Tuesday, August 3, 2021

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‘कारगिल कमेटी’ पर कॉन्ग्रेस की कुण्डली: लोकतंत्र की सुरक्षा के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा राजनीतिक दृष्टिकोण का न हो मोहताज

हमें ध्यान में रखना होगा कि जिस लोकतंत्र पर हम गर्व करते हैं उसकी सुरक्षा तभी तक संभव है जबतक राष्ट्रीय सुरक्षा का विषय किसी राजनीतिक दृष्टिकोण का मोहताज नहीं है।

हाउ इज द ट्रोलिंग लेवल! जब मिसाइल पर रवीना टंडन लिखकर IAF ने दिया था नवाज शरीफ को ‘मुहब्बत’ का पैगाम

पाकिस्तानी फौजियों ने भारतीय सैनिकों से कहा था, "अपने मरे आदमी को ले जाओ, हमें रवीना और माधुरी दे दो।" इसी ताने के जवाब में IAF ने मिसाइल पर नवाज का नाम लिखा था।

‘तिरंगा फहरा कर आऊँगा या तिरंगे में लिपट कर आऊँगा’: कारगिल का ‘शेरशाह’, पर्दे पर छाने को तैयार

कारगिल विजय दिवस के मौके पर 'विक्रम बत्रा' ट्रेंड कर रहे हैं। यूजर्स उन कोट को शेयर कर रहे हैं जिन्हें युद्ध के दौरान 'शेरशाह' दोहराते थे।

कारगिल के 22 साल: 16 की उम्र में सेना में हुए शामिल, 20 की उम्र में देश पर मर मिटे

सुनील जंग ने छलनी सीने के बावजूद युद्धभूमि में अपने हाथ से बंदूक नहीं गिरने दी और लगातार दुश्मनों पर वार करते रहे।

कारगिल के 22 साल: ‘फर्ज पूरा होने से पहले मौत आई तो प्रण लेता हूँ मैं मौत को मार डालूँगा’

भारतीय सैनिकों के ऊपर 60-70 मशीनगन लगातार फायरिंग कर रही थी। गोले बरस रहे थे। फिर भी कैप्टन मनोज पांडे टुकड़ी के साथ आगे बढ़ रहे थे।

इजरायल दूतावास ब्लास्ट: दिल्ली पुलिस ने कारगिल के 4 युवकों को किया गिरफ्तार, स्पेशल सेल कर रही पूछताछ

कारगिल से गिरफ्तार युवकों की उम्र 21 से 25 साल के बीच है। दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल के बाद एनआईए भी इनसे पूछताछ कर सकती है।

जब सीमा पार किए बिना ही भारतीय वायुसेना ने दुश्मन के छक्के छुड़ा दिए: कहानी अनूठे ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ की

कारगिल की विषम परिस्थितियाँ, सीमित संसाधनों के प्रयोग का दबाव, सीमा पार न करने का आदेश और छोटे लक्ष्यों को भेदने की चुनौती - भारतीय वायुसेना के शौर्य की एक अनूठी गाथा।

करगिल की लड़ाई में मरने-मारने के लिए छोड़ दिया था 1 करोड़ 20 लाख रुपए का ऑफर: शोएब अख्तर

“मैं लाहौर के बाहरी इलाके में खड़ा था। मुझे देख कर एक जनरल ने पूछा कि मैं क्या कर रहा हूँ? मैंने कहा लड़ाई शुरू होने वाली है, हम साथ मरेंगे।"

मॉं ने आज भी वैसा ही रखा है ‘लव’ का कमरा, तस्वीर को सलामी दे ही घर से निकलता है जुड़वा भाई

चोटी पर तिरंगा लहराने के बाद विक्रम बत्रा ने कहा था, “यह दिल माँगे मोर” और उसी वक़्त से यह हिंदुस्तानी फ़ौज का मंत्र बन गया। बत्रा के जज़्बे को देखते हुए यूनिट ने उनको नया नाम दिया ‘शेरशाह’ यानी ‘शेरशाह ऑफ़ कारगिल’।

कारगिल दिवस पर उमर-शेहला-महबूबा भूले ट्विटर पासवर्ड, ट्वीट करने वाली स्याही खत्म

उमर अब्दुल्ला हों या फिर शेहला रशीद, सोशल मीडिया पर अफवाहों और मनगढ़ंत मुद्दों पर अपने प्रलापों की वजह से अक्सर चर्चा में बने रहने वाले इन सभी का कारगिल विजय की वर्षगाँठ पर सन्नाटे में चले जाना तो यही दर्शाता है कि इनकी खुशियाँ और प्राथमिकताएँ अन्य नागरिकों से भिन्न हैं।

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