पुलिस के मुताबिक, तंगल पीएफआई के अंडरग्राउंड सदस्यों को एकजुट करने के लिए प्रोपेगेंडा फैला रहा था । इसके लिए अलग-अलग प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जा रहा था। जाँच के दौरान तंगल ने माना है कि उसने व्हाट्सएप ग्रुप ‘सलमान सलमा’ बनाया था। जहाँ उसने कथित तौर पर प्रतिबंधित संगठन का महिमामंडन करने वाले संदेश साझा किए और फरार पीएफआई कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय स्थापित किया।
इस ऑनलाइन नेटवर्क के माध्यम से, उसने पूर्व पीएफआई सदस्यों को फिर से संगठित होने के लिए प्रेरित किया और पीएफआई के चोरी छिपे पीएफआई का काम शुरू करने को कहा।
विश्वसनीय खुफिया जानकारी के आधार पर, मंगलुरु पुलिस ने तंगल को उरवा स्टोर के पास से हिरासत में लिया। डिजिटल फोरेंसिक जाँच के लिए उसका मोबाइल फोन भेजा गया है। पूछताछ के बाद उसे एनआईए कोर्ट के सामने पेश किया गया। कोर्ट ने उसे 24 अक्टूबर 2025 तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मौलवी के डिजिटल फ़टप्रिंट और चैट रिकॉर्ड प्रतिबंधित कार्यकर्ताओं को फिर से जोड़ने और संगठित करने के संकेत देते हैं। ये यूएपीए का उल्लंघन माना जा रहा है।
पीएफआई का गठन 2006 में हुआ था। उसने मुस्लिमों को सामाजिक, आर्थिक और उच्च शिक्षा में मदद करने के लिए संगठन बनाया गया था। लेकिन वक्त के साथ संगठन धार्मिक उन्माद फैलाने, हिंसा करने और एंटी इंडिया एक्टिविटी में शामिल हो गया।
सितंबर 2022 में भारत सरकार ने पीएफआई पर 5 सालों के लिए बैन लगा दिया। संगठन ने टेरर फंडिंग, सांप्रदायिक हिंसा और देश की एकता और अखंडता को तोड़ने की कोशिश की।

