‘मैं कोई एंजेल नहीं हूँ’: इटली के चर्च में लगी पेंटिंग में दिखा पीएम जॉर्जिया मेलोनी जैसा चेहरा, जानें क्या है पूरा विवाद?

इटली में इस वक्त एक चर्च की पेंटिंग को लेकर जबरदस्त चर्चा और विवाद चल रहा है। वजह यह है कि एक पुराने चर्च की दीवार पर बने ‘फ्रेस्को’ को जब हाल ही में मरम्मत के बाद दोबारा सामने लाया गया, तो उसमें बने एक फरिश्ते का चेहरा इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी से मिलता-जुलता दिखाई देने लगा।

इस मामले ने इटली में इतना तूल पकड़ लिया कि अब इटली के संस्कृति मंत्रालय ने खुद इसकी जाँच के आदेश दिए हैं। प्रधानमंत्री मेलोनी ने भी इस पूरे विवाद पर प्रतिक्रिया दी है और साफ कहा कि ‘वह कोई एंजेल नहीं हैं।’

पूरा मामला रोम शहर के एक पुराने चर्च सैन लोरेंजो के लुसीना बेसिलिका का है। इस चर्च में दीवार पर बना एक फ्रेस्को है, जिसमें दो छोटे फरिश्तों को दिखाया गया है। यह फ्रेस्को करीब 25 साल पहले साल 2000 में बनाया गया था। हाल ही में चर्च की दीवारों को पानी से नुकसान पहुँचा था, जिसके बाद इस फ्रेस्को की मरम्मत और रेनोवेशन का काम शुरू किया गया।

मरम्मत का यह काम उसी कलाकार ब्रूनो वेलेंटिनेट्टी ने किया, जिन्होंने करीब 25 साल पहले इस फ्रेस्को को बनाया था। रेनोवेट होने के बाद जब पेंटिंग को दोबारा देखा गया, तो एक फरिश्ते का चेहरा लोगों को इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी जैसा लगने लगा। यही बात इस विवाद की जड़ बन गई।

इटली के अखबार ने छापी ‘पहले और बाद’ की तस्वीर

मामला तब और बढ़ गया जब इटली के प्रमुख अखबार ‘La Repubblica’ ने इस पेंटिंग की ‘पहले और बाद’ की तस्वीरें छाप दीं। तस्वीरों में फरिश्ते के चेहरे में साफ बदलाव दिखाई देने की बात कही गई, जिसके बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई। लोगों ने सवाल उठाए कि क्या मरम्मत के दौरान जानबूझकर फरिश्ते का चेहरा प्रधानमंत्री जैसा बनाया गया है।

विवाद बढ़ने पर 31 जनवरी 2026 को इटली के संस्कृति मंत्रालय ने तुरंत हस्तक्षेप किया। मंत्रालयय ने रोम के वरिष्ठ कला संरक्षण अधिकारियों को चर्च भेजकर जाँच करने के आदेश दिए। जाँच का मकसद यह पता लगाना है कि मरम्मत के दौरान कला संरक्षण के नियमों का पालन हुआ है या नहीं और क्या किसी तरह का जानबूझकर बदलाव किया गया है।

विपक्षी दल और प्रधानमंत्री मेलोनी की प्रतिक्रियाएँ

इस मुद्दे पर इटली में राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ भी सामने आईं। विपक्षी दल फाइव स्टार मूवमेंट ने कहा कि धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों को किसी भी तरह के राजनीतिक प्रतीय का प्रचार से दूर रखा जाना चाहिए। वहीं चर्च प्रशासन ने सफाई दी कि मरम्मत केवल पानी से हुए नुकसान को ठीक करने के लिए की गई थी और इसके पीछे कोई राजनीतिक मकसद नहीं था।

खुद कलाकार ब्रूनो वेलेंटिनेट्टी ने भी आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि उन्होंने सिर्फ उसी मूल पेंटिंग को रेनोवेट किया है जो साल 2000 में बनाई गई थी और उन्होंने चेहरे में कोई नया प्रयोग नहीं किया है। वहीं चर्च के पादरी ने भी माना कि फरिश्ते की का चेहरा मेलोनी जैसा लग सकता है, लेकिन यह महज एक संयोग है।

इस पूरे विवाद के बीच प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने भी चुप्पी तोड़ी। उन्होंने सोशल मीडिया पर पेंटिंग की तस्वीर साझा करते हुए मजाकिया अंदाज में लिखा,’मैं कोई एंजेल नहीं हूँ।’ उनके इस बयान के बाद यह मामला अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भी चर्चा का विषय बन गया।