विषय: इतिहास

प्रतीकात्मक तस्वीर

‘केसरी’ का महत्व अक्षय कुमार की पगड़ी का रंग नहीं, बल्कि सारागढ़ी की याद दिलाना है

पठान सही थे या सिख। यह फैसला करना केसरी फिल्म का मकसद नहीं है। चाहे सिख सैनिक अंग्रेज़ों के सिपाही बनकर लड़ें हों या हमला करने वाले पठान आज़ादी के परवाने हों, उन 22 वीरों का 'लास्ट स्टैंड' सब बातों से ऊपर था। इसके बारे में हमें पता होना चाहिए था।
गणेश चतुर्थी- बाल गंगाधर तिलक

सातवाहन और चालुक्य वंश के बाद तिलक ने गणेश चतुर्थी को बना दिया था स्वतन्त्रता का जन आंदोलन

भारतीय इतिहास में सातवाहन, चालुक्य और राष्ट्रकूट वंशों की, गणेश उत्सव हमेशा ही भारतीय और हिन्दू एकता का प्रमुख केंद्र रहा है। हिन्दू धर्म में अग्नि पुराण, ब्रह्मवैवर्त पुराण, शिवपुराण, स्कंद पुराण आदि में भगवान गणेश का जिक्र मिलता है। भगवान शिव द्वारा माता पार्वती के प्रहरी बने गणेश का सर उनके धड़ से अलग करने और फिर हाथी के बच्चे का सर जोड़ने की घटना का जिक्र नारद पुराण में मिलता है।
फिरोज शाह तुगलक

ब्राह्मणों पर पहली बार जजिया कर लगाने वाले फिरोजशाह तुगलक ने बसाया था ‘कुश्के-फिरोज’

फिरोजशाह द्वारा हिन्दुओं पर जुर्म और बर्बरता करने का एक यह भी कारण था कि उसे एक राजपूत माँ से पैदा होने के कारण अपने समय के उलेमाओं के सामने अपनी कट्टर मुस्लिम छवि को बनाए रखना था। यही वजह है कि इतिहास में उसे एक धर्मांध शासक के रूप में जाना गया।
बादशाह अकबर

रंग कुमारी पर बुरी नजर डाली तो बादशाह अकबर की जूतों से हुई पिटाई: इतिहास जो आपसे छिपाया गया

अकबर 'महान' के कथित सेक्युलर चरित्र का गुणगान करते हुए वामपंथी इतिहासकारों ने उसके नेगेटिव पक्ष को दबाया। अकबर कितना बड़ा व्याभिचारी था इसके प्रमाण गुरु गोविंद सिंह रचित सिख ग्रन्थ 'चरित्रोपाख्यान' में मौजूद हैं। जूतों से पिटाई के बाद अकबर ने पराई स्त्रियों के घर में घुसना बंद किया था।
सैयद अहमद खान

हिन्दुओं के खिलाफ सशस्त्र जिहाद की घोषणा करने वाले सर सैयद अहमद खान थे असली ‘वीर’

सावरकर की प्रतिमा पर यह देश बेवजह अपना समय और संसाधन व्यर्थ करता है। सर सैयद अहमद खान के योगदान और उनके ज़हरीले, हिन्दू-विरोधी और हिंसक भाषणों को याद करने भर से ही तय हो जाता है कि इस देश को किन लोगों पर गर्व होना चाहिए।
सावरकर

आजादी कॉन्ग्रेसियों की बपौती नहीं, कालिख पोत कर सावरकर को काला नहीं कर सकते

इनकी सावरकर से दुश्मनी केवल इसलिए है क्योंकि वह हिंदूवादी थे, और कॉन्ग्रेस की राजनीति मुस्लिम तुष्टिकरण की है। हिन्दूफ़ोबिया इनकी वैचारिक नसों में है, तो इसलिए हिन्दू हितों की बात करने वाले को खलनायक या कमज़ोर दिखाना तो हिन्दूफ़ोबिया की तार्किक परिणति होगा ही।
चापेकर बंधु

जिसके पिता ने लिखी सत्यनारायण कथा, उसके 3 बेटों ने ‘इज्जत लूटने वाले’ अंग्रेज को मारा और चढ़ गए फाँसी पर

अंग्रेज सिपाही प्लेग नियंत्रण के नाम पर औरतों-मर्दों को नंगा करके जाँचते थे। चापेकर बंधुओं ने इसका आदेश देने वाले अफसर वॉल्टर चार्ल्स रैंड का वध करने की ठानी। प्लान के मुताबिक जैसे ही वो आया, दामोदर ने चिल्लाकर अपने भाइयों से कहा "गुंडया आला रे" और...
बंगबंधु

हाउस नंबर 677 में गिरी 20 लाशें: कभी भारतीय कर्नल के कारण भाग खड़े हुए थे पाकिस्तानी सैनिक

"शेख मुजीब को देखते ही मोहिउद्दीन नर्वस हो गया। उसके मुॅंह से केवल इतना ही निकला, सर आपनी आशुन (सर आप आइए)। मुजीब ने चिल्ला कर कहा-क्या चाहते हो? क्या तुम मुझे मारने आए हो? भूल जाओ। पाकिस्तान की सेना ऐसा नहीं कर पाई। तुम किस खेत की मूली हो?"
गजेंद्र वर्धा पेरुमल मंदिर

हाथी-मगरमच्छ की कहानी से समझें कश्मीरियत का दर्द सुनाने वालों ने लद्दाख जाना क्यों उचित नहीं समझा

वैष्णव मान्यताओं में इस कहानी की प्रतीकों के रूप में मान्यता भी है। ऐसा माना जाता है कि हाथी यहाँ जीव का स्वरूप है, मगरमच्छ उसके पाप और माया हैं, जिस नदी के कीचड़ जैसे स्थान में हाथी मगरमच्छ के जबड़े में फँसा है, वो कीचड़ संसार है।
नेहरू, शात्री, हनुमंथैया

शास्त्री जी के समय कॉन्ग्रेस नेताओं ने की थी 370 हटाने की वकालत, अपना ही इतिहास भूली पार्टी

'ज़मीन के भाव बढ़ जाएँगे तो स्थानीय लोगों को घाटा होगा'- नेहरू ने क्यों कहा था ऐसा? पढ़िए तत्कालीन गृहमंत्री गुलजारी लाल नंदा का बयान। कौन थे अनुच्छेद 370 हटाने वाला बिल लेकर आने वाले प्रकाश शास्त्री जो बाद में एक ट्रेन दुर्घटना में मारे गए?
श्रीदेव सुमन

पुण्यतिथि विशेष: 84 दिन के अनशन, अत्याचार के बाद भागीरथी-भिलंगना के संगम पर फेंक दिया गढ़वाल के सुमन को

श्रीदेव सुमन के व्यक्तित्व में कई महापुरुषों की झलक थी। वे बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। रियासत के खिलाफ श्रीदेव सुमन के विरोध में यदि भगत सिंह का जूनून नजर आता था, तो दूसरी ओर वे महात्मा गाँधी के विचारों से भी प्रभावित थे। सुमन एक श्रेष्ठ लेखक और साहित्यकार भी थे।
मुगल प्रेम

मुगलों ने हमें अमीर नहीं बनाया DailyO, भ्रामक तथ्यों के लेख लिखकर स्वरा भास्कर को मसाला मत दो

राणा सफ़वी ने अपने लेख में भारत की जीडीपी के आँकड़े दिखा कर मुग़लों को महान साबित करने की कोशिश की है लेकिन उनकी चालाकी पकड़ी गई। हमारे घर में घुस कर हमारे मंदिर तोड़ने वाले मुग़लों की चापलूसी करने वाले कल को जलियाँवाला नरसंहार को भी सही ठहरा सकते हैं।

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