रूढ़ियों को तोड़कर आगे बढ़ रहीं बहन-बेटियाँ: 77वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति मुर्मू का संदेश, कहा- राष्ट्र की विकास यात्रा के ध्वज-वाहक हैं युवा

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने रविवार (25 जनवरी 2026) को 77वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र को संबोधित किया। इस दौरान राष्ट्रपति ने कहा, “देश और विदेश में रहने वाले, हम भारत के लोग, उत्साह के साथ, गणतंत्र दिवस का उत्सव मनाने जा रहे हैं। मैं, आप सभी को गणतन्त्र दिवस के राष्ट्रीय पर्व की हार्दिक बधाई देती हूँ।” उन्होंने कहा, “उत्तर से लेकर दक्षिण तक तथा पूर्व से पश्चिम तक हमारी प्राचीन सांस्कृतिक एकता का ताना-बाना हमारे पूर्वजों ने बुना था। राष्ट्रीय एकता के स्वरूपों को जीवंत बनाए रखने का हर प्रयास सराहनीय है।”

राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि हमारा संविधान विश्व इतिहास के सबसे बड़े लोकतांत्रिक गणराज्य का आधार ग्रंथ है। साथ ही, उन्होंने वंदे मातरम् की रचना के 150 साल पूरे होने पर मनाए जा रहे उत्सवों का जिक्र किया। उन्होंने कहा, “भारत माता के स्वरूप की वंदना का यह गीत जन-जन में राष्ट्रप्रेम का संचार करता है।”

राष्ट्रपति ने आगे कहा, “आप सब, हमारे जीवंत गणतंत्र को शक्तिशाली बना रहे हैं। हमारी तीनों सेनाओं के बहादुर जवान, मातृभूमि की रक्षा के लिए सदैव सतर्क रहते हैं। हमारे कर्तव्यनिष्ठ पुलिसकर्मी तथा केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के जवान, देशवासियों की आंतरिक सुरक्षा के लिए तत्पर रहते हैं। हमारे अन्नदाता किसान, देशवासियों के लिए पोषण सामग्री उत्पन्न करते हैं। कर्मठ और प्रतिभाशाली महिलाएँ अनेक क्षेत्रों में नए प्रतिमान स्थापित कर रही हैं। डॉक्टर, नर्स और सभी स्वास्थ्य-कर्मी देशवासियों के स्वास्थ्य की देखभाल करते हैं। सफाई मित्र, देश को स्वच्छ रखने में प्रमुख भूमिका निभाते हैं। हमारे प्रबुद्ध शिक्षक, भावी पीढ़ियों का निर्माण करते हैं।”

नारी शक्ति पर राष्ट्रपति का संदेश

राष्ट्रपति ने नारी शक्ति की बढ़ती भागीदारी को लेकर भी बात की है। उन्होंने ‘राष्ट्रीय मतदाता दिवस’ का जिक्र करते हुए कहा, “मतदान में महिलाओं की बढ़ती हुई भागीदारी हमारे गणतंत्र का एक शक्तिशाली आयाम है। महिलाओं का सक्रिय और समर्थ होना देश के विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उनके स्वास्थ्य, शिक्षा, सुरक्षा एवं आर्थिक सशक्तीकरण हेतु किए जा रहे राष्ट्रीय प्रयासों से अनेक क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है।”

उन्होंने कहा, “हमारी बहनें और बेटियाँ, परंपरागत रूढ़ियों को तोड़कर आगे बढ़ रही हैं। महिलाएँ देश के समग्र विकास में सक्रिय योगदान दे रही हैं। दस करोड़ से अधिक self-help-groups से जुड़ी बहनें विकास की नई परिभाषा लिख रही हैं। महिलाएँ, खेत-खलिहानों से लेकर अन्तरिक्ष तक, स्व-रोजगार से लेकर सेनाओं तक, अपनी प्रभावी पहचान बना रही हैं। पंचायती राज संस्थाओं में महिला जन-प्रतिनिधियों की संख्या लगभग 46 प्रतिशत है। महिलाओं के राजनैतिक सशक्तीकरण को नई ऊंचाई देने वाले ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ से, महिलाओं के नेतृत्व द्वारा विकास की सोच को अभूतपूर्व शक्ति मिलेगी।”

किसानों-युवाओं पर जताया भरोसा

किसानों को लेकर उन्होंने कहा, “हमारे अन्नदाता किसान, हमारे समाज के तथा अर्थ-व्यवस्था के मेरुदंड हैं। किसानों की परिश्रमी पीढ़ियों ने हमारे देश को खाद्यान्न में आत्मनिर्भर बनाया है। किसानों के परिश्रम के बल पर ही हम कृषि आधारित उत्पादों का निर्यात कर पा रहे हैं। ‘पीएम किसान सम्मान निधि’ के द्वारा किसान भाई-बहनों के योगदान को आदर दिया जा रहा है तथा उनके प्रयासों को संबल प्रदान किया जा रहा है।”

राष्ट्रपति ने कहा कि विश्व की सबसे बड़ी युवा आबादी हमारे देश में है और गर्व की बात है कि हमारे युवाओं में असीम प्रतिभा है। उन्होंने कहा, “हमारे युवा उद्यमी, खिलाड़ी, वैज्ञानिक और professionals, देश में नई ऊर्जा का संचार कर रहे हैं। आज बड़ी संख्या में हमारे युवा, स्व-रोजगार की सफलता के प्रभावशाली उदाहरण प्रस्तुत कर रहे हैं। हमारे युवा ही, हमारे राष्ट्र की विकास यात्रा के ध्वज-वाहक हैं।”

पीएम गरीब कल्याण अन्न योजना को लेकर राष्ट्रपति ने कहा, “दशकों से गरीबी के साथ जूझ रहे करोड़ों देशवासियों को, गरीबी की सीमा-रेखा से ऊपर लाया गया है। साथ ही, ऐसे प्रयास किए जा रहे हैं कि वे पुनः गरीबी से पीड़ित न होने पाएं। अंत्योदय की संवेदना को कार्यरूप देने वाली, विश्व की सबसे बड़ी योजना, ‘पीएम गरीब कल्याण अन्न योजना’ इस सोच पर आधारित है कि 140 करोड़ से अधिक आबादी वाले हमारे देश में कोई भी भूखा न रहे। इस योजना से लगभग 81 करोड़ लाभार्थियों को सहायता मिल रही है।”

गुलामी की मानसिकता से मुक्त होने का संकल्प लिया है: राष्ट्रपति

राष्ट्रपति ने अपने संदेश में कहा कि प्राचीन काल से ही पूरी मानवता हमारी सभ्यता, संस्कृति तथा आध्यात्मिक परम्परा से लाभान्वित होती रही है। उन्होंने कहा, “आयुर्वेद, योग तथा प्राणायाम को विश्व समुदाय ने सराहा है, अपनाया है। यह गर्व की बात है कि आज का भारत, नए आत्म-विश्वास के साथ, अपनी गौरवशाली परम्पराओं के प्रति सचेत होकर आगे बढ़ रहा है। हाल के वर्षों में हमारी आध्यात्मिक परंपरा के पवित्र स्थलों को जन-चेतना के साथ जोड़ा गया है।”

राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने संदेश में कहा, “नियत अवधि में गुलामी की मानसिकता के अवशेषों से मुक्त होने का समयबद्ध संकल्प किया गया है। भारतीय ज्ञान परंपरा में दर्शन, चिकित्सा, खगोल विज्ञान, गणित, साहित्य तथा कला की महान विरासत उपलब्ध है। यह गर्व की बात है कि ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ जैसे प्रयासों से भारतीय परंपरा में उपलब्ध रचनात्मकता को संरक्षित और प्रसारित किया जा रहा है।”

आपरेशन सिंदूर को लेकर राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा, “पिछले वर्ष, हमारे देश ने ऑपरेशन सिंदूर के द्वारा आतंकवाद के ठिकानों पर सटीक प्रहार किया। आतंक के अनेक ठिकानों को ध्वस्त किया गया तथा बहुत से आतंकवादियों को उनके अंजाम तक पहुंचाया गया। सुरक्षा के क्षेत्र में हमारी आत्मनिर्भरता से ऑपरेशन सिंदूर की ऐतिहासिक सफलता को शक्ति मिली।”