Thursday, September 23, 2021

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अब्बाजान से बना पिताश्री, अम्मीजान से माताश्री: ‘मुगलों ने सिखाया सब कुछ’ से अब ‘उर्दू के एहसान का प्रोपेगंडा’ – जानिए सच्चाई

स्क्रॉल जैसे मीडिया संस्थानों ने 'माताश्री' और 'पिताश्री' जैसे शब्दों के लिए भी उर्दू व रही मासूम रजा को श्रेय दे दिया। जाइए क्या है सच्चाई।

चलती से दौड़ती हिंदी, 1965 वाली बिंदी नहीं रही अब हिंदी: एक-दूसरे से जुड़े हिंदुस्तान, हिंदी भाषा और हिंदी का बाजार

संविधान सभा ने 14 सितंबर 1949 को हिंदी को राजभाषा का दर्जा प्रदान किया। इसी स्मृति में प्रतिवर्ष 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाता है।

भारत की भाषा संबंधी बहस में हिंदी की भूमिका: मातृभाषा के लिए श्यामा प्रसाद मुखर्जी से लेकर अमित शाह तक का योगदान

हिंदी सभी भारतीय भाषाओं में सबसे व्यापक रूप से बोली जाने वाली भाषा है। यह एक एकीकृत भाषा के रूप में कार्य कर सकती है और गैर-देसी ज़बानों की भूमिका को बदल सकती है।

अब ‘रामचरितमानस’ का जीवन दर्शन पढ़ेंगे BA के छात्र, MP के सिलेबस में महाभारत, योग और ध्यान भी शामिल

उच्च शिक्षा मंत्री मोहन यादव ने कहा कि जब युवा रामचरितमानस पढ़ेंगे तो मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की तरह उनमें चरित्र का निर्माण होगा।

Oh God का मतलब ‘या अल्लाह’… गूगल यही बता रहा, बस 2 स्टेप से कंपनी को बताइए उसकी गलती

गूगल ट्रांसलेशन द्वारा 'ओह गॉड' (Oh God) यानी, 'हे भगवान' का हिंदी अनुवाद 'या अल्लाह' बताने को लेकर ऑनलाइन सर्च इंजन गूगल से लोगों ने सवाल किए हैं।

God Bless You का हिंदी मतलब ‘अस्सलामु अलैकुम’? Google ट्रांसलेशन की करतूत के बाद लोग माँग रहे जवाब

अंग्रेजी में 'God bless you' लिखते हैं तो गूगल ट्रांसलेशन में इसका अनुवाद 'अस्सलामु अलैकुम' दिखाया जाता है। हो रहा विरोध।

PM मोदी ने रखी थी ‘आत्मनिर्भर भारत’ की नींव, ‘आत्मनिर्भरता’ बना 2020 का ऑक्सफ़ोर्ड हिंदी शब्द

ऑक्सफ़ोर्ड लैंग्वेजेज़ ने 'आत्मनिर्भरता' को 2020 के लिए ऑक्सफ़ोर्ड हिंदी शब्द चुना है। PM मोदी ने कोविड-19 पैकेज की घोषणा करते हुए इस शब्द पर विशेष जोर दिया था।

मैं मुन्ना हूँ: कहानी उस बच्चे की जो कभी अंधेरी कोठरी में दाखिल होकर अपनी आँखें मूँद उजाले की कल्पना में लीन हो गया...

उपन्यास के नायक मुन्ना की कहानी आरंभ होती है उसके श्रापित बचपन से जहाँ वह शारीरिक, मानसिक झंझावतों से जूझता किशोरवय के अल्हड़पन को पार कर प्रेम की अनकही गुत्थियों को सुलझाता जीवन यात्रा में आगे बढ़ता रहा।

हथियारों से लैस होना जरूरी, वरना भेड़िये तो राह चलते साधुओं पर भी अकारण झपट्टा मारते हैं: दिनकर ने क्यों कहा था ऐसा?

फ़रवरी 21, 1963 को राज्यसभा में दिए अपने भाषण में राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर ने समझाया था कि अहिंसा का अर्थ क्या होता है।

मातृभाषया सह सापत्न्यम् आक्रान्तृभाषाभिः गर्लफ्रेंड् इव व्यवहारः किमर्थम्?

ह्यः अपि मित्रैः सह यूथं रचयितुं वाट्सैपे प्रयोजयामासिम। प्रसङ्गेऽस्मिन्नेकेन मित्रेण स्वरांशः प्रेषितः, नाम ऑडियो-क्लिप्। तदस्माभिश्चालितम् इत्युक्ते प्ले कृतं तदा मित्रस्य ध्वनिः श्रुतः “ब्रोज़ लेट्स हैंग आउट टुमॉरो! आई एंट गॉट टाइम टुडे।”

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