पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में अप्रैल 2025 में वक्फ संशोधन कानून के विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई साम्प्रदायिक हिंसा में 72 साल के हरगोबिंद दास और उनके 42 साल के बेटे चंदन दास की बर्बर हत्या के मामले में जंगीपुर की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने सोमवार (22 दिसंबर 2025) को 13 लोगों को दोषी करार दिया।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, कोर्ट ने दिलदार नदाफ, असमाउल नदाफ, इंजामुल हक, जियाउल हक, फेखारुल शेख, आजफारुल शेख, मुनीरुल शेख, इकबाल शेख, नुरुल शेख, सबा करीम, हजरत शेख, अकबर अली और यूसुफ शेख को हत्या के मामले में दोषी ठहराया। ये सभी पुलिस की चार्जशीट में नामजद थे और पड़ोसी भी थे।
जज अमिताभ मुखोपाध्याय ने कहा कि पिता-पुत्र की हत्या का वक्फ से जुड़े विरोध प्रदर्शनों का कोई लेना-देना नहीं था। ये सोची-समझी साजिश थी। दास परिवार ने दोषियों को अधिकतम सजा की माँग की है।
ये वारादात 11-12 अप्रैल 2025 की है। समसेरगंज इलाके में वक्फ संशोधन कानून के विरोध में प्रदर्शन हिंसक हो गया था। भीड़ ने धुलियन नगरपालिका क्षेत्र में दर्जनों हिंदू दुकानों और घरों पर हमला किया। हरगोबिंद दास और चंदन दास घर में थे, जब मुस्लिम हमलावरों ने दरवाजा तोड़कर उन्हें बाहर घसीटा और सड़क पर कुल्हाड़ी से काटकर मार डाला। इस हिंसा में एक और व्यक्ति की भी मौत हुई थी।
कोर्ट ने सभी 13 को बीएनएस की विभिन्न धाराओं में दोषी ठहराया है, जिनमें दो धाराएँ मौत की सजा तक की सजा देने वाली हैं। पब्लिक प्रॉसिक्यूटर समीर चट्टोपाध्याय ने कहा कि गवाहों के बयान, फोरेंसिक रिपोर्ट और पुलिस जाँच के आधार पर सभी आरोप साबित हो गए। जज ने स्पष्ट किया कि हत्या का वक्फ से कोई लेना-देना नहीं था।
नेता सुवेंदु अधिकारी ने कहा, “दीपू दास की हत्या का तरीका वही है जिस तरह मुर्शिदाबाद के समसेरगंज में हरगोबिंद दास और चंदन दास को मारा गया। हम दीपू दास के साथ-साथ पिता-पुत्र की न्याय चाहते हैं।” उन्होंने समसेरगंज के दोषियों को फाँसी की सजा की माँग की।

