकारी जमीन पर बनी इस इमारत को हटा दिया जाए, लेकिन तय समय सीमा के भीतर इमारत को नहीं हटाया गया।
इसके बाद मस्जिद को ढाह दिया गया। ध्वस्तीकरण के दौरान मस्जिद के आसपास किसी को भी जाने नहीं दिया गया। पूरे इलाके में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। प्रशासन ने शांतिपूर्वक ध्वस्तीकरण के काम को अंजाम दिया।
अधिकारियों ने कहा कि बार बार नोटिस देने के बाद भी अतिक्रमण को हटाया नहीं गया था। इसलिए प्रशासन ने ये कदम उठाया। अधिकारियों के मुताबिक ये तालाब की जमीन थी। इस तरह सरकारी जमीन पर अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

