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7 दिनों में हलफनामा दें या माफी माँगें…चुनाव आयोग ने राहुल गाँधी के दावों की खोल दी पोल: CEC ने बिहार SIR में गड़बड़ी से लेकर 0 मकान नंबर तक आरोपों की बताई सच्चाई

CEC ज्ञानेश कुमार ने स्पष्ट कर दिया है कि मकान नंबर 0 होने का मतलब फर्जी मतदाता नहीं है। उन्होंने कहा कि कई पंचायत क्षेत्रों में लाखों घर ऐसे हैं जिनके पते में मकान नंबर नहीं है।

मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने लोकसभा में विपक्ष के नेता और कॉन्ग्रेस सांसद राहुल गाँधी द्वारा लगाए गए ‘वोट चोरी’ के आरोपों पर कड़ा पलटवार किया है। उनका कहना है कि राहुल गाँधी या तो अपना हलफनामा दाखिल करें या वो देश से माफी माँगें। ज्ञानेश कुमार ने राहुल गाँधी के निराधार आरोपों पर हलफनामा दाखिल करने के लिए उन्हें 7 दिन का समय दिया है।

ज्ञानेश कुमार ने राहुल गाँधी द्वारा बार-बार ‘वोट चोरी’ का जिक्र किए जाने पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि ‘वोट चोरी’ जैसे शब्दों से जनता को गुमराह करना ‘लोकतंत्र का अपमान’ है।

7 दिन में हलफनामा दीजिए या माफी माँगिए: राहुल से EC

7 अगस्त 2025 को राहुल गाँधी ने एक लंबी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुनाव आयोग पर कई गंभीर आरोप लगाए थे। हालाँकि, इसके तुंरत बाद ही चुनाव आयोग ने उनके आरोपों को लेकर शपथ-पत्र देने का कहा लेकिन राहुल गाँधी ने आज तक शपथ पत्र नहीं दिया है।

अब CEC ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसे लेकर कहा, “या तो हलफनामा दीजिए या देश से माफी माँगिए। कोई तीसरा विकल्प नहीं है। अगर हमें 7 दिनों के भीतर हलफनामा नहीं मिलता है, तो इसका मतलब होगा कि ये सभी आरोप बेबुनियाद हैं और जो व्यक्ति कह रहा है कि हमारे मतदाता धोखेबाज हैं, उसे माफी माँगनी चाहिए।”

EC के कंधे पर बंदूक रखकर मतदाताओं को निशाना बनाया जा रहा है: CEC

राहुल गाँधी ने एक वोटर द्वारा कई बार वोट डालने का दावा किया गया था। CEC ने चुनाव आयोग के कंधे पर बंदूक रखकर मतदाताओं को निशाना बनाए जाने की बात कही है। इस पर CEC ने कड़ा पलटवार करते हुए कहा, “न तो चुनाव आयोग और न ही मतदाता ऐसे झूठे आरोपों से डरते हैं।”

ज्ञानेश कुमार ने कहा, “जब चुनाव आयोग के कंधों पर बंदूक रखकर इस देश के मतदाताओं को निशाना बनाया जा रहा है, तो हम स्पष्ट करना चाहते हैं कि चुनाव आयोग निडर होकर चट्टान की तरह, बिना किसी पूर्वाग्रह के सभी वर्गों और धर्मों के सभी मतदाताओं के साथ खड़ा है, चाहे वे गरीब हों, अमीर हों, बूढ़े हों, महिलाएँ हों या युवा।”

राहुल गाँधी की PPT प्रेजेंटेशन में गड़बड़ डेटा?

राहुल गाँधी ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में PPT प्रेजेंटेशन के जरिए डेटा दिया था और इस पर भी चुनाव आयोग ने सवाल उठाए हैं। CEC ने कहा, “PPT बनाई जाती है और ECI के डेटा का गलत तरीके से विश्लेषण किया जाता है।”

CEC ने कहा, “इसके माध्यम से यह कहा जाता है कि क्योंकि मतदाता सूची में ऐसा नाम है और चुनाव सही तरीके से नहीं हुए हैं। मतदाता सूची और चुनाव दो अलग-अलग मुद्दे हैं… दोनों के लिए कानून और नियम अलग-अलग हैं।”

उन्होंने कहा, “अगर कोई यह सोचता है कि वह PPT प्रेजेंटेशन का उपयोग आँकड़ों को गलत साबित करने और तथ्यों की गलत व्याख्या करने के लिए कर सकता है, तो यह कानून और संविधान दोनों के खिलाफ है।”

मकान नंबर 0 होने पर CEC ने दिया जवाब

राहुल गाँधी ने मतदाता सूची में मकान नंबर 0 होने पर भी सवाल उठाए थे। ज्ञानेश कुमार ने स्पष्ट कर दिया है कि मकान नंबर 0 होने का मतलब फर्जी मतदाता नहीं है। उन्होंने कहा कि कई पंचायत क्षेत्रों में लाखों घर ऐसे हैं जिनके पते में मकान नंबर नहीं है।

CEC ने कहा कि मतदातओं को छोड़ना संभव नहीं है और ऐसे में पतों पर काल्पनिक संख्या 0 दे दी जाती है। कुछ लोग पुलों के नीचे, लैंपपोस्ट के पास और शहरों में अनधिकृत कॉलोनियों में रहते हैं और ECI कोशिश करता है कि कोई मतदाता ना छूटे।

ज्ञानेश कुमार के मुताबिक, मतदान के लिए पता अनिवार्य नहीं है। उनका कहना है कि राष्ट्रीयता, मतदान केंद्र से निकटता और 18 वर्ष की आयु वोटिंग के लिए अधिक मायने रखते हैं।

मतदाता सूची में दोहरे नाम पर ECI ने क्या कहा?

चुनाव आयोग ने मतदाता सूची में दोहरे नाम और दोहरे मतदान के आरोपों पर बड़ा बयान दिया है। मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची में किसी व्यक्ति का नाम एक से अधिक मतदान केंद्रों पर दर्ज होना और एक व्यक्ति का दो जगह मतदान करना दोनों अलग-अलग बातें हैं।

कुमार ने कहा, “अगर किसी मतदाता का नाम दो जगहों पर भी दर्ज है, तो उसे केवल एक ही जगह वोट डालने का अधिकार है। अगर कोई व्यक्ति दो जगहों पर मतदान करता है, तो यह एक अपराध है।”

कुमार ने आगे कहा कि जब सबूत मांगे गए, तो कोई जवाब नहीं दिया गया था। CEC ने यह भी स्पष्ट किया कि मतदाता सूची तैयार करने और मतदान कराने की प्रक्रियाएँ अलग-अलग हैं और इनके लिए अलग-अलग कानून और पदाधिकारी जिम्मेदार हैं।

बिहार की SIR प्रक्रिया पर चुनाव आयोग का जवाब

बिहार में जारी चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया पर भी कॉन्ग्रेस और RJD समेत कई विपक्षी दलों ने सवाल उठाए हैं। CEC ने कहा कि राजनीतिक दलों ने मतदाता सूची में दोहराव, गलत तरीके से नाम जोड़ने और हटाने के बारे में लगातार सवाल उठाए थे इसलिए SIR प्रक्रिया जरूरी हो गई थी।

ज्ञानेश कुमार ने कहा, “यह बहुत चिंता की बात है कि कुछ राजनीतिक पार्टियाँ वोट चोरी के आरोप लगा रही हैं। जबकि सच यह है कि उन्हीं पार्टियों के बूथ-स्तर के एजेंटों ने खुद ही वोटर लिस्ट पर साइन किए थे। इसका मतलब या तो यह है कि जिलों में बैठे उनके नेताओं की बात सही तरीके से उनके राष्ट्रीय नेताओं तक नहीं पहुँच रही है, या फिर जानबूझकर मतदाताओं के बीच भ्रम फैलाने की कोशिश की जा रही है।”

उन्होंने आगे कहा, “SIR की प्रक्रिया 10 लाख से अधिक बूथ-स्तर के एजेंट और 20 लाख से अधिक संभावित उम्मीदवारों के एजेंट मौजूद थे। इतनी पारदर्शिता और इतने लोगों की मौजूदगी में यह काम हुआ, तो फिर यह वोट चोरी कैसे हो सकती है?

CEC ने सवाल उठाया कि वोटर लिस्ट का सुधार चुनाव से पहले होना चाहिए या फिर चुनाव खत्म होने के बाद। उन्होंने कहा “जनप्रतिनिधित्व कानून साफ कहता है कि हर चुनाव से पहले मतदाता सूची को ठीक करना जरूरी है। यह चुनाव आयोग की कानूनी जिम्मेदारी है।”

ज्ञानेश कुमार ने यह भी कहा कि यह झूठ फैलाया जा रहा है कि एसआईआर (SIR) की प्रक्रिया को जल्दबाजी में किया गया। उन्होंने कहा कि यह काम 24 जून से शुरू हुआ था और लगभग 20 जुलाई तक पूरे राज्य में यह प्रक्रिया पूरी कर ली गई थी। उन्होंने कहा कि SIR का मकसद है कि मतदाता सूची ज्यादा से ज्यादा सही बनाया जा सके।

वहीं, बिहार में 22 लाख मृत मतदाता दिखाए जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि ये 22 लाख लोग छले 6 महीनों में नहीं बल्कि पिछले कई साल में मरे हैं। हालाँकि, इसे रिकॉर्ड में दर्ज नहीं किया गया था।

मशीन रीडेबल फॉर्मेट में क्यों नहीं वोटर लिस्ट?

मतदाता सूची को मशीन रीडेबल फॉर्मेट में उपलब्ध कराए जाने की माँग पर भी चुनाव आयोग ने जवाब दिया है। ज्ञानेश कुमार ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने 2019 में ही आदेश दिया था कि मशीन रीडेबल सूची मतदाताओं की निजता का उल्लंघन करती है।

उन्होंने बताया कि इस तरह की सूची को आसानी से एडिट और सर्च किया जा सकता है। इससे मतदाताओं की निजी जानकारी सार्वजनिक होने का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने हाल ही में कुछ राजनीतिक दलों द्वारा मतदाताओं की जानकारी सार्वजनिक करने को भी इसे निजता का हनन बताया है।

शपथ-पत्र देने से क्यों बच रहे हैं राहुल गाँधी?

‘राहुल गाँधी के आरोपों की जाँच बिना उनके शपथ-पत्र के क्यों नहीं हो सकती’ सवाल पर CEC ने कहा कि चुनाव आयोग इतने गंभीर आरोपों पर बिना शपथ-पत्र के काम नहीं कर सकता है। साथ ही, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अब तक इन आरोपों के समर्थन में कोई सबूत या ठोस प्रमाण सामने नहीं दिया गया है।

राहुल गाँधी से शपथ पत्र माँगने को लेकर ज्ञानेश कुमार ने कहा, “यदि आप निर्वाचन क्षेत्र के निर्वाचक नहीं हैं और शिकायत को आगे बढ़ाना चाहते हैं, तो आपके पास कानून में केवल एक ही विकल्प है। वह है निर्वाचन नियमों का पंजीकरण, नियम संख्या 20 उपखंड 3 उपखंड बी। यह कहता है कि यदि आप उस विधानसभा क्षेत्र के निर्वाचक नहीं हैं, तो आप एक गवाह के रूप में अपनी शिकायत दर्ज कर सकते हैं और निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी को आपको शपथ देनी होगी। वह शपथ उस व्यक्ति के सामने एडमिनिस्टर करानी होगी जिसके खिलाफ आपने शिकायत की है।”

इससे पहले, कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) ने राहुल गाँधी को पत्र लिखकर उनके दावों के लिए शपथ पत्र और मतदाताओं के नाम माँगे ताकि जाँच शुरू हो सके। इसके जवाब में राहुल ने डॉयलागबाजी शुरू कर दी थी। राहुल गाँधी ने कहा था, “मैं राजनेता हूँ, मैं झूठ नहीं बोलता। मेरे शब्द ही शपथ हैं।”

अगर राहुल गाँधी को लगता है कि उनके आरोप सही हैं तो क्यों वो चुनाव आयोग के सामने शपथ-पत्र देने से बच रहे हैं यह सवाल जितना मुश्किल लगता है उतना ही आसान भी है। शपथ पत्र पर दिए गए आरोपों में कुछ गड़बड़ी होती है तो उसका खामियाजा गंभीर हो सकता है। ऐसे में क्यों राहुल गाँधी सिर्फ बयानबाजी कर रहे हैं, यह समझना बेहद मुश्किल भी नहीं है।

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शिव
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