प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी तीन देशों की यात्रा के पहले चरण में सोमवार (15 दिसंबर 2025) को जॉर्डन की राजधानी अम्मान पहुँच गए हैं। इस दौरान उन्होंने जॉर्डन के किंग अब्दुल्ला II इब्न अल हुसैन से मुलाकात की और दोनों के बीच द्विपक्षीय बैठक भी हुई। इसके साथ ही भारत-जॉर्डन के बीच कई अहम समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं।
इस दौरान जॉर्डन ने अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) जैसी भारत के नेतृत्व वाली पहलों में शामिल होने की इच्छा जताई है। विदेश मंत्रालय ने समझौतों की एक आउटकम लिस्ट भी जारी की है।
इस लिस्ट में नई और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में तकनीकी सहयोग, जल संसाधन प्रबंधन और विकास में सहयोग, पेट्रा और एलोरा के बीच एक समझौता और 2025-2029 के लिए सांस्कृतिक एक्सचेंज प्रोग्राम शामिल हैं। इसके अलावा दोनों देशों के बीच डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन के लिए जनसंख्या स्तर पर लागू किए गए सफल डिजिटल समाधानों को साझा करने के क्षेत्र में सहयोग के लिए आशय पत्र भी शामिल है।
List of Outcomes finalised : Visit of PM @narendramodi to the Hashemite Kingdom of Jordan pic.twitter.com/YXnFODrE8k
— Randhir Jaiswal (@MEAIndia) December 15, 2025
खुद प्रधानमंत्री मोदी ने भी इन समझौतों को भारत-जॉर्डन पार्टनरशिप का एक अहम विस्तार दिखाने वाला बताया है। साथ ही, उन्होंने कहा कि जल संसाधन प्रबंधन और विकास में सहयोग से लंबे समय तक पानी की सुरक्षा सुनिश्चित होगी। PM मोदी ने दोनों देशों के लोगों के बीच संबंध और गहरे होने की बात दोहराई है।
These outcomes mark a meaningful expansion of the India-Jordan partnership.
— Narendra Modi (@narendramodi) December 16, 2025
Our cooperation in new and renewable energy reflects a shared commitment to clean growth, energy security and climate responsibility.
Collaboration in water resources management and development will… https://t.co/SYbOTkd4B2
भारत-जॉर्डन राजनयिक संबंधों के 75 साल
भारत और जॉर्डन के बीच स्थापित कूटनीतिक रिश्तों ने 2025 में 75 वर्ष पूरे कर लिए हैं। इसी ऐतिहासिक अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जॉर्डन यात्रा को दोनों देशों के संबंधों में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।
भारत आज जॉर्डन का चौथा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। वित्त वर्ष 2023-24 में दोनों देशों के बीच कुल द्विपक्षीय व्यापार 26,033 करोड़ रुपए तक पहुँच गया, जिसमें भारत का निर्यात लगभग 13,266 करोड़ रुपए रहा। दोनों देशों ने आने वाले वर्षों में इस व्यापार को बढ़ाकर 5 अरब डॉलर यानी करीब 45,275 करोड़ रुपए तक ले जाने का लक्ष्य तय किया है।
जॉर्डन भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम है, खासकर कृषि क्षेत्र में। भारत अपनी जरूरत के रॉक फॉस्फेट का बड़ा हिस्सा जॉर्डन से आयात करता है और कुल रॉक फॉस्फेट आयात में जॉर्डन की हिस्सेदारी करीब 40% है। इसके अलावा उर्वरक उद्योग के लिए कच्चे माल की आपूर्ति में भी जॉर्डन की भूमिका अहम बनी हुई है। वहीं दूसरी ओर, जॉर्डन भारत से मशीनरी, पेट्रोलियम उत्पाद, अनाज, रसायन, मांस, ऑटो पार्ट्स और औद्योगिक उत्पादों का आयात करता है। निवेश के मोर्चे पर भी दोनों देशों के रिश्ते मजबूत हुए हैं।
पैगंबर हजरत मोहम्मद के वंशज हैं किंग अब्दुल्ला
जॉर्डन के राजा किंग अब्दुल्ला द्वितीय को इस्लामिक दुनिया में पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब का वंशज माना जाता है। उनका संबंध हाशिमी वंश से जुड़ा है, जिसे इस्लाम के सबसे प्रतिष्ठित और सम्मानित वंशों में गिना जाता है।
इस्लामी इतिहास के अनुसार पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब कुरैश कबीले से थे। कुरैश कबीले की ही एक प्रमुख शाखा बनू हाशिम थी, जिससे आगे चलकर हाशिमी वंश की स्थापना हुई। इसी वंश परंपरा से जॉर्डन का शाही परिवार जुड़ा हुआ है।

