युवती के गाँव का ही रहने वाले जावेद का बेटा मुश्ताक काफी दिनों से उसका पीछा कर रहा था। 14 दिसंबर को आयुषी बीएसटीसी का फॉर्म भरने के लिए घर से बाहर गई। वह देख लिया और उसका पीछा करने लगा।
घर पहुँचकर युवती अपनी माँ के साथ धम्बोला थाने पहुँची और शिकायत दर्ज करने को कहा। थानेदार ने शिकायत तो दर्ज कर ली, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की।
लगातार मानसिक तौर पर परेशान रहने के कारण युवती ने जहर खाकर अपनी जान दे दी। पुलिस की निष्क्रियता को लेकर गाँववालों में काफी रोष है। घटना के बाद थाने के बाहर लोगों ने प्रदर्शन किया। इस दौरान हनुमान चालीसा का पाठ भी किया गया। गाँव में तनाव को देखते हुए भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है।
गाँव वालों का कहना है कि पुलिस की कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। मुश्ताक बेखौफ लड़की को मानसिक तौर पर प्रताड़ित करता रहा। अगर समय रहते पुलिस सख्ती दिखाती तो आज युवती जिंदा होती। ये सिर्फ एक युवती का मामला नहीं है, बल्कि सिस्टम की नाकामी है, जिसने हिन्दू छात्रा को अपनी जान लेने पर विवश किया।
गाँव वालों की माँग है कि मुश्ताक को तुरंत गिरफ्तार किया जाए और उसके अवैध कब्जे वाले मकान को तुरंत बुलडोजर से ढाह दिया जाए

