Thursday, September 29, 2022

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मनमोहन सिंह

‘कॉन्ग्रेस के शासन में ठहर गया था देश’: Infosys के संस्थापक ने की PM मोदी की तारीफ, कहा- भारत के लिए दुनिया भर में...

इंफोसिस के सह-संस्थापक नारायण मूर्ति ने कहा कि यूपीए के शासन काल में भारत ठहर गया था और इसका अर्थव्यवस्था पर बुरा प्रभाव पड़ा था।

ISI जासूस नुसरत मिर्जा का मनमोहन सिंह से भी मिलने का दावा: बोला- मुस्लिम होने के कारण टारगेट पर हामिद अंसारी, भारत पहुँचते ही...

पाकिस्तानी पत्रकार नुसरत मिर्जा ने एक नया दावा किया है। इसके मुताबिक वह भारत यात्रा के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मिला था।

680 कश्मीरी पंडितों की हत्या, 200 केस, 1 को भी सजा नहीं: इधर आतंकी यासीन मलिक का ‘एजेंडा’ बढ़ाती रही कॉन्ग्रेस

सैंकड़ों कश्मीरी पंडितों को मारा गया लेकिन एक दोषी को भी सजा नहीं हुई। उलटा यासीन मलिक को पीएमओ बुलाकर मेहमाननवाजी की गई वो अलग।

मनमोहन सिंह के हाथों में दो रेवड़ियाँ लेकिन खाने की इजाजत नहीं, बाद में वो भी छीन ली गईं: कपिल शर्मा ने सुनाया मुलाकात...

कपिल शर्मा ने बताया कि जब वह पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मिलने गए तो पता चला कि इतने बड़े आदमी के ऊपर भी कितनी पाबंदियाँ हैं।

Bose साउंड सिस्टम से लेकर Piaget लेडीज वॉच तक: क्या आप जानते हैं 101 खास तोहफे अपने साथ ले गए थे मनमोहन सिंह

बोस कंपनी के एक म्यूजिक सिस्टम से लेकर पागेट के एक लेडीज वॉच तक, पूर्व प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह 101 खास विदेशी तोहफे अपने साथ ले गए।

जैसे सोनिया गाँधी के इशारे पर PM रहते चलते थे मनमोहन, वैसे ही CM चन्नी को चलाना चाहते हैं सिद्धू: इंटरव्यू में बताया पंजाब...

नवजोत सिंह सिद्धू चाहते हैं कि बतौर मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी वैसे ही उनके इशारे पर चलें, जैसे कभी सोनिया के इशारे पर मनमोहन सिंह चला करते थे।

जब मनमोहन सिंह PM थे, कॉन्ग्रेस+ की सरकार थी… तब हॉकी टीम के खिलाड़ियों को जूते तक नसीब नहीं थे

एक दशक पहले जब मनमोहन सिंह के नेतृत्व में कॉन्ग्रेस नीत यूपीए की सरकार चल रही थी, तब हॉकी टीम के कप्तान ने बताया था कि खिलाड़ियों को जूते भी नसीब नहीं हैं।

मनमोहन सिंह का PM मोदी को पत्रः पुराने मुखौटे में कॉन्ग्रेस की कोरोना पॉलिटिक्स को छिपाने की सोनिया-राहुल की नई कवायद

ऐसा लगता है कि कॉन्ग्रेस ने मान लिया है कि सोनिया या राहुल के पत्र गंभीरता नहीं जगा पाते। उसके पास किसी भी तरह के पत्र को विश्वसनीय बनाने का एक ही रास्ता है और वह है मनमोहन सिंह का हस्ताक्षर।

उर्दू में लिखा जाता था मनमोहन सिंह का भाषण, क्योंकि हिंदी पढ़ नहीं पाते पूर्व प्रधानमंत्री

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह हिन्दी नहीं पढ़ पाते हैं। उन्होंने जितने भी भाषण हिन्दी में दिए वह उर्दू में लिखे गए थे।

कृषि सुधारों का UPA से NDA तक का सफर: जहाँ बीजेपी लगातार कर रही पहल वहीं कॉन्ग्रेस ने पूरे 10 साल बयानबाजी में बिताए

इन कानूनों का धरातल पर उतरने के बाद ही उनका विश्लेषण किया जा सकता है। उससे पहले, केंद्र और राज्यों के संबंधों को कमजोर करना अथवा संसद द्वारा पारित कानूनों को फाड़ना कोई लोकतांत्रिक अधिकार नही बल्कि अराजकता है।

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