राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने शनिवार (3 जनवरी 2026) को मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में कहा कि ‘लव जिहाद’ जैसी सामाजिक समस्याओं से निपटने की शुरुआत परिवार से होनी चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि परिवारों में संवाद की कमी, जागरूकता का अभाव और सामूहिक सामाजिक प्रतिक्रिया न होना, इस तरह की चुनौतियों को बढ़ावा देता है। भागवत ‘स्त्री शक्ति संवाद’ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे, जहाँ उन्होंने महिलाओं की भूमिका, सामाजिक जिम्मेदारी और मानसिक स्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर भी विस्तार से विचार रखे।
परिवार और संवाद की भूमिका पर जोर
RSS प्रमुख ने कहा कि हर परिवार को आत्ममंथन करना चाहिए कि उसकी बेटी किसी बाहरी प्रभाव में कैसे आ जाती है। उन्होंने इसे परिवार के भीतर संवाद की कमी से जोड़ा और कहा कि अगर परिवारों में खुलकर बातचीत हो, तो कई समस्याओं को समय रहते रोका जा सकता है। मोहन भागवत के अनुसार, माता-पिता और बच्चों के बीच भरोसे और समझ का माहौल बनाना बेहद जरूरी है।
भागवत ने कहा कि इस दिशा में तीन स्तरों पर प्रयास जरूरी हैं। पहला, परिवारों में निरंतर संवाद। दूसरा, लड़कियों को जागरूक और आत्मरक्षा के लिए सक्षम बनाना और तीसरा, ऐसे अपराध करने वालों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई। उन्होंने सामाजिक संगठनों से भी सतर्क रहने और समाज की सामूहिक प्रतिक्रिया को मजबूत करने की अपील की, ताकि इस तरह की घटनाओं पर प्रभावी रोक लग सके।
महिलाओं की भूमिका और मानसिक स्वास्थ्य पर विचार
कार्यक्रम में भागवत ने कहा कि धर्म, संस्कृति और सामाजिक व्यवस्था की सुरक्षा में महिलाओं की अहम भूमिका है। उन्होंने महिलाओं के सशक्तिकरण और पारिवारिक और सामाजिक जीवन में उनकी सक्रिय भागीदारी पर बल दिया। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अब वह दौर खत्म हो चुका है, जब सुरक्षा के नाम पर महिलाओं को घरों तक सीमित रखा जाता था।
मानसिक स्वास्थ्य का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि परिवार में कोई भी सदस्य खुद को अकेला महसूस न करे। बच्चों पर पेरेंट्स की अपेक्षाएँ थोपने को लेकर उन्होंने कहा कि इससे बचने जरूरी है, क्योंकि जीवन में केवल सफलता ही नहीं, बल्कि उसका अर्थ और संतुलन भी महत्वपूर्ण है। कार्यक्रम में RSS के अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी भी उपस्थित रहे।

