सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (7 अगस्त 2026) को तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) सांसद महुआ मोइत्रा की उस याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया, जिसमें उन्होंने भड़काऊ फेसबुक पोस्ट से जुड़े मामले की पुलिस जाँच में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल होने की अनुमति माँगी थी।
शीर्ष अदालत ने स्पष्ट कहा कि जनप्रतिनिधि विरोध-प्रदर्शन के डर से जाँच एजेंसियों के समक्ष पेश होने से नहीं बच सकते और इस तरह की याचिकाएँ सुप्रीम कोर्ट के समक्ष नहीं लाई जानी चाहिए। जस्टिस दीपांकर दत्ता और शील नागू की पीठ मोइत्रा की इस याचिका की सुनवाई कर रही थी।
महुआ मोइत्रा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने दलील दी कि उनकी मुवक्किल को आशंका है कि यदि वह थाने पहुँचती हैं तो भीड़ उन पर हमला कर सकती है। इस पर न्यायमूर्ति दत्ता ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा, “आप सांसद हैं? राजनीति में आने का फैसला किया है और अब अंडों से डर रही हैं? हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने सीने पर गोलियाँ खाई थीं। ऐसी याचिकाएँ इस अदालत के सामने नहीं आनी चाहिए।”
वर्चुअल पेशी की माँग पर कोर्ट ने उठाए सवाल
यह मामला जून में दर्ज एक एफआईआर से जुड़ा है, जो भाजपा के एक नेता की शिकायत पर दर्ज की गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया पर अपलोड किए गए दो वीडियो में आपत्तिजनक टिप्पणियाँ की थीं। ये टिप्पणियाँ उस घटना के बाद की गई थीं, जब कथित तौर पर भाजपा समर्थक कृष्णानगर की एक अदालत के बाहर अंडे और टमाटर लेकर उनके खिलाफ प्रदर्शन करने पहुँचे थे।
शंकरनारायणन ने अदालत से कहा कि मामला केवल एक फेसबुक पोस्ट से संबंधित है और उनकी मुवक्किल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जाँच में पूरा सहयोग देने को तैयार हैं। हालाँकि, पीठ ने इस दलील पर सवाल उठाते हुए पूछा, “वर्चुअली क्यों? सिर्फ इसलिए कि आप सांसद हैं?”
शंकरनारायणन ने कहा कि मोइत्रा की चिंता स्वाभाविक हैं क्योंकि पिछली बार जब वह वहाँ गई थीं, तब उनके ऊपर अंडे फेंके गए थे। उन्होंने कहा, “पुलिस नोटिस के मुताबिक मुझे अपने ही निर्वाचन क्षेत्र के थाने में उपस्थित होना है। पिछली बार जब मैं वहाँ गई थी, तो पहले धमकी दी गई कि मुझ पर अंडे फेंके जाएँगे और बाद में अंडे फेंके भी गए।”
कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश का हवाला
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि कलकत्ता हाई कोर्ट पहले ही महुआ मोइत्रा को किसी भी कठोर कार्रवाई से अंतरिम राहत दे चुका है और साथ ही उन्हें जाँच में सहयोग करने का निर्देश भी दिया है। HC के आदेश का उल्लेख करते हुए पीठ ने कहा कि इस स्तर पर सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप का कोई कारण नहीं बनता।
पीठ ने कहा, “चुनौती दिए गए आदेश के पैरा 19 को पढ़िए। यदि आप पेश नहीं होती हैं, तो पहले हाई कोर्ट के समक्ष उसके परिणाम भुगतिए। अगर वहाँ से कोई शिकायत रहे, तब हमारे पास आइए।”
जब अदालत ने याचिका पर विचार करने से स्पष्ट इनकार कर दिया, तो महुआ मोइत्रा की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने याचिका वापस लेने की अनुमति माँगी।
इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को वापस लिया हुआ मानते हुए खारिज कर दिया। इसके साथ ही कलकत्ता हाई कोर्ट का वह निर्देश बरकरार रहा, जिसके तहत महुआ मोइत्रा को 14 अगस्त को जाँच अधिकारी के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना होगा।

