भारत के वाणिज्य मंत्रालय ने संसद की स्थायी समिति को बताया है कि अमेरिका द्वारा कई भारतीय उत्पादों पर टैरिफ लगाने के बावजूद अप्रैल से अक्टूबर की अवधि में भारत के निर्यात में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मंत्रालय के अनुसार, यह वृद्धि पिछले वर्ष (अप्रैल-अक्टूबर 2024) की तुलना में काफी ज्यादा है।
यह स्थायी समिति तृणमूल कॉन्ग्रेस की राज्यसभा सांसद डोला सेन की अध्यक्षता में गठित की गई है और इसका उद्देश्य भारत-अमेरिका संबंधों की समीक्षा करना है, खासकर हाल ही में अमेरिका द्वारा भारतीय वस्तुओं पर लगाए गए शुल्कों पर ध्यान देना।
विपक्षी दलों ने सवाल उठाया है कि जब भारत अमेरिका का रणनीतिक साझेदार है, तो फिर अमेरिका एक विकासशील देश पर भारी टैरिफ क्यों लगा रहा है। समिति के सामने टी बोर्ड, कॉफी बोर्ड, सिल्क बोर्ड, और टेक्सटाइल उद्योग ने अपनी शिकायतें रखी हैं।
घरेलू माँग मजबूत होने के बावजूद इन उद्योगों को निर्यात चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। समिति ने सरकार से यह भी पूछा है कि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें कम होने के बावजूद भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें अब तक ऊँची क्यों बनी हुई हैं।
वाणिज्य मंत्रालय अगले दो हफ्तों में समिति को विस्तृत लिखित रिपोर्ट सौंपेगा। समिति में कॉन्ग्रेस की रेनुका चौधरी, जेडीयू के गिरीधर यादव, बीजेपी के निशिकांत दुबे, प्रवीण खंडेलवाल और रमेश अवस्थी भी सदस्य हैं।
अक्टूबर महीने में अमेरिका को भारत के निर्यात में 14.5% की वृद्धि दर्ज की गई। हालाँकि 27 अगस्त 2025 से अमेरिकी टैरिफ पूरी तरह लागू होने के बाद सितंबर में निर्यात में गिरावट आई थी, लेकिन अक्टूबर की वृद्धि ने उद्योग जगत में फिर उम्मीद जगाई है।
भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते पर बातचीत जारी है, वहीं भारतीय उद्योग नए अंतरराष्ट्रीय बाजारों की तलाश भी कर रहे हैं ताकि निर्यात पर टैरिफ का असर कम हो सके।

