बॉम्बे HC ने खारिज की सज्जन जिंदल के खिलाफ रेप केस को री-ओपन करने की याचिका, क्लोजर रिपोर्ट को ठहराया सही: शिकायतकर्ता के पुराने बयान का दिया हवाला

बॉम्बे हाईकोर्ट ने JSW ग्रुप के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर सज्जन जिंदल के खिलाफ बलात्कार और आपराधिक धमकी के मामले को दोबारा खोलने की एक 32 साल की महिला की याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने मजिस्ट्रेट कोर्ट के उस आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, जिसमें पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार कर केस बंद किया गया था।

चीफ जस्टिस श्री चंद्रशेखर और जस्टिस गौतम ए. अंखड़ की डिवीजन बेंच ने 24 दिसंबर 2025 को यह फैसला सुनाया। याचिका में अप्रैल 2024 के मजिस्ट्रेट आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें बंदरा के मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट ने बीकेसी पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR पर पुलिस की बी-सम्मरी रिपोर्ट मंजूर की थी।

FIR में सज्जन जिंदल पर IPC की धारा 376 (बलात्कार), 354 (महिला की गरिमा भंग करना) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत आरोप लगाए गए थे। जिंदल ने इन आरोपों को हमेशा झूठा और बेबुनियाद बताया है। जाँच में पुलिस ने पाया कि आरोपों के समर्थन में कोई सबूत नहीं हैं। शिकायत में काफी देरी थी और शिकायतकर्ता ने कई मौकों के बावजूद मजिस्ट्रेट के सामने धारा 164 के तहत बयान दर्ज नहीं कराया।

पुलिस ने होटल रिकॉर्ड और ट्रैवल डिटेल्स के आधार पर साबित किया कि आरोपों में बताई तारीखों पर जिंदल ताज लैंड्स एंड, बंदरा या अन्य जगहों पर मौजूद ही नहीं थे। शिकायतकर्ता ने खुद एक हलफनामा देकर कहा था कि वह केस आगे नहीं लड़ना चाहतीं और क्लोजर रिपोर्ट पर कोई ऐतराज नहीं है। इसी आधार पर मजिस्ट्रेट ने केस बंद कर दिया।

बाद में महिला ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर जाँच दोबारा शुरू करने, CBI या कोर्ट मॉनिटर्ड SIT को सौंपने और तीन महीने में चार्जशीट दाखिल करने की माँग की। उन्होंने जिंदल को राजनीतिक सपोर्ट वाला ताकतवर शख्स बताया और पुलिस पर उनके हितों की रक्षा न करने का आरोप लगाया।

हाईकोर्ट ने इन दलीलों को खारिज करते हुए कहा, “जो मजिस्ट्रेट पुलिस रिपोर्ट से निपटता है, वह पुलिस को अपनी राय बदलने के लिए मजबूर नहीं कर सकता। पुलिस रिपोर्ट में दर्ज तथ्यों के निष्कर्ष पर मजिस्ट्रेट को शक नहीं करना चाहिए था, खासकर जब खुद अभियोक्त्री ने बयान दिया कि वह मामले में आगे लड़ना नहीं चाहती।”

बेंच ने शिकायतकर्ता को उच्च शिक्षित मेडिकल प्रोफेशनल बताते हुए कहा कि उन्होंने जिंदल के साथ संबंधों में जानबूझकर और सूचित चुनाव किया। कोर्ट ने नोट किया कि महिला ने कोई धोखा या गलत बहाने का आरोप नहीं लगाया। व्हाट्सएप चैट से लगता है कि वह जिंदल के प्रति उत्साही थीं। कोर्ट ने कहा कि पुलिस को जाँच के आधार पर स्वतंत्र राय बनाने का हक है और दोबारा जाँच का कोई कानूनी आधार नहीं है। इसके बाद याचिका खारिज कर दी गई।