विषय: कारगिल

कैप्टन विक्रम बत्रा

मॉं ने आज भी वैसा ही रखा है ‘लव’ का कमरा, तस्वीर को सलामी दे ही घर से निकलता है जुड़वा भाई

चोटी पर तिरंगा लहराने के बाद विक्रम बत्रा ने कहा था, “यह दिल माँगे मोर” और उसी वक़्त से यह हिंदुस्तानी फ़ौज का मंत्र बन गया। बत्रा के जज़्बे को देखते हुए यूनिट ने उनको नया नाम दिया ‘शेरशाह’ यानी ‘शेरशाह ऑफ़ कारगिल’।
कारगिल विजय दिवस

कारगिल दिवस पर उमर-शेहला-महबूबा भूले ट्विटर पासवर्ड, ट्वीट करने वाली स्याही खत्म

उमर अब्दुल्ला हों या फिर शेहला रशीद, सोशल मीडिया पर अफवाहों और मनगढ़ंत मुद्दों पर अपने प्रलापों की वजह से अक्सर चर्चा में बने रहने वाले इन सभी का कारगिल विजय की वर्षगाँठ पर सन्नाटे में चले जाना तो यही दर्शाता है कि इनकी खुशियाँ और प्राथमिकताएँ अन्य नागरिकों से भिन्न हैं।
शरीफ़ मुशर्रफ़ को कोसते भी रहे, लेकिन बर्खास्त नहीं किया- और अंत में मुशर्रफ ने उन्हें ही बर्खास्त कर दिया

1984 से चल रही थी कारगिल की तैयारी, हवा में मुशर्रफ़ को बर्खास्त कर कुर्सी गँवा बैठे नवाज़ शरीफ़

अंत में चेते नवाज़ शरीफ ने मूर्खतापूर्ण कदम उठाते हुए मुशर्रफ़ को उस समय बर्खास्त कर दिया जब मुशर्रफ़ श्री लंका दौरे लौटते हुए एक हवाई जहाज में थे।

कारगिल के 20 साल: गाथा चार वीरों की, जिन्हें हमें बार-बार सुनना चाहिए

ब्रिज मोहन सिंह ने गंभीर रूप से घायल होकर वीरगति को प्राप्त होने के पहले पाँच पाकिस्तानियों को मौत की नींद सुला दिया, जिसमें से दो को तो उन्होंने केवल अपने खंजर (कमाण्डो नाइफ़) से मारा। अपनी जान और सुरक्षा की परवाह किए बिना दिलेरी और शौर्य की मिसाल खड़ी करने वाले ब्रिज मोहन सिंह को वीर चक्र से नवाज़ा गया।
पराक्रम की पहचान

कारगिल के 20 साल: कहानी उन हीरोज की जिनके आगे पस्त हो गया पाकिस्तान का ‘डर्टी-4’

सौरभ कालिया और अन्य भारतीय सैनिकों पर किए गए बर्बर अत्याचार को पाकिस्तान के सैनिकों ने कई बार स्वीकार किया है। हालाँकि, धूर्त पाकिस्तान ने आधिकारिक रूप से कभी यह स्वीकार नहीं किया कि कारगिल युद्ध में उसके सैनिक शामिल थे।
मनोज पांडे

कारगिल के 20 साल: ‘फर्ज पूरा होने से पहले मौत आई तो प्रण लेता हूँ मैं मौत को मार डालूँगा’

मनोज पांडे और उनके साथी ज़मीन पर रेंगते हुए बंकरों के पास पहुँचे। कैप्टन मनोज ने एक-एक कर 3 बंकर ध्वस्त कर दिए, लेकिन आखिरी बंकर में ग्रेनेड फेंकते वक़्त उनके शरीर के बाँए हिस्से में कुछ गोलियाँ लगीं, जिससे वो लहूलुहान हो गए।
सुनील जंग

कारगिल के 20 साल: 16 की उम्र में सेना में हुए शामिल, 20 वर्ष में देश पर मर मिटे

सुनील ने छलनी सीने के बावजूद युद्धभूमि में अपने हाथ से बंदूक नहीं गिरने दी और लगातार दुश्मनों पर वार करते रहे। तभी ऊँचाई पर बैठे दुश्मन की एक गोली उनके चेहरे पर लगी और वे वहीं वीरगति को प्राप्त हो गए।
कैप्टन विक्रम बत्रा

कारगिल के 20 साल: देश का ऐसा शूरवीर, जिसे मारने के लिए पाकिस्तान ने चलाया ‘ऑपरेशन शेरशाह’

20 जून 1999 की सुबह 3:30 बजे विक्रम बत्रा और उनके साथियों ने प्वाइंट 5410 पर फिर से तिरंगा लहरा दिया। इस जीत के बाद विक्रम बत्रा ने कहा था, “यह दिल माँगे मोर।” विक्रम के जज़्बे को देखते हुए यूनिट ने उनको नया नाम दिया ‘शेरशाह’ यानी ‘शेरशाह ऑफ़ कारगिल’।

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