5 राज्यों के 26 ST बच्चों को गाँव में ईसाइयत की ट्रेनिंग दे रहा था बिशप, BJP-VHP के विरोध के बाद जागा प्रशासन-जाँच शुरू: MP के ग्वालियर का मामला

मध्यप्रदेश के ग्वालियर में 26 अनुसूचित जनजाति के बच्चों को ईसाइयत की शिक्षा देकर मिशनरी से जोड़ने की तैयारी एक बिशप गुप्त तरीके से कर रहा था। बिशप का घर ही इन बच्चों की शिक्षा का केन्द्र था। जानकारी मिलने के बाद विश्व हिन्दू परिषद और बीजेपी के लोग वहाँ पहुँचे और विरोध जताया। विरोध होने पर पुलिस बिशप के घर पहुँची और मामला शांत करवाया। धर्मांतरण की आशंका को देखते हुए पुलिस और खुफिया विभाग जाँच में जुट गई है।

खास बात यह है कि बच्चे सिर्फ मध्यप्रदेश के नहीं बल्कि झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों से भी आए हैं। इसे सभी को बाहर जाने की इजाजत नहीं है। बिशप आकर इन बच्चों को ईसाइयत की शिक्षा देते हैं।

ईसायत शिक्षा केन्द्र का संचालन एक ईसाई मिशनरी कर रही है। इन बच्चों को ईसायत उपदेशक बनाने की कवायद की जा रही है।यह सेंटर ग्वालियर से 8 किलोमीटर दूर बड़ागाँव में है। शहर से दूर इस सेंटर में ज्यादातर ग्रामीण लोग आते हैं।

26 बच्चे जो इस सेंटर में मिले हैं, वे आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के हैं। इनलोगों को ईसाइयत के साथ-साथ अंग्रेजी भी पढ़ाई जा रही है। परिवार को सब्जबाग दिखाया गया है कि ये बच्चे यहाँ पढ़ लिख कर ‘बड़े’ बन जाएँगे।

पुलिस, खुफिया विभाग जाँच में जुटी

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस के साथ-साथ खुफिया विभाग भी मामले की जाँच में जुट गई है।

एसडीएम सी बी प्रसाद ने कहा है कि बिना पूर्व सूचना के धर्म परिवर्तन करवाना जबरन धर्मांतरण की श्रेणी में आता है और इसके लिए मध्यप्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम में सख्त प्रावधान हैं। हालाँकि अभी तक धर्मांतरण की पुष्टि नहीं हुई है। ईसाई मिशनरी भी धर्मांतरण से इनकार कर रहा है।

बच्चों को पूरी तरह पेड़ों से ढके इमारत में रखा गया था

ईसायत का पाठ पढ़ रहे बच्चों को जिस इमारत में रखा गया है, वह पूरी तरह पेड़ों से ढका हुआ है। यहाँ आम तौर पर ध्यान नहीं जाता है। यहाँ पढ़ने वाले ओडिशा के बच्चे के मुताबिक उसे ईसाइयत की किताबों के साथ-साथ अंग्रेजी पढ़ाई जा रही है।
उसे हिन्दी कम आती है, इसलिए अंग्रेजी सिखा कर ईसाइयत के प्रशिक्षक बनाने की ट्रेनिंग दी जा रही है। इन बच्चों को इमारत से बाहर निकलने की इजाजत भी नहीं है।