MP में दो IAS अधिकारियों ने AI से बनाई तस्वीरों के आधार पर लिया राष्ट्रीय जल पुरस्कार, खंडवा जिला प्रशासन ने किया इनकार: जानें क्या है पूरा मामला

मध्य प्रदेश कैडर के दो IAS अधिकारी खंडवा जिले के कलेक्टर ऋषव गुप्ता और जिला पंचायत के CEO डॉ. नागार्जुन बी. गौड़ा सोशल मीडिया पर लगे आरोपों के बाद विवाद में आ गए हैं। सोशल मीडिया पर दावा किया गया कि इन अधिकारियों ने एक राष्ट्रीय पुरस्कार हासिल करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से बनाई गई तस्वीरों और फर्जी आँकड़ों का इस्तेमाल किया।

यह विवाद तब शुरू हुआ जब सोशल मीडिया विशेषकर X पर कई पोस्ट वायरल होने लगीं। इन पोस्ट्स में आरोप लगाया गया कि अधिकारियों ने राष्ट्रीय जल पुरस्कार (National Water Award) जीतने के लिए पानी संरक्षण से जुड़ी तस्वीरों में हेरफेर की और भ्रामक आँकड़े पेश किए।

दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में जल संरक्षण कार्यों से जुड़ी कुछ तस्वीरों को बनाने या उनमें बदलाव करने के लिए AI का इस्तेमाल किया गया। हालाँकि, जिला प्रशासन ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए उन्हें निराधार और भ्रामक बताया है।

क्या है पूरा विवाद?

दोनों अधिकारियों पर लगे आरोप छठे राष्ट्रीय जल पुरस्कार से जुड़े हैं। इस पुरस्कार में खंडवा जिले को ‘जल संचय, जन भागीदारी’ पहल के तहत किए गए कार्यों के लिए सम्मानित किया गया था। यह अभियान केंद्र सरकार के ‘कैच द रेन’ कार्यक्रम के तहत चलाया गया था।

सोशल मीडिया यूजर्स का दावा है कि अधिकारियों ने AI से बनाई गई फर्जी तस्वीरें जमा कीं, जिनमें से कुछ पर वॉटरमार्क भी हटाया नहीं गया था। यह भी आरोप लगाया गया कि केवल 2-3 फीट गहरे छोटे गड्ढों को कुआँ और तालाब दिखाया गया और पुरस्कार पाने के लिए काम के आँकड़ों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया।

प्रेम भारद्वाज नाम के एक यूजर ने X पर इससे जुड़ी एक पोस्ट शेयर किया जो तेजी से वायरल हो गया। इसके बाद इस मुद्दे पर सोशल मीडिया पर तीखी बहस और आलोचना शुरू हो गई।

खंडवा जिले को कौन-सा पुरस्कार मिला?

खंडवा जिला जनसंपर्क कार्यालय द्वारा 17 नवंबर 2025 को साझा की गई जानकारी के अनुसार, छठे राष्ट्रीय जल पुरस्कार 18 नवंबर को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में प्रदान किए जाने थे। ‘सर्वश्रेष्ठ ग्राम पंचायत’ श्रेणी में मध्य प्रदेश के खंडवा जिले की कावेश्वर पंचायत को दूसरा स्थान का पुरस्कार मिला।

यह पुरस्कार राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कलेक्टर ऋषव गुप्ता और जिला पंचायत CEO डॉ. नागार्जुन बी. गौड़ा को प्रदान किया। इसके अलावा ‘जल संचय, जन भागीदारी’ श्रेणी में खंडवा जिले को देश में पहला स्थान मिला जिसके तहत जिले को 2 करोड़ रुपए की नकद राशि दी गई।

जिले के अधिकारियों का कहना है कि जल शक्ति मंत्रालय के ‘कैच द रेन’ अभियान के तहत बड़े पैमाने पर किए गए जल संरक्षण कार्यों के कारण खंडवा को यह सम्मान मिला। कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने पहले कहा था कि जनभागीदारी के जरिए खंडवा जिले ने जल संरक्षण में राष्ट्रीय स्तर पर एक मिसाल कायम की है।

इस अभियान के तहत प्रशासन ने योजना के नियमों के अनुसार सभी जल संरक्षण कार्यों का विस्तृत डाटा और तस्वीरें सरकारी पोर्टल पर अपलोड की थीं।

कावेश्वर पंचायत में क्या काम हुआ?

जिला प्रशासन के अनुसार, कावेश्वर ग्राम पंचायत को देशभर में किए गए जल संरक्षण कार्यों के आधार पर चुना गया। पंचायत को 1.5 लाख रुपए की नकद राशि और एक ट्रॉफी दी गई।

पिछले कुछ वर्षों में कावेरी नदी के उद्गम स्थल पर बड़े पैमाने पर काम किया गया जिसमें पवित्र कुंड का जीर्णोद्धार भी शामिल है। आसपास के पहाड़ी इलाकों में रिज-टू-वैली वाटरशेड विकास मॉडल अपनाया गया। करीब 50 हेक्टेयर क्षेत्र में कंटूर कार्य किया गया। साथ ही 55 गली प्लग (चेक डैम), 35 तालाब, जल संग्रहण संरचनाएँ, हैंडपंप और बोरवेल रिचार्ज सिस्टम तथा रिचार्ज शाफ्ट बनाए गए।

जिला प्रशासन ने आरोपों को नकारा

खंडवा जिला प्रशासन ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। शनिवार (27 दिसंबर 2025) को प्रशासन ने स्पष्ट किया कि अभियान के तहत किए गए कार्यों से जुड़ी कुल 1,29,046 तस्वीरें आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड की गई हैं।

प्रशासन का कहना है कि अपलोड की गई सभी तस्वीरों को केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय द्वारा वेरिफाई किया गया है। इसके साथ ही, कुल कार्यों में से एक प्रतिशत का सत्यापन मौके पर जाकर किया गया।

प्रशासन ने यह भी कहा कि इंटरनेट पर फैलाए जा रहे आरोपों का ‘जल संचय, जन भागीदारी’ अभियान या पुरस्कार चयन प्रक्रिया से कोई संबंध नहीं है। ये आरोप जनसुनवाई में सामने आईं शिकायतों पर आधारित हैं, जो पुरस्कार से जुड़ी नहीं थीं।

कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने कहा, “पूरे हुए कार्यों की जियो-टैग की गई तस्वीरें अनिवार्य होती हैं। यदि कोई कार्य अधूरा है, तो वह पोर्टल पर लंबित रहता है और समय के साथ उसकी पहचान हो जाती है। यदि किसी भी मामले में अतिरिक्त राशि निकाली गई होगी, तो उसकी जाँच की जाएगी।”