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गाँव में कई लोगों को हुआ बुखार, कहा जादू-टोना किया है… 3 लोगों को पीट-पीटकर मार डाला: ओडिशा हाई कोर्ट ने 9 दोषियों की मौत की सजा उम्रकैद में बदली

हाई कोर्ट ने कहा कि फांसी की सजा अनुचित होगी और आजीवन कारावास ज्यादा सही रहेगी। हाई कोर्ट ने इसी के साथ इन सभी 9 दोषियों को मौत की सजा खत्म करके उसे आजीवन कारावास में बदल दिया। हालाँकि, आगे वह माफी पाने के अधिकारी रहेंगे।

ओडिशा हाई कोर्ट ने 9 लोगों को दी गई फाँसी की सजा खत्म कर दी है। यह सजा उन्हें एक परिवार के तीन लोगों की हत्या करने के चलते निचली अदालत ने दी थी। हाई कोर्ट ने कहा कि मौत की सजा देना ठीक नहीं होगा और दूसरी सजाओं से भी इन दोषियों का पुनर्वास हो सकता है।

ओडिशा हाई कोर्ट ने यह फैसला बुधवार (15 जनवरी, 2025) को दिया है। हाई कोर्ट ने कहा, “हमारा विचार है, यह नहीं कहा जा सकता कि कम सजा के विकल्प को बंद करने और मौत की सजा को अनिवार्य करने के अलावा अपीलकर्ताओं के सुधार और पुनर्वास की कोई संभावना नहीं है। या दूसरे शब्दों में कहना ठीक नहीं है कि आजीवन कारावास से न्याय नहीं मिल पाएगा।”

हाई कोर्ट ने कहा कि फांसी की सजा अनुचित होगी और आजीवन कारावास ज्यादा सही रहेगी। हाई कोर्ट ने इसी के साथ इन सभी 9 दोषियों को मौत की सजा खत्म करके उसे आजीवन कारावास में बदल दिया। हालाँकि, आगे वह माफी पाने के अधिकारी रहेंगे।

हाई कोर्ट ने यह फैसला 2016 के एक मामले में सुनाया है। यह घटना सितम्बर, 2016 में ओडिशा के रायगडा में हुई थी। यहाँ एक महिला मेलिता साबर ने आरोप लगाया था कि उसी के गाँव के रहने वाले उसी के समाज के 9 लोगों ने उसके माता-पिता और बहन को एक गौशाला में बाँध दिया।

इन लोगों ने तीनों पर आरोप लगाया कि वह जादू टोना कर रहे हैं जिसके चलते गाँव में दो लोगों की मौत हो गई जबकि कई लोग बुखार से पीड़ित हैं। इन तीनों को इसके बाद बेरहमी से पीटा गया। इनसे जादू टोने की बात स्वीकारने को कहा गया। इसके बाद इन्हें बेरहमी से पीटा गया और इन्हें दूसरी जगह मरणासन्न अवस्था में ले जाया गया।

इसके बाद इन तीनों की हत्या कर दी गई और शव दफना दिया गया। पीड़िता को भी धमकाया गया। इसके कुछ दिनों के बाद तीनों मृतकों को जला भी दिया गया। निचली अदालत ने इस मामले में यह आरोप सही पाए और सभी को मौत की सजा सुनाई और इसे हाई कोर्ट के पास भेजा। इस फैसले के खिलाफ दोषी हाई कोर्ट पहुँचे।

हाई कोर्ट ने इसके बाद सुनवाई करते हुए पाया कि निचली अदालत ने दोषियों को पर्याप्त समय नहीं दिया और फांसी की सजा इस मामले में उपयुक्त नहीं है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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