महीनों तक किए नखरे, अब केंद्र के वक्फ संशोधन अधिनियम-2025 पर यू-टर्न: पश्चिम बंगाल में बिल लागू करने पर ममता सरकार की सहमति, मिलेगी 82000 संपत्तियों की जानकारी

पश्चिम बंगाल सरकार ने महीनों तक विरोध करने के बाद आखिरकार केंद्र के वक्फ संशोधन अधिनियम-2025 को लागू करने पर सहमति दे दी है। राज्य के अल्पसंख्यक विकास विभाग ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे राज्य की लगभग 82,000 वक्फ संपत्तियों का विवरण 5 दिसंबर तक केंद्र सरकार के पोर्टल umeedminority.gov.in पर अपलोड करें।

यह अधिनियम अप्रैल 2025 में संसद के दोनों सदनों से पारित हुआ था। विभागीय सचिव पीबी सलीम ने 27 नवंबर 2025 को पत्र जारी कर जिलावार डेटा अपलोड करने का आदेश दिया।

यह फैसला राजनीतिक रूप से काफी अहम है क्योंकि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पहले सार्वजनिक रूप से कहा था कि वे इस कानून को बंगाल में लागू नहीं होने देंगी। जब केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह बिल पेश किया था तब राज्य में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे।

ममता बनर्जी ने 9 अप्रैल 2025 को एक जैन समुदाय के कार्यक्रम में कहा था कि वे मुस्लिम समुदाय राज्य की आबादी का लगभग 33% है और वह उसकी रक्षा करेंगी। इस कानून से लोगों को बँटने नहीं देंगी।

नए संशोधित कानून के अनुसार, अब वक्फ बोर्ड और ट्रिब्यूनल में गैर-मुस्लिम सदस्य भी शामिल होंगे। साथ ही, यदि किसी संपत्ति को वक्फ बताया जाता है तो अंतिम निर्णय सरकार के पास होगा।

पश्चिम बंगाल सरकार ने इस कानून को अदालत में चुनौती दी थी, लेकिन फैसला उनके पक्ष में नहीं आया। अधिनियम की धारा 3B के अनुसार, सभी पंजीकृत वक्फ संपत्तियों की जानकारी छह महीने के भीतर केंद्रीय प्रणाली पर अपलोड करना अनिवार्य है।

राज्य में 8,000 से अधिक वक्फ एस्टेट्स हैं। इन संपत्तियों के प्रबंधकों को मुतवल्ली कहा जाता है। वही इसकी जानकारी अपलोड करने के लिए जिम्मेदार होंगे। इसके लिए अल्पसंख्यक विकास विभाग ने आठ-स्तरीय योजना बनाई है।

इसमें पोर्टल से परिचित होना, मुतवल्ली और मदरसा शिक्षकों के साथ बैठकें व कार्यशालाएँ करना, दो चरणों में डेटा प्रविष्टि करना (मुतवल्ली पंजीकरण और संपत्ति विवरण), विवादित संपत्तियों को फिलहाल बाहर रखना, निगरानी के लिए अधिकारियों की नियुक्ति करना, वरिष्ठ अधिकारियों को ज़िलों में भेजना, ज़िलों में हेल्प डेस्क स्थापित करना और कर्मचारियों के लिए रोजाना वर्चुअल प्रशिक्षण सत्र आयोजित करना शामिल है।