लंदन स्थित एक पब्लिक रिलेशंस (PR) कंपनी पर अरबपतियों, सरकारों और ताकतवर संगठनों से जुड़े विकिपीडिया पेज से हेरफेर करने का आरोप लगा है। यह आरोप ‘द ब्यूरो इंवेस्टिगेट्स’ (The Bureau Investigates) की एक जाँच के बाद सामने आए हैं। इस खुलासे ने एक बार फिर तथाकथित ऑनलाइन एनसाइक्लोपीडिया पर उपलब्ध कंटेंट की विश्वसनीयता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पैसे लेकर एडिटिंग और राजनीतिक नजदीकियाँ
जाँच में पाया गया कि पोर्टलैंड कम्युनिकेशंस (Portland Communications) नाम की एक एलीट पीआर फर्म ने पेड विकिपीडिया एडिटिंग का फायदा उठाया। यह काम सीधे न होकर सब-कॉन्ट्रैक्टर्स के जरिए किया जाता था। इस प्रक्रिया को अक्सर ‘विकिलॉन्ड्रिंग’ कहा जाता है, जिसमें आलोचनात्मक तथ्यों को धीरे-धीरे कमजोर किया जाता है और अनुकूल छवि पेश की जाती है। कंपनी के संस्थापक टिम एलन वर्तमान में यूनाइटेड किंगडम के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर के कम्युनिकेशंस डायरेक्टर हैं।
कंपनी के पूर्व कर्मचारियों ने जाँचकर्ताओं को बताया कि 2010 के शुरुआती वर्षों में विकिपीडिया पर गलत एडिटिंग के लिए कंपनी के पकड़े जाने के बाद भी यह प्रैक्टिस जारी रही। फर्क सिर्फ इतना था कि इसके बाद यह काम बिचौलियों के माध्यम से किया जाने लगा ताकि सीधे जिम्मेदारी से बचा जा सके। जबकि विकिपीडिया की अपनी नीतियों के अनुसार पेड एडिटिंग की अनुमति नहीं है। यह ब्रिटेन की पीआर संस्थाओं द्वारा तय किए गए नैतिक मानकों का भी उल्लंघन है।
ऑपरेशन के केंद्र में कौन था?
इस पूरे नेटवर्क के केंद्र में थे वेल्स के वेब कंसल्टेंट राडेक कोटलारेक जो Web3 Consulting नाम की कंपनी चलाते थे। कई इंडस्ट्री सूत्रों के मुताबिक, उनकी कंपनी ने फर्जी विकिपीडिया अकाउंट्स का एक नेटवर्क संभाला जिसके जरिए लगभग एक दशक तक पोर्टलैंड के क्लाइंट्स के लिए एडिटिंग की जाती रही।
विकिपीडिया की एडिट हिस्ट्री के विश्लेषण में Web3 Consulting से जुड़े कम से कम 26 नकली अकाउंट्स सामने आए। इन अकाउंट्स को बाद में बैन किया गया लेकिन उससे पहले वे कई सालों तक सक्रिय रहे और राजनीतिक व व्यावसायिक रूप से संवेदनशील विषयों पर रिकॉर्ड में हेर-फेर करते रहे।
कतर, अरबपति और नैरेटिव मैनेजमेंट
बताया जा रहा है कि विकिपीडिया पर की गई पेड एडिटिंग से सबसे ज्यादा फायदा कतर को हुआ। कतर ने 2013 में इस पीआर फर्म को हायर किया था, जब 2022 फीफा वर्ल्ड कप से पहले उसके मानवाधिकारों से जुड़े रिकॉर्ड पर अंतरराष्ट्रीय जाँच तेज हो रही थी।
पूर्व कर्मचारियों के अनुसार, विकिपीडिया पर नियमित रूप से ऐसे बदलाव करने के निर्देश दिए जाते थे, जिनसे प्रवासी मजदूरों की मौतों और स्टेडियम निर्माण में हुए अत्याचारों की रिपोर्टिंग को हल्का किया जा सके।
इसके अलावा, व्यावसायिक हितों और विवादास्पद मामलों से जुड़े पेज में भी बदलाव किए गए। इनमें कतर के कारोबारियों पर आतंकवादी फंडिंग के आरोपों से जुड़े संदर्भ हटाना शामिल था। इसी तरह की रणनीति अफ्रीका में गेट्स फंडेड कृषि परियोजना की विफलताओं से जुड़े सबूतों को छिपाने और गद्दाफी के बाद के लीबिया में एक खास गुट को बढ़ावा देने के लिए भी अपनाई गई।
यह खुलासा क्यों अहम है
भले ही विकिपीडिया पर लेफ्ट-लिबरल झुकाव का आरोप लगता रहा हो लेकिन फिर भी इसे सूचना के प्रमुख स्रोतों में से एक माना जाता है। गूगल भी अपने सर्च रिजल्ट्स में विकिपीडिया के कंटेंट का इस्तेमाल करता है। ChatGPT जैसे AI बॉट्स भी बड़े पैमाने पर विकिपीडिया पर उपलब्ध जानकारी पर निर्भर करते हैं। ऐसे में इस तथाकथित एनसाइक्लोपीडिया की जानकारी में बदलाव सीधे तौर पर नैरेटिव को प्रभावित करता है।
विकिपीडिया का दावा है कि वह नियमों के उल्लंघन की सक्रिय जाँच करता है। समय-समय पर पेड एडिटिंग और पेज क्रिएशन से जुड़े आरोप सामने आते रहे हैं जिससे प्लेटफॉर्म पर मौजूद कंटेंट की प्रामाणिकता पर सवाल उठते हैं। खुद विकिपीडिया भी कहता है कि वह कोई भरोसेमंद स्रोत नहीं है और अकादमिक दुनिया में अक्सर उसे संदर्भ के तौर पर खारिज कर दिया जाता है।
विकिपीडिया तटस्थ नहीं बल्कि पक्षपाती है
दरअसल, ऑपइंडिया ने विकिपीडिया के पक्षपात को लेकर कई रिपोर्टें की हैं। विकिपीडिया पर तैयार किया गया डोजियर बताता है कि समस्या सिर्फ कुछ एडिटर्स की नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की है। एडिटिंग पैटर्न, स्रोतों के नियम, पेज लॉक और आंतरिक चर्चाओं का अध्ययन करने से साफ होता है कि कैसे विकिपीडिया की नीतियाँ कुछ खास नैरेटिव को आगे बढ़ाती हैं और बाकी को रोक देती हैं।
‘रिलायबल सोर्स’ की संकीर्ण परिभाषा, आधिकारिक खंडनों को खारिज करना और जबरदस्ती की सहमति पक्षपात को स्थाई बना देती है। जो चीज बाहर से तटस्थ जैसी दिखती है, वह अक्सर उन नियमों का नतीजा होती है जो असहज तथ्यों को छान देते हैं और असहमति की आवाज को दबा देते हैं।

