ईरान की ‘विश लिस्ट’ को ट्रंप ने कूड़ेदान में फेंका, ठुकराया 10-सूत्रीय प्रस्ताव: प्रवक्ता कैरोलिन बोलीं- केवल परमाणु काम रोकने की शर्त पर ही होगी बात

व्हाइट हाउस ने एक बार फिर अपना रुख साफ कर दिया है कि अमेरिका, ईरान के भीतर यूरेनियम संवर्धन (uranium enrichment) को बिल्कुल भी स्वीकार नहीं करेगा। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया है कि ईरान ने जो ‘विश लिस्ट’ (10 माँगों की सूची) भेजी थी, ट्रंप ने उसे स्वीकार नहीं किया है।

बुधवार (8 अप्रैल 2026) को प्रवक्ता कैरोलिन लेविट ने बताया कि ट्रंप की टीम ने ईरान के शुरुआती 10-सूत्रीय प्रस्ताव को ‘कचरे के डिब्बे में फेंक दिया‘ था। हालाँकि, अब एक संशोधित योजना पर बातचीत की उम्मीद है, लेकिन ट्रंप की ‘रेड लाइन’ वही है कि ईरान में परमाणु काम पूरी तरह बंद होना चाहिए।

ट्रंप की शर्त: यूरेनियम संवर्धन पर कोई समझौता नहीं

व्हाइट हाउस की प्रवक्ता कैरोलिन लेविट ने साफ शब्दों में कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप की ‘रेड लाइन्स’ में कोई बदलाव नहीं आया है। ईरान चाहता है कि उसे यूरेनियम संवर्धन का अधिकार मिले और उस पर लगे प्रतिबंध हटाए जाएँ, लेकिन अमेरिका इसे मानने को तैयार नहीं है।

लेविट ने कहा कि यह सोचना भी बेवकूफी है कि ट्रंप ईरान की ऐसी किसी ‘विश लिस्ट’ को मान लेंगे। ट्रंप केवल वही सौदा करेंगे जो अमेरिका के हित में होगा। करीब 38 दिनों तक चले युद्ध के बाद वाशिंगटन और तेहरान ने दो हफ्ते के युद्धविराम का ऐलान किया है।

इस दौरान अमेरिका अपने हमले रोकेगा और ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलेगा, जिसे बंद करने से पूरी दुनिया में तेल और गैस की कीमतें आसमान छूने लगी थीं। ट्रंप ने कहा है कि ईरान का नया प्रस्ताव बातचीत के लिए एक ‘काम करने योग्य आधार’ हो सकता है, बशर्ते हॉर्मुज का रास्ता खुला रहे।

पाकिस्तान में होगी बड़ी बैठक

अगले दौर की बातचीत शनिवार (11 अप्रैल 2026) को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में होने जा रही है। इस बैठक में अमेरिकी टीम की कमान खुद उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ट्रंप के दामाद जारेड कुशनर संभालेंगे। यह टीम इस बात पर ध्यान देगी कि अगले दो हफ्तों में शांति का कोई ठोस रास्ता निकल सके।

ईरान ने जताई आपत्ति, बातचीत पर संकट के बादल

एक तरफ बातचीत की तैयारी है, तो दूसरी तरफ ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने इस पर सवाल खड़े कर दिए हैं। गालिबाफ का कहना है कि अमेरिका और इजराइल ने लेबनान में युद्ध जारी रखकर और ईरान के हवाई क्षेत्र में ड्रोन भेजकर पहले ही युद्धविराम का उल्लंघन कर दिया है। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में बातचीत करना समझदारी नहीं है, क्योंकि अमेरिका अभी भी ईरान के यूरेनियम संवर्धन के अधिकार को नकार रहा है।

‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ की सफलता का दावा

व्हाइट हाउस ने पेंटागन के सुर में सुर मिलाते हुए दावा किया है कि ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के जरिए ईरान की सैन्य ताकत, उसकी नौसेना और मिसाइल क्षमता को भारी नुकसान पहुंचाया गया है। अमेरिका का कहना है कि अब ईरान परमाणु बम बनाने की स्थिति में नहीं रहेगा। हालांकि, ईरान ने भी खुद को इस युद्ध में विजयी बताया है। ट्रंप प्रशासन का तर्क है कि इस युद्ध का मकसद ही ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना था।