Tuesday, June 28, 2022

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मुंबई हमला

मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड हाफिज सईद को टेरर फंडिंग मामले में 31 साल की जेल, अमेरिका ने भी रखा है ₹75 करोड़ का ईनाम

अंतरराष्ट्रीय आतंकी हाफिज सईद को आतंकी फंडिंग के मामले में 31 साल की जेल और 3 लाख 40 हजार का जुर्माना लगाया गया है।

1993 मुंबई बम ब्लास्ट: जिन धमाकों से दहला था देश, उसके लिए चुनी गई थी ‘शिवाजी जयंती’, गुल मुहम्मद के कारण बदली थी तारीख

29 साल पहले आज की ही तारीख (12 मार्च) में मुंबई में लगातार 12 जगह हुए 12 बम विस्फोटों ने पूरे देश को हिलाया था। इन हमलों की खबर गुल ने पहले ही पुलिस को दी थी।

जिन धमाकों में गई 250+ जानें, उसे अंजाम देने वाला सलीम गाजी कराची में मरा: छोटा शकील और दाऊद का था करीबी

पाकिस्तान में छिपे सलीम गाजी पर 1993 में मुंबई सीरियल ब्लास्ट की योजना बनाने और उसे अंजाम तक पहुँचाने का आरोप था।

48 घंटों तक होटल के बाहर खड़े रहे, अंदर आतंकियों ने बहन और जीजा को मार डाला: 26/11 हमले को याद कर रो पड़ता...

'धमाल' सीरीज में 'बोमन' का किरदार निभाने वाले बॉलीवुड अभिनेता आशीष चौधरी की बहन और जीजा भी 26/11 मुंबई आतंकी हमले में मारे गए थे।

‘चाचा (लखवी) ने कहा था जब तक जिंदा रहना मारते रहना’: पढ़िए नार्को टेस्ट में कसाब से क्या हुए थे सवाल, क्या दिया था...

मोहम्मह आमिर अजमल कसाब के नार्को टेस्ट से खुलासा। गरीबी दूर करने का लालच देकर लोगों को आतंकी बनाया गया। आम लोगों को बनाना था निशाना।

इस्माइल मारा गया, मरने वाला था अजमल कसाब भी… उस दिन संजय गोविलकर न होते तो 26/11 होता ‘हिंदू आतंकवाद’

संजय गोविलकर ने कहा- उसे मत मारो, वही तो सबूत है। फिर जिंदा पकड़ा गया आतंकी अजमल कसाब, जिसके हाथ में बँधा था कलाबा और नाम दिया गया था समीर चौधरी।

जिनको मार न सकी आतंकियों की गोली, उन्हें फटेहाली ने मारा: कसाब की पहचान करने वाले हरिश्चंद्र श्रीवर्धनकर और देविका रोतावन की कहानी

हरिश्चंद्र श्रीवर्धनकर अब इस दुनिया में नहीं हैं। देविका रोतावन तंगहाली में जीवन गुजार रही हैं। इन दोनों को 26 नवंबर 2008 को मुंबई में हुआ हमला जोड़ता है।

‘…तो उनके घर एक कुत्ता भी नहीं जाता’: बलिदानी मेजर के परिवार का वामपंथी CM ने किया था अपमान, मुंबई हमलों की एक कहानी...

'उनके घर एक कुत्ता भी नहीं जाता' - ये शब्द थे एक CPI(M) मुख्यमंत्री के, बलिदानी मेजर संदीप उन्नीकृष्णन के परिवार के लिए। पढ़िए कैसे एक बहादुर जवान ने देश के लिए खुद को बलिदान कर दिया।

निहत्थे थे फिर भी पकड़ लिया कसाब के एके-47 का बैरल, 23 गोली खाकर भी नहीं छोड़ी गर्दन: तुकाराम ओंबले के बलिदान ने बचाई...

तुकाराम ओंबले ने अजमल कसाब को पकड़वाने के लिए 23 गोलियाँ सीने पर खाईं थी। अगर उस दिन वो जिंदा नहीं पकड़ा जाता तो पाकिस्तान की जगह आज हिंदू बदनाम होते।

राहुल, बरखा, परमबीर… 26/11 के बाद दुनिया ने जानी इनकी करनी: कोई पार्टी में बिजी तो ​कोई आतंकियों से लड़ने को नहीं था तैयार

राहुल गाँधी, बरखा दत्त, परमबीर सिंह... 26/11 हमले की बरसी पर जानिए कहाँ थे ये, क्या कर रहे थे उस दौरान।

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