घाटी में कश्मीरी पंडितों की आबादी ना के बराबर बची है। अब वो भी खौफ में जीवन जी रहे हैं। क्योंकि उन्हें भी आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के प्रॉक्सी ग्रुप TRF से जान से मारने की धमकियाँ मिल रही है।
पद्म पुरस्कारों की सूची में बड़ी संख्या में जमीनी स्तर पर काम करने वाले लोगों के नाम शामिल हैं। इनमें अंके गौड़ा, तेची गुबिन, कोल्लक्कयिल देवकी अम्मा, बृज लाल भट्ट, बुधरी ताती जैसे लोग हैं।
अनुपम खेर ने इस कविता में विस्थापित हुए कश्मीरी पंडितों के दर्द बयां किया। कैप्शन में उन्होंने बताया कि ये कविता एक विस्थापित कश्मीरी पंडित सुनयना काचरू की है।