मौत के डेढ़ महीने बाद भी दफन नहीं हुए अयातुल्ला खामेनेई, इजरायल और विद्रोह के डर से ईरान नहीं निकाल रहा जनाजा: रिपोर्ट

अमेरिका और इजरायल के हमलों में मारे गए सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई का जनाजा अब तक नहीं हुआ है। सुरक्षा कारणों के चलते ईरान अब तक जनाजे की तारीख और स्थान तय नहीं कर सका है। न्यूयॉर्क पोस्ट के अनुसार, ईरानी अधिकारियों ने खुद कबूल किया कि सुप्रीम लीडर का जनाजा इसीलिए नहीं हो रहा, क्योंकि तेहरान ‘डरपोक’ है।

बता दें कि 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल हमलों में मारे गए अयातुल्लाह अली खामेनेई को डेढ़ महीने से ज्यादा बीतने को है। लेकिन ‘डरपोक’ ईरान ने अब तक अपने सुप्रीम लीडर को नहीं दफनाया है। इसकी पीछे की मुख्य वजह ईरान में फैली अशांति है। ईरान को डर है कि अगर अयातुल्लाह के जनाजे के लिए लोग जुटे, तो इजरायल हमला कर सकता है।

इससे पहले 1989 में पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह रुहल्ला खुमैनी की मौत पर करोड़ो लोग सड़कों पर उतरे थे। लेकिन अमेरिका और इजरायल के हमलों में अब तक मारे गए बड़े-बड़े अधिकारियों के डर से ईरान नहीं चाहता कि इस समय अयातुल्लाह खामेनेई का जनाजा निकले।

ईरान को भीतरी विद्रोह का भी डर सता रहा है। क्योंकि दिसंबर 2025 में हुए प्रदर्शन में लाखों लोगों ने अयातुल्लाह अली खामेनेई की इस्लामी रिजीव का विरोध किया था। इसी के साथ ईरानी प्रशासन को नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई के गायब होने पर भी जवाब देना पड़ेगा। इन सब चीजों को देखते हुए ईरान अभी अयातुल्लाह खामेनेई का जनाजा करने से दूर भाग रहा है।

हालाँकि, 4 मार्च 2026 से तीन दिन कि राजकीय जनाजा निकालने की तैयारी थी, लेकिन अमेरिका औऱ इजरायल के बढ़ते हमलों के कारण इसे रद्द कर दिया गया था। अब 8 अप्रैल 2026 को हुए सीजफायर के बावजूद ईरान के भीतर स्थिति नियंत्रण में नहीं है, इसीलिए जनाजने का समय तय नहीं हो पा रहा है।

लेकिन जनाजे के स्थान को लेकर बताया जा रहा है कि ईऱान के मशहद शहर में खामेनेई को दफनाया जा सकता है। यह खामेनेई का गृह नगर है और यहाँ इमाम रजा दरगाह मजहबी दृष्टि से बेहत महत्वपूर्ण भी है। यह इलाका तुर्ममेनिस्तान की सीमा से लगा हुआ शहर है और इजरायल से इसकी दूरी काफी अधिक है। ऐसे में इजरायल के हमलों का खतरा नहीं रहेगा।