कर्नाटक में RSS की गतिविधियों पर बैन की बात करने वाली कॉन्ग्रेस बैकफुट पर आई, CM सिद्धारमैया ने कहा- GO में संघ का नाम नहीं

कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर नकेल कसने की कोशिश में बैकफुट पर आ गई है। पहले राज्य के मंत्री प्रियांक खरगे ने RSS की गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाने की माँग की। इसके बाद सरकार ने सरकारी संपत्तियों के निजी इस्तेमाल पर एक नया आदेश जारी किया। लेकिन जब यह आदेश RSS को निशाना बनाने के तौर पर देखा गया और विवाद बढ़ा, तो मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने तुरंत पलड़ा झाड़ लिया। सिद्धारमैया ने कहा कि RSS पर कोई रोक नहीं है और यह आदेश तो पुराने भाजपा सरकार के नियमों को ही दोहराता है।

CM सिद्धारमैया का यू-टर्न

विवाद बढ़ने पर मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने तुरंत अपना रुख बदल लिया। सोमवार (20 अक्टूबर 2025) को सिद्धारमैया ने स्पष्ट रूप से कहा कि राज्य सरकार ने RSS पर कोई बैन नहीं लगाया है। सिद्धारमैया ने कहा कि जारी आदेश में RSS का नाम तक नहीं है। सिद्धारमैया ने बचाव की मुद्रा में कहा कि यह आदेश नया नहीं है। उन्होंने कहा कि 2013 में भाजपा सरकार (जगदीश शेट्टार के मुख्यमंत्री रहते) ने भी ऐसा ही नियम बनाया था, जिसे अब दोहराया जा रहा है।

मंत्री खरगे की क्या थी माँग?

राज्य के मंत्री प्रियांक खरगे ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को पत्र लिखा था। पत्र में सरकारी परिसरों में RSS की गतिविधियों पर तुरंत रोक लगाने की माँग की थी। खरगे ने यहाँ तक पूछा था कि ‘अगर RSS शांतिप्रिय है तो लाठियाँ क्यों घुमाता है?’ खरगे की यह माँग कॉन्ग्रेस सरकार की RSS के प्रति आक्रामक नीति का संकेत थी।

आदेश जारी, फिर भी डर

खरगे की माँग के बाद सरकार ने 18 अक्टूबर 2025 को एक आदेश जारी किया। इसमें सरकारी स्कूल, पार्क और जमीन पर कार्यक्रम के लिए पहले लिखित अनुमति लेना अनिवार्य कर दिया गया। यह आदेश पुलिस महानिदेशक की रिपोर्ट के बाद आया, जिसमें अनधिकृत उपयोग का हवाला दिया गया था। माना गया कि यह कदम RSS को निशाना बनाने के लिए उठाया गया है।

कॉन्ग्रेस ने पहले मंत्री खरगे के जरिए RSS को घेरने की कोशिश की। लेकिन जब विवाद बढ़ा और राजनीतिक दबाव महसूस हुआ, तो मुख्यमंत्री ने तुरंत पाला बदल लिया। सिद्धारमैया का यह कहना कि ‘हम तो भाजपा के पुराने नियम लागू कर रहे हैं,’ दिखाता है कि कॉन्ग्रेस सीधे टकराव से बचना चाहती है। यह घटनाक्रम कॉन्ग्रेस सरकार के दोहरे रवैये और RSS के प्रति रणनीति में तालमेल की कमी को दर्शाता है।