राँची में सोरेन सरकार की कँटीली तारें भी नहीं आईं काम, बैरिकेड फाँदकर विधानसभा के पास पहुँचे 15000+ छात्र: झारखंड में वाटरकैनन पर नाचे प्रदर्शनकारी, लाठीचार्ज के बाद भी नहीं रुके

झारखंड की राजधानी राँची में JPSC, JSSC समेत विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ चल रहा छात्रों का आंदोलन सोमवार (10 अगस्त 2026) को उग्र रूप लेता दिखाई दिया। हजारों की संख्या में छात्र नई विधानसभा के घेराव के लिए सड़कों पर उतरे और बैरिकेड्स को पार करते हुए विधानसभा परिसर की दीवार तक पहुँच गए। छात्र आंदोलन के बीच JPSC के पूर्व चेयरमैन एल खांग्याते को CID ने गिरफ्तार कर लिया गया है। परीक्षा धांधली के मामले में छापेमारी के दौरान इन्होंने इस्तीफा दिया था।

प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया, लेकिन पानी की बौछार के बावजूद छात्र पीछे हटने को तैयार नहीं हुए। कुछ प्रदर्शनकारी खेतों के रास्ते भी विधानसभा की दीवार तक पहुँच गए। पुलिस और छात्रों के बीच कई जगहों पर गतिरोध की स्थिति बनी रही।

हजारों छात्रों ने तोड़े बैरिकेड, वाटर कैनन के बावजूद नहीं रुका मार्च

छात्र सुबह पुरानी विधानसभा से नई विधानसभा की ओर विधानसभा घेराव के लिए निकले थे। पूरे झारखंड से पहुँचे अभ्यर्थियों के कारण मार्च में बड़ी संख्या में भीड़ जुटी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 15 हजार से अधिक छात्र मार्च में शामिल हो चुके थे और दूसरे छात्र भी लगातार राँची पहुँच रहे थे।

प्रदर्शनकारियों के हाथों में तिरंगा था और आंदोलन में किसी राजनीतिक दल या संगठन का झंडा-बैनर नहीं दिखाई दिया। छात्रों ने आगे बढ़ते हुए पहले बैरिकेड को पार किया, फिर तीसरे और चौथे बैरिकेड को भी तोड़ दिया। जगन्नाथपुर मंदिर के पास चौथा बैरिकेड पार करने के बाद प्रदर्शनकारी नई विधानसभा से करीब 500 मीटर की दूरी तक पहुँच गए।

इसके बाद पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए वाटर कैनन चलाया। वाटर कैनन से पानी की तेज बौछार के बावजूद प्रदर्शनकारियों का उत्साह कम नहीं हुआ। कुछ छात्र पानी की बौछार के बीच नाचते नजर आए। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने आखिरी बैरिकेड भी पार कर लिया और कुछ छात्र खेतों के रास्ते विधानसभा की दीवार तक पहुँच गए।

पुलिस लगातार छात्रों से आगे नहीं बढ़ने की अपील करती रही, लेकिन प्रदर्शनकारी अपनी माँगों पर अड़े रहे। इस दौरान छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो भी आंदोलन में शामिल रहे। पिछले नौ दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे महतो पहले एंबुलेंस से मार्च में पहुँचे और बाद में छात्रों ने उन्हें अपने कंधों पर उठा लिया। उनके हाथ में शिबू सोरेन की तस्वीर भी थी।

17वें दिन भी आंदोलन जारी, वार्ता बेनतीजा रहने के बाद विधानसभा मार्च

JPSC और JSSC की नियुक्ति परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ छात्रों के आंदोलन का सोमवार को 17वाँ दिन है। इससे पहले रविवार को छात्रों और सरकार के प्रतिनिधिमंडल के बीच तीसरे दौर की बातचीत हुई, लेकिन इसमें भी छात्रों की प्रमुख माँगों पर सहमति नहीं बन सकी।

इसके बाद छात्रों ने विधानसभा घेराव का ऐलान किया और बड़ी संख्या में अभ्यर्थी राँची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में जुटे। छात्र नेता रवींद्र पासवान ने कहा था कि पुलिस प्रशासन जहाँ भी उन्हें रोकेगा, छात्र वहीं बैठ जाएँगे और उनका आंदोलन सांकेतिक है। उनका कहना था कि छात्र अपनी माँगों पर कायम हैं और सरकार के फैसले से वे संतुष्ट नहीं हैं।

CGL परीक्षा रद्द करने और CBI जाँच की माँग

छात्रों और सरकार के बीच सबसे बड़ा विवाद JSSC CGL परीक्षा को लेकर है। प्रदर्शनकारी इस परीक्षा को रद्द करने के साथ-साथ पूरी अनियमितता की जाँच CBI से कराने की माँग कर रहे हैं। छात्रों की माँगों में परीक्षा रद्द करना, उसके बाद जाँच कराना और परीक्षा प्रणाली में जरूरी सुधार करना शामिल है।

उनका कहना है कि जब तक CGL परीक्षा रद्द नहीं की जाती और CBI जाँच के आदेश नहीं दिए जाते, तब तक आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा।

वहीं सरकार CBI जाँच की माँग पर सहमत नहीं हुई है। सरकार की ओर से रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में न्यायिक जाँच कराने की बात कही गई है। साथ ही वित्तीय अनियमितता सामने आने पर प्रवर्तन निदेशालय यानी ED से जाँच कराने का विकल्प भी रखा गया है।

विधानसभा के 750 मीटर दायरे में धारा 163, पेंटबॉल गन को लेकर भी चर्चा

छात्रों के विधानसभा घेराव के मद्देनजर राँची प्रशासन ने नई विधानसभा परिसर के 750 मीटर के दायरे में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू की है। सुरक्षा व्यवस्था के तहत पुलिस ने जगह-जगह बैरिकेडिंग की और कंटीले तार लगाए। वाटर कैनन भी तैनात किए गए थे।

इसके बावजूद छात्रों ने एक के बाद एक बैरिकेड पार किए और विधानसभा की ओर बढ़ते रहे। प्रदर्शन के दौरान सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आने के बाद पुलिस के पास कथित पैलेट गन होने की चर्चा भी हुई। हालाँकि राँची के सिटी एसपी पारस राणा ने स्पष्ट किया कि ये पैलेट गन नहीं, बल्कि पेंटबॉल गन हैं।

पेंटबॉल गन आम तौर पर एक खेल में इस्तेमाल होती है, जिसमें संपीड़ित हवा की मदद से रंग से भरी छोटी गेंदें चलाई जाती हैं। गेंद किसी व्यक्ति या सतह से टकराकर फटती है और उस पर रंग छोड़ देती है। प्रदर्शन के संदर्भ में ऐसी गन का इस्तेमाल कथित तौर पर उपद्रव करने वालों की पहचान करने के लिए किया जा सकता है।

क्योंकि उनके कपड़ों पर लगा रंग बाद में पहचान में मदद कर सकता है। कुछ पेंटबॉल सिस्टम में पेपर बॉल का इस्तेमाल भी संभव है, जिसमें मिर्च जैसी सामग्री भरी जा सकती है। पेंटबॉल गन को पैलेट गन से अलग बताया गया है। पैलेट गन में धातु के छर्रे इस्तेमाल होते हैं, जो शरीर को गंभीर नुकसान पहुँचा सकते हैं और आंखों के लिए खतरनाक हो सकते हैं।

इसके विपरीत पेंटबॉल गन में आम तौर पर नरम जेलाटिन की रंगीन गेंदें इस्तेमाल होती हैं, जो टकराने पर फटकर रंग छोड़ती हैं और सामान्य परिस्थितियों में उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति को गंभीर रूप से घायल करना नहीं, बल्कि निशान छोड़ना होता है।

फिलहाल रांची में छात्रों का मार्च पुलिस बैरिकेडिंग और वाटर कैनन के बीच विधानसभा की दीवार तक पहुँच चुका है और छात्र फिलहाल पीछे हटने के लिए तैयार नहीं दिख रहे हैं।