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कॉन्ग्रेस-NSUI को घुसाकर छात्र आंदोलन को कमजोर कर रही सरकार, छात्रों ने कहा- हमें बाँटने की हो रही कोशिश: सुप्रीम कोर्ट पहुँचा मामला, CBI जाँच की माँग

झारखंड में जारी आंदोलन के बीच छात्रों ने सरकार पर कॉन्ग्रेस की छात्र इकाई NSUI समेत अन्य संगठनों को आगे कर आंदोलन में फूट डालने का आरोप लगाया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि राज्य सरकार उनके आंदोलन को कुचलने और बाँटने की राजनीति कर रही है।

झारखंड में सरकारी नौकरियों की परीक्षाओं में धांधली और अनियमितताओं के खिलाफ चल रहा छात्रों का आंदोलन लगातार जारी है। राजधानी राँची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में पिछले करीब 15 दिनों से लगातार अनिश्चितकालीन धरना और भूख हड़ताल कर रहे युवाओं और राज्य सरकार के बीच हुई बातचीत का अब तक कोई ठोस परिणाम नहीं निकल सका है।

पहली वार्ता के बाद समाधान की उम्मीद लगाए बैठे अभ्यर्थियों को तब बड़ा झटका लगा जब राज्य सरकार की नीयत और कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे। आंदोलनकारी छात्र नेताओं ने बाकायदा एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाकर सरकार पर आरोप लगाया है कि वह उनके आंदोलन को कुचलने और बाँटने की राजनीति कर रही है।

छात्रों का कहना है कि सरकार बातचीत के नाम पर महज समय बर्बाद कर रही है और आंदोलन में दरार पैदा करने की कोशिश की जा रही है। इस बीच JPSC-JSSC परीक्षा में हुई गड़बड़ियों का मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुँच गया है, जहाँ परीक्षा रद्द करने और पूरे मामले की CBI जाँच की माँग की गई है। 

झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की परीक्षाओं में पारदर्शिता की माँग को लेकर छात्र लगातार आंदोलनरत हैं। आंदोलन के दबाव में आकर राज्य सरकार ने छात्र प्रतिनिधियों को बातचीत के लिए बुलाया था। छात्र नेताओं के अनुसार, सरकार के प्रतिनिधिमंडल के साथ पहले दौर की बैठक आयोजित की गई।

इस वार्ता के दौरान अभ्यर्थियों के प्रतिनिधिमंडल ने अपनी माँगों को विस्तार से रखा। सरकारी प्रतिनिधिमंडल ने छात्रों की बातों को सुनने के बाद यह भरोसा दिलाया था कि इन माँगों को मुख्यमंत्री के समक्ष रखा जाएगा और जल्द ही दूसरे दौर की निर्णायक वार्ता होगी, लेकिन इसके बाद भी कोई समाधान सामने नहीं आ सका, जिससे अभ्यर्थियों में भारी असंतोष फैल गया।

प्रदर्शनकारी नेताओं का कहना है कि सरकार ने उनकी बात सुनी जरूर है, लेकिन किसी माँग पर तत्काल कार्रवाई या स्पष्ट समयसीमा नहीं दी गई है। इसलिए आंदोलन जारी रहेगा।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में फूटा छात्रों का गुस्सा, सरकार की नीयत पर उठाए सवाल 

वार्ता के नाम पर किसी ठोस फैसले तक न पहुँचने से आक्रोशित आंदोलनकारी छात्रों ने राँची में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर सरकार की मंशा की पोल खोली। छात्र नेता रवींद्र पासवान ने संवाददाताओं से बात करते हुए कहा कि झारखंड भर में फैलाए जा रहे भ्रम और अफवाहों को दूर करने के लिए उन्हें मीडिया के सामने आना पड़ा है।

रवींद्र पासवान ने कहा कि पिछले 15 दिनों से प्रदेश का युवा सड़क पर बैठकर अपने अधिकार और भविष्य की लड़ाई लड़ रहा है। पहले दौर की वार्ता में छात्रों ने बेहद संयम और तर्कों के साथ सरकार के सामने अपनी माँगें रखी थीं। छात्रों को उम्मीद थी कि सरकार उनकी जायज माँगों पर संवेदनशीलता दिखाएगी, लेकिन इसके विपरीत सरकार के नए कदमों ने छात्रों को बेहद निराश और दुखी कर दिया है।

छात्र नेताओं ने सीधे तौर पर कहा कि सरकार जिस तरह का रवैया अपना रही है, उससे उसकी नीयत साफ नहीं लगती और ऐसा लगता है कि युवाओं के भविष्य के साथ अब भी खिलवाड़ किया जा रहा है। 

NSUI और कॉन्ग्रेस को बीच में लाने और आंदोलन में विभाजन की साजिश का आरोप 

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान छात्र नेताओं ने सरकार द्वारा खेले जा रहे राजनीतिक दाँव-पेच पर कड़ा ऐतराज जताया। छात्र नेता रवींद्र पासवान ने आरोप लगाया कि पहले दौर की वार्ता के बाद अचानक सरकार ने छह से सात अन्य छात्र संगठनों से ज्ञापन स्वीकार करने का नाटक शुरू कर दिया।

उन्होंने सवाल उठाया कि जब वास्तविक अभ्यर्थी 15 दिनों से बारिश और धूप में सड़कों पर आंदोलन और भूख हड़ताल कर रहे हैं, तब अचानक अन्य संगठनों को सामने लाने की क्या वजह है? उन्होंने विशेष रूप से सत्ताधारी गठबंधन में शामिल कॉन्ग्रेस की छात्र इकाई नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) को बीच में घसीटने पर कड़ा हमला बोला।

पासवान ने सवाल किया कि NSUI सत्ताधारी दल का हिस्सा है, वे किस तरह की माँगें करेंगे? क्या वे सरकार की नीतियों के खिलाफ सड़क पर उतरकर संघर्ष कर रहे थे? छात्रों का आरोप है कि सरकार इस छात्र आंदोलन को दो-तीन अलग-अलग गुटों में बाँटकर कमजोर करना चाहती है ताकि मुख्य माँगों से ध्यान भटकाया जा सके। 

नेहा बोरा के ढपली गैंग ने भी बनाया अपना अलग मंच

इसी बीच ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की ढपली गैंग झारखंड की सोरेन सरकार के कंट्रोल्ड विपक्ष की तरह काम कर रही है। यहाँ इनलोंगों ने अपना अलग ही मंच तैयार किया हुआ है, जबकि प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों ने इन्हें अपने मंच पर जगह देने से साफ इंकार किया था।

गौरतलब है कि शुक्रवार (7 अगस्त 2026) को AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा को जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों को संबोधित करने के दौरान विरोध का सामना करना पड़ा था। प्रदर्शनकारियों ने उसे मंच से नीचे उतार दिया था और उन पर स्याही फेंकी थी।

बोरा अभ्यर्थियों के समर्थन में प्रदर्शन स्थल पर पहुँची थीं। हालाँकि उनकी मौजूदगी का प्रदर्शनकारियों के एक वर्ग ने विरोध किया। आंदोलनकारी लगातार यह कहते रहे हैं कि उनका आंदोलन किसी भी राजनीतिक दल या बाहरी संगठन से पूरी तरह अलग रहेगा।

जयराम महतो का निर्जला अनशन, सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

छात्रों के आंदोलन को समर्थन देते हुए डुमरी से विधायक और JLKM नेता जयराम महतो रविवार (9 अगस्त 2026) की सुबह पुराना विधानसभा परिसर के बाहर 24 घंटे के निर्जला अनशन पर बैठ गए हैं। उन्होंने कहा है कि इस दौरान वह पानी तक ग्रहण नहीं करेंगे।

महतो ने कहा है कि विधायक होने के नाते छात्रों के मुद्दे पर अपनी जिम्मेदारी निभाना जरूरी है और उनका यह कदम आंदोलन के समर्थन में सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश है। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें इस मामले की सच्चाई सामने आने का डर है।

महतो के मुताबिक, अगर बड़े पैमाने पर सीटों की खरीद-फरोख्त जैसी बातें सामने आ रही हैं तो इसकी निष्पक्ष जाँच जरूरी है। जयराम महतो ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार आंदोलन कर रहे सभी छात्र संगठनों के साथ समान रूप से बातचीत नहीं कर रही है और सरकार की बातचीत मुख्य रूप से अपने गठबंधन से जुड़े छात्र संगठनों के साथ हो रही है।

10 अगस्त को ‘विधानसभा मार्च’ का ऐलान 

सरकार की ओर से कथित तौर पर आंदोलन को कमजोर करने की कोशिशों के बावजूद छात्र नेताओं ने दोटूक शब्दों में कहा कि झारखंड का पूरा छात्र समाज एकजुट है। छात्र नेताओं ने स्पष्ट किया कि किसी भी तरह के राजनीतिक षड्यंत्र या विभाजनकारी चालों से छात्र आंदोलन डगमगाने वाला नहीं है, बल्कि पूरा अभ्यर्थी वर्ग एक ही मंच पर मुस्तैदी से खड़ा है।

उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार ने समय रहते उनकी संवैधानिक और जायज माँगों को आधिकारिक रूप से स्वीकार नहीं किया, तो आंदोलन उग्र रूप ले लेगा। इसी कड़ी में अभ्यर्थियों ने 10 अगस्त को प्रस्तावित ‘विधानसभा मार्च’ का ऐलान दोहराया है।

छात्र नेताओं का दावा है कि इस मार्च में शामिल होने के लिए पूरे झारखंड के कोने-कोने से लगभग 50 हजार से 1 लाख तक छात्र राँची पहुँचेंगे। यह प्रदर्शन पूरी तरह से निर्णायक होगा और उस दिन सरकार को छात्रों की माँगों पर आधिकारिक मुहर लगानी ही पड़ेगी तथा अपनी जवाबदेही तय करनी होगी। 

JPSC धाँधली का मामला पहुँचा सुप्रीम कोर्ट, आयोग भंग करने की माँग

झारखंड का यह छात्र आंदोलन केवल राँची की सड़कों तक ही सीमित नहीं रहा है, बल्कि परीक्षा में हुई अनियमितताओं का मामला सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुँच गया है। 14वीं JPSC सिविल सर्विसेज प्रारंभिक परीक्षा 2025 में बड़े पैमाने पर हुई गड़बड़ियों, OMR शीट में हेरफेर और धांधली के आरोपों को लेकर सुप्रीम कोर्च में एक जनहित याचिका दायर की गई है।

इस जनहित याचिका में परीक्षा को पूरी तरह से रद्द करने और पूरे मामले की निष्पक्ष जाँच CBI से कराने की माँग की गई है। इसके साथ ही जनहित याचिका में यह भी माँग उठाई गई है कि झारखंड लोक सेवा आयोग की कार्यप्रणाली पूरी तरह संदेहास्पद हो चुकी है, इसलिए वर्तमान आयोग को तत्काल भंग किया जाना चाहिए।

याचिका में सुप्रीम कोर्ट से परीक्षा से जुड़े सभी भौतिक और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का निर्देश देने की भी माँग की गई है। इसमें मूल OMR शीट, कार्बन कॉपी, प्रश्नपत्र, आंसर-की, अटेंडेंस शीट, बायोमेट्रिक रिकॉर्ड, CCTV फुटेज, डिस्पैच रजिस्टर, परीक्षा केंद्रों की रिपोर्ट, स्कैनिंग रिकॉर्ड, मूल्यांकन डेटा और रिजल्ट से जुड़ा डेटा शामिल है।

याचिका में माँग की गई है कि किसी सेवानिवृत्त जज की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति का गठन कर नई पारदर्शी परीक्षा आयोजित की जानी चाहिए।

परीक्षा प्रणाली में संस्थागत सुधार और अभ्यर्थियों की प्रमुख माँगें

आंदोलनकारी अभ्यर्थियों ने सरकार और प्रशासन के सामने बेहद स्पष्ट और ठोस माँगें रखी हैं। इनमें प्रमुख रूप से JPSC सिविल सर्विसेज प्रारंभिक परीक्षा को तुरंत रद्द करना, JSSC द्वारा आयोजित विवादित परीक्षाओं की पारदर्शी जाँच कराना और अब तक हुई सभी धाँधलियों की CBI जाँच शामिल है।

इसके अलावा छात्र माँग कर रहे हैं कि OMR शीट की कार्बन कॉपी को सार्वजनिक किया जाए, श्रेणीवार (UR, EWS, BC-I, BC-II, SC, ST) कट-ऑफ अंक जारी किए जाएँ और परीक्षा कराने वाली आरोपित एजेंसियों व माफियाओं के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।

अभ्यर्थियों का कहना है कि जब तक चयन आयोगों में पारदर्शी सुधार लागू नहीं किए जाते और जवाबदेही तय नहीं होती, तब तक राज्य के लाखों छात्रों का भविष्य अंधकार में ही रहेगा। 

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सौम्या सिंह
सौम्या सिंह
ख़ुद को तराशने में मसरूफ़

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