RSS को सिर्फ BJP के लेंस से ना देखें, संघ का उद्देश्य राजनीति से बड़ा: कोलकाता में संघ प्रमुख मोहन भागवत, बोले- हमारी मजबूती से कुछ लोग असहज हैं

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने रविवार (21 दिसंबर 2025) को कोलकाता में आयोजित संवाद कार्यक्रम के दौरान संघ, राजनीति और हिंदू समाज को लेकर अपनी बात विस्तार से रखी। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि RSS को BJP के नजरिये से देखने की कोशिश करना एक बड़ी भूल है। संघ को समझने के लिए उसे अनुभव करना जरूरी है, केवल बाहरी नजर से देखने भर से उसकी भूमिका और उद्देश्य नहीं समझे जा सकते। यह बयान ऐसे समय आया है, जब जर्मनी में कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ने RSS और उसके नेतृत्व पर विवादित टिप्पणी की थी।

RSS को BJP के चश्मे से देखना गलत: भागवत

मोहन भागवत ने कहा कि अक्सर लोग RSS को BJP के लेंस से देखने की कोशिश करते हैं जबकि संघ का उद्देश्य राजनीति से कहीं व्यापक है। उन्होंने कहा कि संघ सिर्फ एक सर्विस ऑर्गनाइजेशन नहीं है बल्कि हिंदू समाज को संगठित करने का एक सामाजिक आंदोलन है।

भागवत ने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे कोई व्यक्ति व्यायाम करता है तो इसका मतलब यह नहीं कि वह किसी पर हमला करने की योजना बना रहा है बल्कि वह खुद को स्वस्थ रख रहा है। उसी तरह संघ का काम भी आत्मबल और समाज की मजबूती से जुड़ा है, न कि किसी के खिलाफ।

संघ न किसी का दुश्मन, न पैरामिलिट्री संगठन

RSS प्रमुख ने यह भी कहा कि संघ जैसा कोई दूसरा संगठन नहीं है, इसलिए उसकी तुलना करना गलतफहमी पैदा करता है। उन्होंने संघ को पैरामिलिट्री कहे जाने की धारणा को खारिज करते हुए कहा कि गणवेश में संचलन करने का मतलब यह नहीं कि संगठन सैन्य या अर्धसैनिक है।

भागवत ने कहा कि संघ का कोई दुश्मन नहीं है लेकिन जब संगठन मजबूत होता है तो कुछ ऐसे लोग जरूर असहज होते हैं, जिनके संकीर्ण स्वार्थ इससे प्रभावित होते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि RSS के बारे में राय बनाने का अधिकार सबको है लेकिन वह सच्चाई पर आधारित होनी चाहिए, न कि मनगढ़ंत कहानियों पर।

राहुल गाँधी ने RSS पर की थी टिप्पणी

मोहन भागवत का यह बयान उस पृष्ठभूमि में आया है, जब कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ने जर्मनी की राजधानी बर्लिन में RSS पर निशाना साधते हुए कहा था कि संघ के प्रमुख खुले तौर पर यह कह रहे हैं कि सच्चाई का कोई महत्व नहीं है और ताकत ही सब कुछ है।

राहुल गाँधी ने कहा था कि भारतीय संस्कृति, महात्मा गाँधी और कॉन्ग्रेस सत्य पर आधारित हैं, जबकि RSS इस मूल भावना का पालन नहीं करता। हालाँकि, भागवत ने अपने भाषण में किसी का नाम लिए बिना कहा कि संघ का गठन किसी राजनीतिक मकसद, गुस्से या मुकाबले की भावना से नहीं हुआ, बल्कि भारतीय समाज को इस तरह तैयार करने के लिए हुआ था कि भारत फिर से विश्वगुरु बन सके।

RSS के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर कोलकाता, दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे शहरों में संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इन आयोजनों के जरिए संघ अपने विचार, कामकाज और समाज में अपनी भूमिका को लेकर खुलकर चर्चा कर रहा है, जो आने वाले दिनों में राजनीतिक और वैचारिक बहस को और तेज कर सकता है।