SIR के बाद चुनाव आयोग ने भेजा अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन को नोटिस, जानिए डेटा में क्या निकली गलती

चुनाव आयोग ने बुधवार (7 जनवरी) को नोबेल विजेता अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन को मतदाता सूची संशोधन (SIR) के संबंध में एक नोटिस जारी किया है। बता दें कि 92 वर्षीय प्रोफेसर सेन अभी विदेश में हैं, इसलिए यह नोटिस पश्चिम बंगाल के बीरभूम स्थित उनके पैतृक घर पर उनके चचेरे भाई को सौंपा गया।

अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि वोटर लिस्ट में एक ‘तार्किक विसंगति’ (Logical Discrepancy) पाए जाने के कारण केवल एक ही नोटिस जारी किया गया है। आयोग अब इस मामले में 16 जनवरी 2026 को उनके आवास पर सुनवाई करना चाहता है, जिसके बारे में उनके परिवार ने उन्हें जानकारी देने का आश्वासन दिया है।

अधिकारियों के अनुसार, यह मामला तब सामने आया जब चुनाव फॉर्म में अमर्त्य सेन और उनकी माता की आयु के बीच का अंतर 15 वर्ष से भी कम पाया गया। इस तार्किक विसंगति (illogical discrepancy) को स्पष्ट करने के लिए चुनाव आयोग ने उनसे स्पष्टीकरण माँगा है।

आयोग ने यह भी साफ किया कि प्रोफेसर सेन की उम्र 85 वर्ष से अधिक है, इसलिए उन्हें किसी दफ्तर जाने की जरूरत नहीं होगी। चुनाव आयोग के वरिष्ठ नागरिकों की सहायता संबंधी नियमों के तहत, संबंधित बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) खुद उनके आवास पर जाकर मामले की सुनवाई करेंगे।

टीएमसी की आलोचना

इस मामले ने पश्चिम बंगाल में एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) ने इस कदम को अपमानजनक बताते हुए चुनाव आयोग और भाजपा की कड़ी आलोचना की है। TMC के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने कहा कि अमर्त्य सेन जैसी सम्मानित हस्ती को नोटिस भेजना ‘बंगाल के लोगों का अपमान‘ है।

भाजपा और चुनाव आयोग ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि यह नोटिस पूरी तरह प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है और इसका राजनीति से कोई संबंध नहीं है।

इसके बावजूद, TMC ने बुधवार (7 जनवरी 2026) को अपने हमले तेज कर दिए और चुनाव आयोग व भाजपा पर ‘बंगाल विरोधी’ एजेंडा चलाने का आरोप लगाया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर पार्टी ने सवाल उठाया कि एक विश्व प्रसिद्ध नोबेल विजेता के साथ संदिग्ध जैसा व्यवहार क्यों किया जा रहा है? पार्टी ने लिखा, “एक नोबेल विजेता संदेह से परे होना चाहिए, है ना? लेकिन अगर वह बंगाली हैं, तो उन्हें एक अपराधी की तरह सुनवाई के नोटिस मिलते हैं।”

TMC के आरोपों पर EC का जवाब

विवाद बढ़ने के बाद चुनाव आयोग (EC) ने स्पष्ट किया है कि मतदाता सूची संशोधन (SIR) एक सामान्य प्रक्रिया है जो सभी मतदाताओं पर समान रूप से लागू होती है। आयोग ने कहा कि उम्र या नाम की स्पेलिंग जैसी तकनीकी गलतियों को बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) आसानी से ठीक कर सकते हैं।

चुनाव आयोग ने इस बात पर जोर दिया कि इस तरह की विसंगतियों से किसी मतदाता की योग्यता या वोट देने के अधिकार पर कोई असर नहीं पड़ता है। अधिकारियों ने दोहराया कि इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य केवल मतदाता सूची को सटीक और साफ-सुथरा बनाना है, न कि किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना।