जमीयत के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने ये याचिका डाली है। इसमें उन्होंने कहा है कि संवैधानिक पदों पर बैठे लोग समाज में नफरत फैला रहे हैं, उनके खिलाफ सख्त दिशानिर्देश जारी किया जाए।
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने अवैध घुसपैठ और राज्य की डेमोग्राफी में बदलाव को लेकर गोलपारा में एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान कहा कि मियाँ समुदाय के नाम पर असम में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी घुसपैठियों को किसी भी सूरत में काम करने या बसने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
सीएम हिमंता ने कहा कि जब तक वह सत्ता में रहेंगे, ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। उन्होंने कहा, “वे यहाँ शांति से नहीं रह सकते हैं और जब हम उनके लिए मुश्किलें खड़ी करेंगे, तभी वे राज्य छोड़ेंगे।” हिमंता ने जोर देकर कहा कि कानून के अनुसार कोई भी विदेशी घुसपैठिया असम की जमीन पर रोजगार नहीं कर सकता।
उन्होंने पुराने बयानों पर जारी विवादों को लेकर स्पष्ट किया कि उन्होंने कोई गलत बात नहीं कही बल्कि यह सच सामने रखा है कि नागरिकों का अधिकार अपने ही देश में काम करने का होता है, न कि घुसपैठ करके दूसरे राज्य में बसने का।
मुख्यमंत्री ने यह भी चेतावनी दी कि असम की जनसंख्या संरचना तेजी से बदल रही है और आने वाली जनगणना में इसके गंभीर नतीजे सामने आ सकते हैं। उन्होंने राज्यवासियों को सतर्क करते हुए कहा कि असम की पहचान और सुरक्षा के लिए सरकार किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरतेगी।

