नई दिल्ली में आयोजित रचनात्मक कॉन्ग्रेस राष्ट्रीय अधिवेशन के दौरान कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी और संदीप दीक्षित ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को लेकर बेहद आपत्तिजनक टिप्पणियाँ कीं। अधिवेशन में बोलते हुए गाँधी अपने ही अंदाज में प्रधानमंत्री मोदी और भारत की विदेश नीति का मजाक उड़ा रहे थे।
अचानक गाँधी कुछ ज्यादा ही नाटकीय अंदाज में आ गए और मंच पर मौजूद संदीप दीक्षित को आवाज दी। उन्होंने अपनी बाँहें फैलाकर उन्हें गले लगाने का इशारा किया। जैसे ही दीक्षित पीछे मुड़े, गाँधी तेजी से उनकी ओर बढ़े और उन्हें एक अजीब तरीके से गले लगा लिया। गाँधी ऐसा करके प्रधानमंत्री मोदी की नकल करने की कोशिश कर रहे थे, जिन्हें विदेश यात्राओं के दौरान दूसरे देशों के राष्ट्राध्यक्ष अक्सर गले लगाकर स्वागत करते हैं।
गाँधी की इस हरकत को देखकर दर्शक हँसने लगे। इसके बाद गाँधी ने प्रधानमंत्री मोदी का मजाक उड़ाते हुए कहा कि उनके लिए विदेश नीति का मतलब ही लोगों को गले लगाना है। इसी दौरान दीक्षित ने बीच में बोलते हुए एक भद्दी और सेक्सिस्ट टिप्पणी की, “मुझे मेलोनी समझकर तो नहीं पकड़ा था?” इस आपत्तिजनक टिप्पणी के बाद गाँधी और दीक्षित दोनों जोर-जोर से हँसने लगे।
What a clown… Does he fit for the LOP post?
— Mr Sinha (@Mrsinha) August 13, 2026
Someone tell him that Hugging foreigners is any day better than secretly bedding with them. pic.twitter.com/bLgIjnrZp5
कॉन्ग्रेस नेताओं ने भारत और इटली के बीच के उस गर्मजोशी भरे और मैत्रीपूर्ण रिश्ते को, जो प्रधानमंत्री मोदी और इटली की प्रधानमंत्री मेलोनी के बीच बातचीत और मुलाकातों में दिखाई देता है, घटिया और सेक्सिस्ट मजाक तक सीमित कर दिया।
अपने ही सेक्सिस्ट बयानों का रिकॉर्ड रखने वाली सुप्रिया श्रीनेत भी साथ हँसीं
मंच पर मौजूद कॉन्ग्रेस नेताओं का यह व्यवहार कॉन्ग्रेस पार्टी में गहराई तक मौजूद सेक्सिज्म का एक उदाहरण था। दर्शकों के बीच बैठी कॉन्ग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत अपने नेता द्वारा एक महिला को लेकर किए गए आपत्तिजनक इशारे पर जोर-जोर से हँस रही थीं।
हालाँकि, श्रीनेत से इस तरह के व्यवहार की उम्मीद कोई हैरानी की बात नहीं थी। वह खुद बीजेपी सांसद कंगना रनौत के खिलाफ सेक्सिस्ट टिप्पणी कर चुकी हैं। एक इंस्टाग्राम पोस्ट में, जिसे बाद में डिलीट कर दिया गया था, कॉन्ग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कंगना रनौत की एक बेहद भड़काऊ तस्वीर के साथ लिखा था, “क्या भाव चल रहा है मंडी में कोई बताएगा?”
अपने सत्यापित सोशल मीडिया अकाउंट से की गई इस आपत्तिजनक पोस्ट को लेकर भारी विरोध होने के बाद श्रीनेत ने सफाई जारी कर खुद का बचाव किया। अपने स्पष्टीकरण वाले वीडियो में उन्होंने दावा किया कि किसी ऐसे व्यक्ति ने, जिसके पास उनके अकाउंट का एक्सेस था यह पोस्ट की थी। उन्होंने यह भी कहा कि पोस्ट करने वाले व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
महिला राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी के प्रति बेहद सेक्सिस्ट और अपमानजनक व्यवहार दिखाने वाली श्रीनेत अकेली कॉन्ग्रेस नेता नहीं थीं। कॉन्ग्रेस के एक अन्य पदाधिकारी एचएस अहीर ने भी कंगना रनौत के खिलाफ अभद्र टिप्पणी की थी। उन्होंने मंडी से उनकी उम्मीदवारी को लेकर ‘मंडी से र**’ जैसी बेहद आपत्तिजनक टिप्पणी की थी।
कॉन्ग्रेस के भीतर की महिलाओं को भी निशाना बनाते रहे हैं पार्टी के लोग
कॉन्ग्रेस पार्टी के भीतर मौजूद यह बेलगाम सेक्सिज्म केवल पार्टी के बाहर की महिलाओं तक सीमित नहीं रहा है। पार्टी के भीतर की महिलाएँ भी इसका शिकार रही हैं। कॉन्ग्रेस की पूर्व प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी, जो लंबे समय तक पार्टी से जुड़ी रही थीं और पार्टी की एक मजबूत आवाज थीं, भी कॉन्ग्रेस में मौजूद इस सेक्सिज्म का शिकार हुई थीं।
सितंबर 2018 में मथुरा में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कॉन्ग्रेस के कुछ कार्यकर्ताओं ने चतुर्वेदी के साथ बदसलूकी की थी। पार्टी ने शुरुआत में इन कार्यकर्ताओं को निलंबित कर दिया था लेकिन अप्रैल 2019 में उन्हें फिर से पार्टी में बहाल कर दिया गया।
अपनी पार्टी के इस रुख से निराश चतुर्वेदी ने 2019 में कॉन्ग्रेस से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कहा था कि संगठन में उनकी सेवाओं को महत्व नहीं दिया गया और पार्टी में बने रहने का मतलब उनकी गरिमा और आत्मसम्मान से समझौता करना होगा।
प्रियंका चतुर्वेदी का यह मामला भी दिखाता है कि महिलाओं की गरिमा से जुड़े मुद्दे कॉन्ग्रेस के भीतर राजनीतिक हितों के आगे कैसे पीछे हो सकते हैं। जिन कार्यकर्ताओं पर उनके साथ बदसलूकी का आरोप था, उन्हें पहले निलंबित किया गया और बाद में फिर से पार्टी में शामिल कर लिया गया। इससे यह धारणा और मजबूत हुई कि जब पार्टी के हितों की बात आती है तो अनुशासनात्मक कार्रवाई भी कमजोर पड़ सकती है।
आखिरकार चतुर्वेदी ने कॉन्ग्रेस छोड़ दी और इसकी वजह के तौर पर अपनी गरिमा और आत्मसम्मान के खत्म होने की बात कही।
सेक्सिस्ट व्यवहार का एक पैटर्न और कॉन्ग्रेस नेतृत्व की चुप्पी
दिलचस्प बात यह है कि कॉन्ग्रेस पार्टी के शीर्ष नेतृत्व, जिसमें राहुल गाँधी भी शामिल हैं, ने पार्टी के भीतर महिलाओं के खिलाफ हुए सेक्सिस्ट और महिला-विरोधी व्यवहार की निंदा तक नहीं की। ऐसे तत्वों के खिलाफ सख्त रुख अपनाना तो दूर की बात है।
इसलिए इस पूरे मामले को केवल किसी एक व्यक्ति की एक बार की गलती या अलग-थलग घटना कहकर खारिज करना मुश्किल है। राहुल गाँधी और संदीप दीक्षित की सार्वजनिक रूप से की गई घटिया बातचीत से लेकर महिला राजनीतिक विरोधियों और यहाँ तक कि कॉन्ग्रेस की अपनी नेताओं से जुड़े पुराने बयानों और घटनाओं तक, ऐसे बार-बार सामने आए मामले पार्टी के महिलाओं के प्रति रवैये पर असहज सवाल खड़े करते हैं।
इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि कॉन्ग्रेस के शीर्ष नेतृत्व की ओर से लगातार और सख्त प्रतिक्रिया न आने से ऐसे व्यवहार को सामान्य बनाने का खतरा पैदा होता है। यही वह व्यवहार है, जिसका विरोध राजनीतिक पार्टियाँ आम तौर पर करने का दावा करती हैं।
राहुल गाँधी, संदीप दीक्षित और जॉर्जिया मेलोनी से जुड़ा यह ताजा मामला इसलिए एक बड़ा सवाल खड़ा करता है: प्रधानमंत्री मोदी का राजनीतिक विरोध आखिर बार-बार महिलाओं को लेकर व्यक्तिगत, सेक्सिस्ट और अपमानजनक टिप्पणियों तक क्यों पहुँच जाता है?


