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सबरीमाला मंदिर में किसी को नहीं मिले VIP ट्रिटमेंट, हीरो दिलीप के दौरे में तीर्थयात्रियों को रोकने से उनके पूजा का अधिकार हुआ बाधित: केरल हाई कोर्ट

केरल हाई कोर्ट ने कहा, "यहाँ तक ​​कि जिन अधिकारियों को सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के तहत (वीआईपी दर्शन की) अनुमति दी गई है, वे भी वहाँ काफी समय तक रुके रहते हैं। इससे अन्य लोगों के दर्शन में बाधा उत्पन्न होती है।" कोर्ट ने संबंधित पुलिस और त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (TDB) के अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि ऐसी घटनाएँ दोबारा नहीं होनी चाहिए।

केरल हाई कोर्ट ने गुरुवार (12 दिसंबर 2024) को कहा कि सबरीमाला मंदिर के सोपानम में तीर्थयात्रियों की बेरोक-टोक की आवाजाही के उसके निर्देश का अभिनेता दिलीप के दौरे में खुला उल्लंघन किया गया। कोर्ट ने कहा कि दिलीप के कारण अन्य तीर्थयात्रियों को 7 मिनट से अधिक समय तक भगवान का दर्शन नहीं हो पाया। इससे तीर्थयात्रियों के पूजा करने के अधिकार पर असर पड़ा।

न्यायमूर्ति अनिल के नरेंद्रन और न्यायमूर्ति मुरली कृष्ण एस की खंडपीठ ने कहा कि तीर्थयात्रियों में कम उम्र के बच्चे, वरिष्ठ नागरिक और विकलांग व्यक्ति भी शामिल थे। खंडपीठ ने इसे बेहद गंभीर मुद्दा बताते हुए सबरीमाला के मुख्य पुलिस समन्वयक को निर्देश दिया कि किसी भी तीर्थयात्री को अभिनेता के मामले की तरह लंबे समय तक सोपानम के सामने खड़े रहने की अनुमति न दी जाए, जिससे दूसरों को परेशानी हो।

खुली अदालत में जजों ने इस दौरान के सीसीटीवी फुटेज को देखते हुए मौखिक रूप से टिप्पणी की, “हमने वह वीडियो देखा है। बहुत बहुत बहुत बहुत गंभीर है। तीर्थयात्रियों को लगभग रोक दिया गया है। यह दो मिनट का सवाल नहीं है… वह व्यक्ति (दिलीप) सामने है… आप देख सकते हैं कि यह गार्ड रोकने के लिए अपना हाथ रख रहा है।”

न्यायालय ने अपने आदेश में कहा, “सोपानम के सामने पहली पंक्ति से तीर्थयात्रियों की आवाजाही को ड्यूटी पर तैनात देवस्वोम गार्ड ने रात 10:58:10 बजे दक्षिणी तरफ से रोक दिया था। सिने अभिनेता दिलीप ने रात 10:58:24 बजे दक्षिणी तरफ से सोपानम की अगली पंक्ति में प्रवेश किया और वह रात 11:05:45 बजे तक वहीं रहे।”

कोर्ट ने कहा, “तीसरे वीडियो में दिख रहा है कि उत्तरी तरफ से पहली पंक्ति से तीर्थयात्रियों की आवाजाही को दूसरे देवस्वोम गार्ड ने रात 10:51:38 बजे रोक दिया था। सिने अभिनेता के चले जाने तक पहली पंक्ति में खड़े किसी भी तीर्थयात्री को सोपानम के दक्षिणी तरफ जाने की अनुमति नहीं थी।” जस्टिस नरेन्द्रन ने कहा कि ऐसे विशेषाधिकार उन लोगों को भी नहीं दिए जाते, जिन्हें वीआईपी दर्शन की अनुमति है।

खंडपीठ ने कहा, “यहाँ तक ​​कि जिन अधिकारियों को सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के तहत (वीआईपी दर्शन की) अनुमति दी गई है, वे भी वहाँ काफी समय तक रुके रहते हैं। इससे अन्य लोगों के दर्शन में बाधा उत्पन्न होती है।” कोर्ट ने संबंधित पुलिस और त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (TDB) के अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि ऐसी घटनाएँ दोबारा नहीं होनी चाहिए।

दरअसल, दिलीप ने 5 दिसंबर को सबरीमाला मंदिर में दर्शन किया था। इस दौरान अन्य तीर्थयात्रियों को रोक दिया गया था। इसके अगले दिन खबरें आईं कि फिल्म अभिनेता को दिए गए ‘VIP’ ट्रीटमेंट से मंदिर में अन्य तीर्थयात्रियों को काफी असुविधा हुई। इसके बाद 6 दिसंबर को कोर्ट ने TDB को अभिनेता की यात्रा के सीसीटीवी फुटेज प्रस्तुत करने का निर्देश दिया और अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट माँगी।

उस समय न्यायालय ने टीडीबी को यह भी चेतावनी दी थी कि वह इस बात पर विचार करेगा कि अभिनेता को वीआईपी सुविधा देने के कारण तीर्थयात्रियों की पूजा में बाधा डालने वाले व्यक्तियों के खिलाफ अदालत की अवमानना ​​की कार्यवाही शुरू की जानी चाहिए या नहीं। हालाँकि, बाद में केरल पुलिस ने कहा कि अभिनेता को किसी तरह की विशेष सुविधा नहीं दी गई थी।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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