कांतारा चैप्टर 1 में लाल माटी से ढँके गाँव, वर्षा में भीगी वन-भूमि और अंधकार में छिपे दृश्य, दर्शक को स्मरण कराते हैं कि सिनेमा का चमत्कार उसकी दृश्य-भाषा है, न कि केवल संवाद।
ये स्वस्तिक को नाजी प्रतीक समझकर इससे घृणा करने वाली ब्रेनवॉश्ड बच्ची की कहानी है। कूल दिखने के चक्कर में पश्चिमी सभ्यता के आगोश में जाकर ईसाई धर्मांतरण की तरफ बढ़ रहे ब्रेनवॉश्ड किशोर की कहानी है।
न तो बलात्कार की समस्या को पहली बार उठाया गया है, न पिता-पुत्री के रिश्ते को पहली बार उकेरा गया है, न ही पुलिस के कामकाज के तरीके पर ये पहला कटाक्ष है। फिर भी 'महाराजा' ताज़ा हवा का झोंका है।
'हनुमान' एक ऐसी फिल्म है जिसे देख कर इसे बनाने वालों की श्रद्धा झलकती है। ऐसी फ़िल्में बनाने के लिए सैकड़ों करोड़ रुपए नहीं, भाव चाहिए। बॉलीवुड ने जिन पौराणिक कथाओं एवं किरदारों को नज़रअंदाज़ किया, साउथ सिनेमा अब उन्हीं को दुनिया के सामने ला रहा।
कंगना रनौत की 'तेजस' में सिर्फ हवाई युद्ध ही नहीं, बल्कि परिवार, प्रेम और संघर्ष भी है। लेकिन, आतंकवाद के आते शांति मातम में बदल जाती है। फिर जो होता है, वहीं 'तेजस' की हाइलाइट है।