उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में नस्लीय हिंसा का शिकार हुए त्रिपुरा के 24 वर्षीय MBA छात्र अंजेल चकमा की 14 दिन बाद मौत हो गई है। अस्पताल में जिंदगी की जंग हारने के बाद उनकी मौत ने एक बार फिर पूर्वोत्तर के छात्रों की सुरक्षा और नस्लीय सोच पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारी के मुताबिक, पुलिस ने मामले में हत्या की धारा जोड़ दी है और फरार आरोपित की तलाश जारी है।
क्या है पूरा मामला?
घटना के वक्त आरोपितों ने अंजेल और उनके भाई माइकल को ‘चीनी’ कहकर चिढ़ाया और नस्लीय गालियाँ दीं। चश्मदीदों के मुताबिक, अंजेल बार-बार चिल्लाते रहे, “मैं चीनी नहीं, भारतीय हूँ… क्या इसे साबित करने के लिए मुझे सर्टिफिकेट दिखाना होगा?” लेकिन हमलावरों ने एक न सुनी और उन पर धारदार हथियार से हमला कर दिया। अंजेल की गर्दन पर गंभीर चोट आई थी, जिसके बाद उन्हें ग्राफिक एरा अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
अब तक पाँच आरोपित गिरफ्तार हैं, एक फरार है। हत्या की धारा जोड़ दी गई है और नॉन-बेलेबल वारंट जारी हुआ है। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने भी मामले का संज्ञान लिया है। यह घटना सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि नस्लीय मानसिकता के खिलाफ चेतावनी है।

