जम्मू-कश्मीर में कभी पाकिस्तान ज़िंदाबाद के नारे लगाते तो कभी सेना पर पत्थरबाजी का सीन आम है। लेकिन ऐसा पहली बार हुआ जब कश्मीरी पंडित ने 'फ्री कश्मीर फ्रॉम इस्लामिक टेररिज़्म' का पोस्टर लहराया हो, विदेशी दल को जमीनी हकीकत से वाकिफ कराया हो।
कश्मीर पर अफवाह फैलाने में शेहला रशीद पुरानी उस्ताद रही हैं। वे ट्ववीट कर सेना पर कश्मीरियों को प्रताड़ित करने का आरोप तक लगा चुकी हैं। सेना ने उस वक्त कहा था कि लोगों को भड़काने के लिए असामाजिक तत्व और संगठन फर्जी खबरें फैला रहे हैं।
'रेडियो कश्मीर' का नाम अब 'ऑल इंडिया रेडियो' हो गया है। इसके साथ ही लोगों को लस्सा कौल याद आ रहे हैं। दूरदर्शन कश्मीर के डायरेक्टर रहे कौल की हत्या जेकेएलएफ के आतंकियों ने कर दी थी।
कैलिफोर्निया के कमिश्नर अविंदर चावला ने कहा कि मोदी सरकार ने सिखों के कल्याण के लिए सराहनीय प्रयास किए हैं। खास तौर पर करतापुर कॉरिडोर खोले जाने को लेकर भारत सरकार के प्रयासों के लिए प्रवासी सिखों ने प्रसन्नता व्यक्त की और उनका शुक्रिया अदा किया।
"वॉशिंगटन पोस्ट की पक्षपातपूर्ण रिपोर्टिंग में इस सच को नजरअंदाज किया गया कि अनुच्छेद 370 और 35ए के कारण अल्पसंख्यक, महिलाएँ और समाज के कमजोर वर्ग के लोग लोकतांत्रिक अधिकारों से वंचित रहे जबकि कश्मीर भ्रष्टाचार, अलगावववाद की जमीन बन गई।"
"अनुच्छेद 370 में इन संशोधनों की आवश्यकता थी, क्योंकि इसके कारण लगभग सभी कश्मीरी अल्पसंख्यकों (जैसे शिया, दलित, गुर्जर, कश्मीरी पंडित, कश्मीरी सिखों) के साथ हद से ज्यादा भेदभाव हो रहा था। लेकिन अब उन्हें कानून के समक्ष बराबरी का अवसर मिलेगा।"
कश्मीरी पंडितों के संगठन का मानना है कि मुस्लिम बहुल राज्य को मिले विशेष प्रावधान का जम्मू-कश्मीर को इस्लामिक स्टेट बनाने के लिए दुरुपयोग किया जा रहा था। ये अनुच्छेद पंडितों की कश्मीर में वापसी में भी बाधक थे।
लगभग एक हफ़्ते की यात्रा में यह सभी यात्रीगण राज्यपाल सत्यपाल मलिक के ख़ास मेहमान होंगे। सुरक्षा की बात की जाए तो छ: वॉल्वो बसों में यात्रियों की सुरक्षा के पुख़्ता इंतज़ाम किए गए हैं।
KPPAC के उपाध्यक्ष सतीश महालदार ने कहा कि वो विधानसभा चुनाव में उम्मीदवारों को मैदान में उतारने की योजना बना रहे हैं और साथ ही अन्य राजनीतिक दलों से भी गठबंधन की माँग कर रहे हैं। समर्थन जुटाने के लिए देश भर में सदस्यता अभियान भी शुरू किया गया है।