विषय: ramjanmabhoomi

शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिज़वी (फोटो साभार- न्यूज़18)

हमें पाँच एकड़ अलॉट कीजिए, हम बनाएँगे अस्पताल: शिया वक्फ बोर्ड

"शिया वक्फ बोर्ड ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के फैसले से बिलकुल इत्तेफाक नहीं रखता, न ही वह एआईएमपीएलबी का हिस्सा है। रिज़वी ने यह भी कहा कि देश के मुसलमानों ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का स्वागत किया है।"
जस्टिस नज़ीर, राम मंदिर

जस्टिस अब्दुल नज़ीर और उनके परिवार को ‘Z’ श्रेणी की सुरक्षा, राम मंदिर फैसले के बाद PFI से खतरा

जस्टिस एस अब्दुल नज़ीर राम मंदिर पर फ़ैसला देने वाली सुप्रीम कोर्ट की पाँच जजों की पीठ का हिस्सा थे। यह उस पीठ का भी हिस्सा थे, जिसने ट्रिपल तलाक़ को असंवैधानिक घोषित किया था। इस्लामिक संगठन PFI से ख़तरे को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों ने...
महंत नृत्य गोपाल दास, परमहंस दास

परमहंस दास ने राम जन्मभूमि न्यास प्रमुख के ख़िलाफ़ की आपत्तिजनक टिप्पणी, संगठन से निष्कासित

"परमहंस दास, जिनका मूल नाम उदय नारायण दास है, वे स्व-घोषित महंत और जगतगुरु थे और उन्होंने संत के रूप में अपने कर्तव्यों का निर्वहन नहीं किया। साथी संतों से परमहंस दास को अपने दायरे में शरण न देने का भी आग्रह करता हूँ।"
राम नाम बैंक, इलाहाबाद

1 लाख लोगों का जमा धन डबल: 100 साल पुराने राम नाम बैंक ने ग्राहकों को दिया स्पेशल बोनस

राम जन्मभूमि पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बैंक ने उन खाता धारकों के लिए विशेष पुरस्कार की भी घोषणा की है जिन्होंने सवा लाख राम नाम जमा कर रखे हैं। इस बैंक की न तो कोई एटीएम है और न ही कोई चेक बुक।
ओवैसी, मस्जिद चाहिए, अयोध्या

‘मुझे मेरी मस्जिद वापस चाहिए, औरंगज़ेब का सबसे बड़ा साम्राज्य था, वो इस्लामी कट्टरपंथी नहीं था’

"अगर मस्जिद को (1992 में) ध्वस्त नहीं किया जाता, तब भी क्या यही फ़ैसला आता? हमारी लड़ाई ज़मीन के टुकड़े के लिए नहीं थी। यह सुनिश्चित करना था कि मेरे क़ानूनी अधिकारों का ध्यान रखा जाए। SC ने यह भी स्पष्ट कहा कि मस्जिद बनाने के लिए किसी मंदिर को नहीं गिराया गया। मुझे अपनी मस्जिद वापस चाहिए।"
राम, अयोध्या

हिन्दू धर्मांतरण क्यों नहीं करते? कलमा क्यों नहीं पढ़ लेते? क्योंकि वो काल को जीतने वाले राम के उपासक हैं

अपने अंतर्मन में हर हिन्दू यह बात जानता था कि श्री राम व राम का नाम हिन्दू धर्म की आत्मा है। राम गए तो हिन्दू धर्म नहीं बचेगा। वह आस्था, वह श्रद्धा जो हमारे रक्त और हमारी हड्डियों में समाई हुई है। राम का ‘तत्व’ ही वह शाश्वत धारा है जिसने हिन्दू समाज को विषम-से-विषम परिस्थिति में भी स्पंदित व जीवित रखा है, तथा सदैव रखेगी।
राम मंदिर मॉडल

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद 5 गुना बढ़ी अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं की तादाद

विहिप के प्रवक्ता शरद शर्मा ने बताया कि फैसले के बाद अचानक से कार्यशाला पहुॅंचने वाले श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ गई है। अमूमन 1000 लोग रोजाना कार्यशाला आते थे। अब यह संख्या बढ़कर 5000 हो गई है।
योगी आदित्यनाथ

राम मंदिर निर्माण की देख-रेख करें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ: राम जन्मभूमि न्यास ने उठाई माँग

“राम जन्मभूमि न्यास चाहता है कि योगी आदित्यनाथ ट्रस्ट का नेतृत्व करें। गोरखपुर में प्रतिष्ठित गोरखनाथ मंदिर, जो गोरक्षा पीठ से संबंधित है, ने राम मंदिर आंदोलन में प्रमुख भूमिका निभाई है। महंत दिग्विजय नाथ, महंत अवैद्यनाथ और अब योगी आदित्यनाथ मंदिर आंदोलन के अभिन्न अंग रहे हैं।”
राम मंदिर ट्रस्ट

अयोध्या में राम मंदिर ट्रस्ट के गठन की प्रक्रिया शुरू, सुप्रीम कोर्ट ने दिया है 3 महीने का वक्त

विधि मंत्रालय और अटॉर्नी जनरल से राय लेने के बाद मंदिर निर्माण की रूपरेखा तैयार की जाएगी। अधिकारियों की एक टीम को फैसले का विस्तृत अध्ययन करने की ज़िम्मेदारी दी गई है ताकि ट्रस्ट के गठन में किसी दिशा-निर्देश की अनदेखी न हो।
मोदी सरकार

भारत भक्ति का सामूहिक भाव मोदी सरकार के संकल्प से सिद्धि पथ का संबल

राम मंदिर, तीन तलाक और अनुच्छेद 370... देश की सत्ता में 60 वर्ष से अधिक समय तक रहने वाले राजनैतिक दल स्वार्थ और वोट बैंक की राजनीति के चलते इन समस्याओं को सुलझाने के बजाय उलझाकर राजनीति की रोटियाँ सेंकते रहे। भाजपा नीत मोदी की सरकार ने...
अयोध्या, वामपंथी

कोर्ट में राम मंदिर के खिलाफ बिना जानकारी के दिए बयान: वामपंथी ‘इतिहासकारों’ ने स्वीकारा

चिंता का विषय यह है कि इन लोगों ने उन छात्रों को भी शिक्षित किया जो भविष्य में सैकड़ों लोगों को शिक्षित करेंगे। यह हमारी शिक्षा की स्थिति की एक भयानक तस्वीर को उजागर करता है। इससे यह बात भी स्पष्ट हो जाती है कि वर्तमान सरकार को प्राथमिकता के आधार पर छात्रों को पढ़ाए जाने वाले इतिहास के पाठ्यक्रम में संशोधन की आवश्यकता क्यों है?
राम मंदिर, सुप्रीम कोर्ट

5 जजों की पीठ में से 1045 पन्नों का फैसला किसने लिखा? कानून के जानकार भी आश्चर्य में

सामान्यत: जब एक पीठ द्वारा किसी विषय पर फैसला दिया जाता है, तो निर्णय को लिखने वाले न्यायाधीश का नाम इसमें दिया जाता है। लेकिन अयोध्या के फैसले को किसने लिखा है, इसका जिक्र नहीं किया गया है।

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