कॉन्ग्रेस ने कुंदरकी विधानसभा सीट पर गढ़ी जो ‘वोट-चोरी’ की थ्योरी, उसका आधार Scroll की खोखली रिपोर्ट: EC ने झूठ की पोल खोली

चुनाव आयोग (ECI) ने कॉन्ग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा द्वारा लगाए गए ‘वोट चोरी’ के आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। खेड़ा ने उत्तर प्रदेश की कुंदरकी विधानसभा उपचुनाव (2024) में भाजपा की जीत पर सवाल उठाते हुए इसे चुनाव आयोग पर ‘एक और धब्बा’ बताया था।

कुंदरकी सीट से भाजपा उम्मीदवार रामवीर सिंह ने सपा प्रत्याशी मोहम्मद रिजवान को 1,44,791 वोटों से हराया था। इस नतीजे को लेकर पवन खेड़ा ने एक ट्वीट में कहा, “1.4 लाख वोटों का फासला चमत्कार नहीं, वोट चोरी था।” उन्होंने इस दावे को आधार देने के लिए वामपंथी पोर्टल स्क्रॉल की एक संदिग्ध रिपोर्ट भी साझा की।

चुनाव आयोग ने शुक्रवार (26 सितम्बर 2025) को जारी बयान में साफ कहा कि मामला वर्तमान में न्यायालय में विचाराधीन है, इसलिए कुंदरकी उपचुनाव पर विशेष टिप्पणी करना उचित नहीं होगा। हालांकि, आयोग ने यह स्पष्ट किया कि किसी भी निर्वाचन क्षेत्र में लगातार दो चुनावों में परिणामों में भारी अंतर आना असामान्य नहीं है।

इस संदर्भ में आयोग ने महाराष्ट्र के मालेगाँव सेंट्रल विधानसभा क्षेत्र का उदाहरण दिया है। आयोग के अनुसार, नवंबर 2024 में हुए विधानसभा चुनाव में कॉन्ग्रेस उम्मीदवार को मात्र 3.13% वोट मिले थे जबकि पाँच महीने पहले हुए लोकसभा चुनाव में उसी क्षेत्र में कॉन्ग्रेस प्रत्याशी को 96.7% वोट मिले थे।

चुनाव आयोग ने स्क्रॉल की रिपोर्ट को भ्रामक बताते हुए कहा कि आयोग कभी भी धर्म या जाति आधारित आँकड़े जारी नहीं करता है। बयान में स्पष्ट किया गया, “मतदाता सूची में न तो धर्म और न ही जाति का कोई उल्लेख होता है। ऐसे में आयोग द्वारा जारी आँकड़ों के आधार पर धर्म या जाति से जुड़ा कोई विश्लेषण संभव ही नहीं है।”

आयोग ने यह भी बताया कि कुंदरकी विधानसभा क्षेत्र (29-कुंदरकी) से किसी भी मतदाता के नाम को गलत तरीके से हटाने/जोड़ने या धर्म के आधार पर फॉर्म-6 को अस्वीकार करने की कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई है।

बीते कई वर्षों से कॉन्ग्रेस पार्टी चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करती रही है। पवन खेड़ा के हालिया आरोप उसी सिलसिले की एक कड़ी माने जा रहे हैं। चुनाव आयोग ने दोहराया कि उसके सभी कार्य निष्पक्ष और कानूनन निर्धारित प्रक्रिया के तहत ही संपन्न होते हैं।