Homeविविध विषयमनोरंजनहिंदी की कोई ज़रूरत नहीं है... फहाद फाज़िल की मलयालम फिल्म 'आवेशम' में राजभाषा...

हिंदी की कोई ज़रूरत नहीं है… फहाद फाज़िल की मलयालम फिल्म ‘आवेशम’ में राजभाषा का अपमान? सोशल मीडिया में छिड़ी बहस

फिल्म में फहाद फाज़िल ने 'रंगा' नाम का किरदार निभाया है। एक दृश्य में दिखाया गया है कि रंगा कॉलेज के सीनियरों को धमकी दे रहा है। इस दौरान पहले मलयालम में धमकी देता है, फिर कन्नड़ में, फिर हिंदी में और अंत में फिर से कन्नड़ में।

मलयालम फिल्म ‘आवेशम’ के एक दृश्य में हिंदी भाषा का अपमान किए जाने का आरोप लगा है। बता दें कि दक्षिण भारत में कुछ तत्वों द्वारा हिंदी थोपे जाने का आरोप लगाते हुए अपने ही देश की भाषा का विरोध किया जाता है। यहाँ तक कि वहाँ के राजनेता भी इसकी फसल काटते हैं। फहाद फाज़िल को अल्लू अर्जुन अभिनीत तेलुगु फिल्म ‘पुष्पा’ (2021) में बतौर विलेन शोहरत मिली थी। मलयालम मनोरंजन इंडस्ट्री में उनकी कई फिल्मों को समीक्षकों द्वारा प्रशंसा मिली है।

‘आवेशम’ में भी उनके परफॉर्मेंस की तारीफ की जा रही है। 155 करोड़ रुपए बटोरने के बाद अब ‘Amazon Prime’ के जरिए OTT पर रिलीज किया गया है। फिल्म में फहाद फाज़िल ने ‘रंगा’ नाम का किरदार निभाया है। एक दृश्य में दिखाया गया है कि रंगा कॉलेज के सीनियरों को धमकी दे रहा है। इस दौरान पहले मलयालम में धमकी देता है, फिर कन्नड़ में, फिर हिंदी में और अंत में फिर से कन्नड़ में। इसके बाद उसका एक साथी उसे जाकर रुकने के लिए कहता है, क्योंकि धमकी लंबी खिंच गई।

इस दौरान वो कहता है कि सबको सन्देश मिल गया है, अब हमें निकलना चाहिए। इस दौरान रंगा पूछता है, “हिंदी की ज़रूरत नहीं है?” उसका साथी कहता है, “कोई ज़रूरत नहीं है।” जब सोशल मीडिया में इस संबंध में ध्यान दिलाया गया कि तो कई दक्षिण भारतीय कहने लगे कि भारत की कोई एक आधिकारिक भाषा नहीं है। ‘आवेशम’ को नियमों के विरुद्ध रिलीज के 28 दिन बाद ही OTT पर रिलीज कर दिया गया, जबकि केरल के फिल्म एक्सहिबीटर्स एसोसिएशन ने इसके लिए 42 दिन का विंडो रखा है।

इसी कारण ‘आवेशम’ को OTT पर रिलीज किए जाने के साथ ही थिएटरों ने निकाल बाहर किया। अब हिंदी भाषा के अपमान के आरोप के बाद नया विवाद पैदा हो गया है। वहीं कुछ फिल्म प्रशंसकों का कहना है कि दृश्य के हिसाब से ये डायलॉग उचित था, हिंदी का अपमान नहीं किया गया है। फ़िलहाल इस फिल्म को हिंदी में डब नहीं किया गया है। तमिलनाडु में भी कई नेता ‘हिंदी थोपने’ का आरोप लगा कर अपनी राजनीति चमकाते रहते हैं।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

जानिए दुबई के उस ‘Botim’ ऐप की कहानी, जिसके जरिए कनेक्टेड थे राँची में RSS दफ्तर पर बम फेंकने वाले पाकिस्तानी एजेंट

व्हाट्सएप की तरह दुबई में 'Botim' ऐप का इस्तेमाल होता है। जिन लोगों ने RSS दफ्तर पर पेट्रोल बम से हमला किया, उन्हें इसी ऐप पर टास्क मिला था।

आरफा जी, बेवकूफ तो आपने उन सेकुलर हिंदुओं को बनाया है जिन्होंने आपको ‘पत्रकार’ समझा

आरफा अगर इस्लामी कट्टरपंथियों के बचाव का काम और भारत सरकार की बुराई करना वो छोड़ दें तो उन्हें उनके अपने दर्शक ही नहीं पूछेंगे।
- विज्ञापन -